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आसान नहीं होगी दिल्ली में शीला की वापसी, 3 कारण

Thu, 28 Aug 2014 04:28 PM IST
Updated Thu, 28 Aug 2014 04:28 PM IST
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sheila dixit's re entry in delhi is not easy.

केरल की राज्यपाल शीला दीक्षित के इस्तीफे के बाद दिल्ली की सक्रिय राजनीति में उनकी वापसी की चर्चाएं जोरों पर हैं। दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी में भी शीला दीक्षित की वापसी को लेकर अटकलें जारी हैं।

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प्रदेश कांग्रेस के कुछ नेता दिल्ली में शीला की वापसी को जरूरी मानते हैं। उनका मानना है कि शीला की वापसी से कांग्रेस को राजधानी में अपनी खोई हुई जमीन वापस मिल सकती है।
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जबकि कुछ नेताओं का मानना है कि अब पार्टी को युवा नेताओं को आगे बढ़ने का मौका देना चाहिए। ‌तीन बार दिल्ली की मुख्यमंत्री रह चुकीं शीला दीक्षित पिछले चुनावों में बुरी तरह हार गईं थी। उन्हें अरविंद केजरीवाल ने हराया था।
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पार्टी के युवा नेताओं का कहना है कि शीला पर कई आरोप लग चुके हैं ऐसे में उनकी वापसी पार्टी के लिए नुकसानदायक हो सकती है।

शीला के लिए कांग्रेस में शुरू हुई लड़ाई

sheila dixit's re entry in delhi is not easy.

कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और दिल्ली प्रभारी शकील अहमद ने कहा कि शीला की वापसी का फैसला पार्टी हाईकमान को करना है। इसके पहले उन्हें खुद इस बात के लिए पार्टी से बात करनी होगी कि वह दोबारा राजनीति में आना चाहती हैं या नही।

उन्होंने यह भी कहा कि शीला किसी और पार्टी में भी शामिल हो सकती हैं। यह उनकी मर्जी पर निर्भर करता है।

बता दें कि शीला दीक्षित के इस्तीफे की अटकलों के समय से ही दिल्ली में उनकी वापसी की सुगबुगाहट होने लगी थी। विधायक मतीन अहमद और मो. आसिफ ने इस मामले में पहले ही कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मिलकर उनकी वापसी की मांग की थी।

शीला के खास और करीबी माने जाने वाले इन दोनों नेताओं का कहना था कि दिल्ली में अगर कांग्रेस को दोबारा सत्ता हासिल करनी है तो शीला की वापसी बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि शीला के आने के बाद उनके 15 साल के विकास को जनता के सामने रखा जाएगा जिससे उनके वोट बैंक में बढ़ोत्तरी होगी।

कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष अरविंदर सिंह लवली की जगह शीला दीक्षित को लाना ज्यादा बेहतर साबित होगा। उन्होंने कहा कि शीला के पास सरकार चलाने का अनुभव है जबकि लवली अभी युवा हैं।

उन्होंने कहा कि युवा प्रदेश अध्यक्ष का पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ सामंजस्य बिल्कुल ठीक नहीं है। इससे पार्टी में दो गुट बन गए हैं। लवली के व्यवहार में थोड़ा घमंडी हो गया है जिससे पार्टी के अन्य नेताओं से उनकी नहीं पटती।

'AAP को शीला से नहीं है कोई खतरा'

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वहीं, दिल्ली में कांग्रेस का सूपड़ा साफ करने वाली आम आदमी पार्टी ने कहा ‌है कि शीला की वापसी से उनका कोई नुकसान नहीं होने वाला। पार्टी के वरिष्ठ नेता मनीष सिसोदिया ने कहा कि आप को शीला से कोई खतरा नहीं है।

उन्होंने कहा कि चुनाव में शीला की हार के बाद राज्यपाल बनाए जाने का फैसला सरासर गलत था। उन्हें इसलिए इस पर बैठाया गया ताकि वह जेल जाने से बच सकें। क्योंकि शीला दीक्षित पर घोटाले और सरकारी धन के दुरुपयोग समेत कई मामले चल रहे हैं।

आम आदमी पार्टी ने एक बार फिर शीला पर लगे आरोपों का पुलिंदा खोलते हुए कहा कि इन्हीं वजहों से दिल्ली की जनता ने उन्हें नकार दिया था, अगर वह राजनीति में वापसी करती हैं तो उन्हें फिर से उन सभी सवालों का जवाब देना पड़ेगा।

यही नहीं, घोटालों में उनकी मिलीभगत का भी पर्दाफाश होगा। बता दें कि हाल ही में कैग की ओर से जारी की गई रिपोर्ट में इस बता का खुलासा हुआ था कि शीला सरकार के समय विभिन्न विभागों में करीब 3000 करोड़ रुपए का घोटाला हुआ है। शीला सरकार ने कई योजनाओं के लिए पैसे तो मंजूर किए लेकिन वो योजनाएं सिर्फ फाइलों में ही पूरी हुईं। हकीकत कोसों दूर रही।

शीला की मुश्किलें बढ़ा सकता है ये केस!

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राज्यपाल पद से इस्तीफा देने के बाद शीला के सामने सबसे बड़ी मुश्किल से है कि उन पर चल रहे केसों पर एक बार फिर कार्रवाई शुरू हो जाएगी। राज्यपाल होने के नाते उन्होंने हाईकोर्ट से ये अपील की थी कि राज्यपाल होने के कारण उन पर कोई भी केस नहीं चल सकता।

दरअसल भाजपा नेता विजेंद्र सिंह और आरटीआई कार्यकर्ता विवेक गर्ग की ओर से दायर की गई याचिकाओं में शीला दीक्षित पर अपने चुनाव प्रचार में सरकारी धन के इस्तेमाल का आरोप लगा था।

आरोप है कि शीला ने साल 2008 में हुए चुनावों में सरकारी खजाने से करीब 22.56 करोड़ रुपए अपने निजी फायदे के लिए इस्तेमाल किए थे। इस मामले में शीला के खिलाफ आईपीसी की धारा 409 के तहत मामला दर्ज करने का आदेया दिया गया था।

शीला ने निचली अदालत के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती देते हुए कहा था कि विशेषाधिकार के तहत एक राज्यपाल पर कोई भी केस दर्ज नहीं हो सकता। अब राज्यपाल पद से शीला दीक्षित के इस्तीफे के बाद इस बात की भी चर्चा है कि उनके खिलाफ चल रहे मामलों में सुनवाई फिर शुरू होगी।

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