Sharjeel Imam Case: जेएनयू के पूर्व छात्र को अंतरिम जमानत से इनकार, मारपीट मामले में Tihar Jail के अधिकारी तलब
Sharjeel Imam interim bail: सीएए और एनआरसी के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के दौरान विभिन्न स्थानों पर कथित देशद्रोही भाषणों से जुड़े मामलों के सिलसिले में इमाम जनवरी 2020 से हिरासत में हैं। वह फरवरी 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों की बड़ी साजिश से जुड़े एक मामले में भी आरोपी है।
विस्तार
अदालत ने शनिवार को दिल्ली दंगो के मामले में आरोपी जेएनयू के पूर्व छात्र शरजील इमाम को अंतरिम जमानत देने से इनकार कर दिया। आरोपी ने देशद्रोह के संबंध में सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के तहत अंतरिम जमानत मांगी थी। वहीं अदालत ने जेल परिसर में इमाम पर कथित हमले से संबंधित मामले में तिहाड़ जेल के अधिकारियों को तलब किया है। शरजील ने जेल में मारपीट का आरोप लगाया है। अदालत ने जेल अधिकारियों द्वारा पेश सीसीटीवी फुटेज देखने के बाद अधिकारियों को पेश होने का निर्देश दिया है।
कडकडढूमा अदालत स्थित अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमिताभ रावत ने अपने फैसले में शरजील इमाम के उस तर्क को खारिज कर दिया कि हालही में सर्वोच्च न्यायालय ने देशद्रोह की धारा के इस्तेमाल पर विस्तृत सुनवाई का निर्णय किया था और देशद्रोह के सभी मामलों में फिलहाल कार्रवाई न करने का निर्देश दिया था। शरजील ने यह भी तर्क रखा था कि वह पिछले 28 माह से जेल में है और यदि उस पर लगे आरोप साबित भी होते है तो भी अधिकतम सात वर्ष की कैद का प्रावधान है। उनके खिलाफ झूठे आरोप लगाए गए है। ऐसे में मामले के निपटारे तक उन्हें अंतरिम जमानत प्रदान की जाए। वहीं, अदालत ने दूसरी तरफ इमाम से मारपीट मामले में जेल अधिकारियों को एक अगस्त को सुनवाई के दौरान उपस्थित रहने का निर्देश दिया है। हांलाकि अदालत ने फुटेज देखने के बाद कहा कि प्रथम दृष्टया यह हमला नहीं है।
शरजील के अधिवक्ता ने कहा कि धक्का देना और थप्पड़ मारना हमले के दायरे में आता है। इमाम ने आरोप लगाया था कि 30 जून को तिहाड़ जेल परिसर के अंदर एक सुरक्षा जांच के दौरान उन पर हमला किया गया और उसे आतंकवादी कहा गया। उन्होंने दावा किया कि उन्हें उनके कॉर्नर रूम सेल के अंदर कुछ सेवादारों ने धक्का दिया और पीटा। सेवादार कैदी हैं जो जेल कर्मचारियों की सहायता करते हैं।
उन्होंने अपने आवेदन में कहा कि हमले से जेल प्रशासन की मंशा का पता चलता है। हालांकि घटना के समय सहायक जेल अधीक्षक मौजूद थे, उन्होंने स्थिति को शांत करने के लिए कुछ नहीं किया। इमाम के वकील अहमद इब्राहिम ने कहा कि जेल अधिकारियों के हलफनामे के मुताबिक घटना के दौरान उपाधीक्षक मौजूद थे। उन्होंने इस जवाब को झूठा बताते हुए कहा उन्हें फुटेज में कहीं नहीं देखा गया था। वकील ने कहा कि फुटेज से पता चलता है कि तलाशी के दौरान सेवादारों की कोई निगरानी नहीं थी। अदालत ने उनके तर्क पर मामले की सुनवाई 1 अगस्त तय करते हुए जेल अधीक्षक और सहायक अधीक्षक सहित तिहाड़ जेल के अधिकारियों को सुनवाई में उपस्थित रहने के लिए कहा है।
दिल्ली पुलिस ने मामले में इमाम के खिलाफ चार्जशीट दायर की थी, जिसमें उसने आरोप लगाया था कि उसने केंद्र सरकार के प्रति घृणा, अवमानना और असंतोष को भड़काने वाले भाषण दिए और लोगों को उकसाया जिसके कारण दिसंबर 2019 में हिंसा हुई।