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देशद्रोह मामला: शरजील इमाम की अंतरिम जमानत याचिका पर फैसला सुरक्षित, 10 जून को आएगा फैसला

Mon, 06 Jun 2022 09:33 PM IST
प्रशांत कुमार एएनआई, दिल्ली
एएनआई, दिल्ली Published by: प्रशांत कुमार Updated Mon, 06 Jun 2022 09:33 PM IST
सार

ट्रायल कोर्ट ने हाल ही में शरजील को जमानत देने से इनकार कर दिया था। सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद हाईकोर्ट ने शरजील को पुन: ट्रायल कोर्ट में आवेदन दायर करने को कहा।

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Sharjeel Imam interim bail plea Delhi Court reserved order 2019 sedition case against him
शरजील इमाम (फाइल फोटो) - फोटो : Facebook

विस्तार

अदालत ने देशद्रोह मामले में शरजील इमाम की जमानत की अंतरिम जमानत याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया। शरजील ने देशद्रोह के कानून पर सुप्रीम कोर्ट के हालिया निर्देश के मद्देनजर अंतरिम जमानत के लिए निचली अदालत में याचिका दायर की है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमिताभ रावत ने कहा कि 10 जून को आदेश सुनाएंगे। अदालत ने  30 मई को अंतरिम जमानत अर्जी पर दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया था। वह 27 मई को देशद्रोह मामले में अंतरिम जमानत के लिए निचली अदालत में गए थे। अभियोजन पक्ष द्वारा बनाए रखने का मुद्दा उठाए जाने के बाद उनके वकील ने दिल्ली उच्च न्यायालय से जमानत याचिका वापस ले ली थी। हाईकोर्ट ने उन्हें जमानत के लिए निचली अदालत का दरवाजा खटखटाने को कहा था।

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जमानत अर्जी तालिब हुसैन, अहमद इब्राहिम और कार्तिक वेणु ने दायर की है। अर्जी में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट के हालिया निर्देश के मद्देनजर शरजील इमाम को जमानत दी जानी चाहिए। अधिवक्ता तालिब हुसैन ने तर्क दिया कि देशद्रोह कानून पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए निर्देश के आलोक में मुकदमे पर रोक लगाई जानी चाहिए और शरजील इमाम को अंतरिम जमानत पर रिहा किया जाना चाहिए।
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दूसरी ओर विशेष लोक अभियोजक (एसपीपी) ने तर्क दिया कि हालांकि देशद्रोह कानून के तहत कार्यवाही सुप्रीम कोर्ट द्वारा रोक दी गई है, लेकिन  गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) की धारा लागू है। इन वर्गों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। इन परिस्थितियों में आरोपी को अंतरिम जमानत नहीं दी जानी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय दंड संहिता की धारा 124-ए (देशद्रोह) के तहत लगाए गए आरोप के संबंध में सभी लंबित अपीलों और कार्यवाही को स्थगित रखने का निर्देश दिया था। सीएए और एनआरसी के खिलाफ कथित भाषणों के लिए शरजील इमाम के खिलाफ दर्ज देशद्रोह के मामले में जमानत के लिए आवेदन पहले दिल्ली उच्च न्यायालय में दायर किया गया था। 
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न्यायमूर्ति मुक्ता गुप्ता और न्यायमूर्ति मिनी पुष्कर्ण की पीठ ने विशेष लोक अभियोजक (एसपीपी) अमित प्रसाद की आपत्ति दर्ज करने के बाद आरोपी को छूट दी थी कि वह निचली अदालत ने पुन: जमातन के लिए आवेदन दायर कर सकता है। जमानत अर्जी में कहा गया था कि निचली अदालत ने उसकी जमानत अर्जी खारिज कर दी क्योंकि उसने पाया कि उसके खिलाफ धारा 124-ए के तहत प्रथम दृष्टया मामला बनता है। आवेदन में कहा गया था कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के मद्देनजर विशेष न्यायालय द्वारा आक्षेपित आदेश में उठाए गए बाधा को दूर किया जाता है,और धारा 124-ए आईपीसी के तहत अपराध के बारे में टिप्पणियों को लंबित अपीलकर्ता के खिलाफ कार्यवाही में विचार नहीं किया जा सकता है। 

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