Sharjeel Imam Case: जेल अधिकारियों ने सीसीटीवी फुटेज सहित पेश की रिपोर्ट, 23 जुलाई को होगी सुनवाई
दिल्ली पुलिस ने मामले में शरजील इमाम के खिलाफ चार्जशीट दायर की थी। इसमें उसने आरोप लगाया था कि उसने केंद्र सरकार के प्रति घृणा, अवमानना और असंतोष को भड़काने वाले भाषण दिए और लोगों को उकसाया जिसके कारण दिसंबर 2019 में हिंसा हुई।
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तिहाड़ जेल अधिकारियों ने दिल्ली दंगो के मामले में आरोपी एवं जेएनयू के पूर्व छात्र शरजील इमाम पर कथित तौर पर हमला करने के मामले में अदालत के समक्ष सीसीटीवी फुटेज सहित अपनी रिपोर्ट पेश कर दी। तकनीकी आधार पर फुटेज की वीडियो अदालत के समक्ष नहीं चलाई जा सकी। वहीं शरजील ने अंतरिम जमानत प्रदान करने का आग्रह किया। अदालत ने मामले की सुनवाई 23 जुलाई तक स्थगित कर दी।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमिताभ रावत के समक्ष जेल अधिकारियों ने शरजील के आरोपों पर सीसीटीवी फुटजे व अपनी रिपोर्ट पेश की। शरजील ने हाल ही में आरोप लगाया था कि तिहाड़ जेल के सहायक अधीक्षक ने आठ से दस लोगों के साथ 30 जून को सेल में उनके साथ मारपीट की थी। उन्होंने कथित तौर पर उन्हें आतंकवादी और देशद्रोही कहा। अदालत के समक्ष तकनीकी सहायता की कमी के कारण फुटेज नहीं चलाया जा सका। अदालत ने मामले की सुनवाई 23 जुलाई तय की है।
वहीं संक्षिप्त सुनवाई के दौरान शरजील इमाम की ओर से पेश अधिवक्ता अहमद इब्राहिम ने कहा कि उनके मुवक्किल के खिलाफ कई मामले मुख्य रूप से भाषणों से संबंधित हैं जो वर्तमान आपराधिक जांच का विषय है। उन्होंने कहा कि शरजील जमानत पाने का हकदार है क्योंकि उसके भागने की संभावना नहीं है, न ही गवाहों को प्रभावित करने या सबूतों के साथ छेड़छाड़ करने का जोखिम है। जहां तक यूएपीए की धारा-13 के तहत आरोप का सवाल है, अपने भाषणों में शरजील इमाम ने हिंसा या हिंसक गतिविधियों के लिए उकसाने के लिए कोई काम नहीं कया।
विशेष लोक अभियोजक अमित प्रसाद ने आपत्ति जताई और कहा कि कार्यवाही जारी रखने पर पूरी तरह रोक नहीं लगाई जा सकती। मामले में औपचारिक और तकनीकी विशेषज्ञ गवाह हैं। उनकी जांच से मामले में कोई पक्षपात नहीं होगा। फिजिकल गवाहों की परीक्षा के लिए अदालत उस विशेष चरण में फैसला कर सकती है। उन्होंने कहा कि अंतरिम जमानत के लिए अदालत को अपराध की गंभीरता पर विचार करना होगा।
शरजील इमाम पर नागरिकता (संशोधन) अधिनियम और नागरिकों के राष्ट्रीय रजिस्टर (एनआरसी) पर सरकार के खिलाफ भड़काऊ भाषण देने का आरोप है, विशेष रूप से दिसंबर 2019 में जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय में, जिसके कारण कथित तौर पर विश्वविद्यालय के बाहर के क्षेत्र में हिंसा हुई। शरजील अपने कथित भड़काऊ भाषणों के लिए देशद्रोह के आरोपों का भी सामना कर रहे हैं। वह जनवरी 2020 से न्यायिक हिरासत में हैं।