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सिंदूर खेला के साथ हुई मां की विदाई
ब्यूरो/अमर उजाला, फरीदाबाद
Updated Fri, 23 Oct 2015 07:05 PM IST
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तीन दिवसीय दुर्गा पूजा महोत्सव का शुक्रवार को सिंदूर खेला कार्यक्रम के साथ समापन हो गया। विवाहिताओं में परंपरागत तरीके से सिंदूर खेला गया।
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इस मौके पर बंगाल से आए कलाकारों व बच्चों ने सांस्कृतिक कार्यक्रमों पर प्रस्तुति दी। इसके बाद शोभायात्रा निकालकर यमुना के घाटों पर मूर्तियों को विसर्जन के लिए ले जाया गया।
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शहर में जगह-जगह लगे 25 से अधिक दुर्गा पंडालों से मां की विदाई हुई। इस दौरान पंडालों में महिलाओं की खासी भीड़ देखने को मिली। सेक्टर-29 स्थित काली मंदिर में सुबह दशमी पूजा के बाद सिंदूर खेला हुआ।
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शाम को मां की प्रतिमा का शृंगार कर उन्हें विसर्जन के लिए कालिंदी कुंज यमुना घाट ले जाया गया। सेक्टर-तीन में जयकारे लगाते हुए भक्तों ने मां दुर्गा को विदा किया। श्रद्धालुओं ने मंझावली यमुना घाट पर मां की प्रतिमा को विसर्जित किया।
उधर, नीलम बाटा रोड स्थित काली मंदिर में लगे पंडाल से भी मां की विदाई धूमधाम से हुई। महिलाओं व बच्चों ने विसर्जन शोभायात्रा में जमकर धमाल मचाया। प्रतिमा का विसर्जन कालिंदी कुंज यमुना घाट पर हुआ।
अशोका एंक्लेव, सेक्टर-7, सेक्टर-15, सेक्टर-16, ग्रीन फील्ड, स्प्रिंग फील्ड सहित शहर में जगह-जगह लगे पंडालों से देवी विदा हुईं। सिंदूर के महत्व के बारे में पंडित तरुण भट्टाचार्य बताते हैं कि मां की विदाई सिंदूर खेला के साथ ही होती है।
इसमें महिलाएं एक दूसरे को सिंदूर लगाकर अपने आपसी प्रेम को व्यक्त करती हैं। उन्होंने बताया कि भारतीय संस्कृति में सिंदूर को शुभ माना जाता है।
विवाह के समय बेटी की मांग में सिंदूर व उसका शृंगार करके ही उसे विदा किया जाता है। उसी प्रकार मां दुर्गा को भी ससुराल के लिए विदा किया जाता है।