'1930 में ही पड़ गई थी कांग्रेस में वंशवाद की नींव'
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मशहूर वकील व देश के पूर्व कानून मंत्री शांति भूषण ने कहा है कि देश में सत्ता से पैसा कमाने और पैसे से सरकार चलाने का खेल चल रहा है।
क्षेत्रीय व दोनों राष्ट्रीय पार्टियां वंशवाद को बढ़ावा देने में लगी हैं। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार व सांप्रदायिकता इस देश के लिए सबसे बड़ा खतरा है।
इससे मुकाबला करने के लिए आम आदमी को आगे आना होगा। शांति भूषण शनिवार को नगर निगम सभागार में नव प्रयास सेवा संगठन एवं नगर विकास मंच द्वारा आयोजित विचार गोष्ठी में बोल रहे थे।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी में वंशवाद की नींव सन् 1930 में लाहौर अधिवेशन के दौरान ही पड़ गई थी। उस अधिवेशन में मोतीलाल नेहरू ने महात्मा गांधी से जवाहर लाल नेहरू को पार्टी का अध्यक्ष बनाने की पैरवी की थी।
इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए जवाहर लाल नेहरू ने 1957 में इंदिरा गांधी को अध्यक्ष बनवाया। कुछ ऐसी ही परंपरा आज भी चल रही है। इस मौके पर रनवीर सिंह, जगन डागर, प्रताप भाटी, संजीव चौधरी, ब्रजेश चंद गुप्ता, आशु भाटी, जय प्रकाश, राकेश ने भी अपने विचार रखे।
एबीवीपी ने किया विरोध प्रदर्शन
शांति भूषण के आगमन की सूचना मिलते ही अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् के कार्यकर्ता नगर निगम सभागार पहुंच गए और नारेबाजी करने लगे। कार्यकर्ता जम्मू कश्मीर के मुद्दे पर प्रशांत भूषण के दिए बयान पर जवाब मांग रहे थे। विरोध को देखते हुए आयोजकों ने पुलिस बुला ली।