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शेहनाज ट्रेजरीवाल बोलीं, 'शेम ऑन यू नमो सर'

Fri, 12 Dec 2014 09:23 AM IST
Updated Fri, 12 Dec 2014 09:23 AM IST
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shame on you namo sir

एमटीवी प्रसिद्ध होस्ट शेहनाज ट्रेजरीवाल, देश के उन ताकतवर पुरुषों से मदद की गुहार लगाई है । ट्रेजरीवाल ने उबर केस की रौशनी में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, अमिताभ बच्चन, सचिन तेंदूलकर, शाहरुख खान, सलमान खान, आमिर खान और अनिल अंबानी को एक खुला पत्र लिखा है। जिसमें शेहनाज महिलाओं से हो रहे बलात्कार के मामले में इन ताकतवर पुरुषों से लड़ने की बात की है।

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मॉडल कहती हैं कि ये पीड़ित के लिए ही शर्म की बात नहीं है बल्कि उन सभी जिम्मेदार और ताकतवर लोगों के लिए भी शर्म की बात है जो हमारे देश में हैं । टीवी के प्रसिद्ध चेहरे में शामिल रही शेहनाज बेहद निजी घटनाओं का जिक्र करती हैं जिनका उन्होंने मुम्बई की सड़कों पर पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल करते वक्त सामना किया था।
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वह लिखती हैं कि जब मैं किशोरी थी तो उस वक्त मैं सपना देखती थी कि मेरे पास एक मशीन गन हो, जिससे मैं उन सारे पुरुषों को मार सकूं जिन्होंने मुझे जबरदस्ती छूने की कोशिश की। ये एक बच्चे के लिए बेहद डरावना सपना है क्या आपने सोचा है ?

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बहुत ही शर्मनाक है ये सब

shame on you namo sir

जब मुझे बतौर मॉडल एफवाईजेसी की तरफ से पहला असाइनमेन्ट मिला, तो मैं कॉलेज से सीधे ही स्क्रीन टेस्ट के लिए चली गई। इसलिए मेरे पास बेहतर ड्रेस पहनने का मौका नहीं था। मुझे वो वक्त बहुत अच्छे से याद है जब मैं रेड बॉडी सूट और काले रंग की स्कर्ट पहन कर ऑडीशन के लिए गयी थी। ये मेरे लिए नर्क से कम नहीं था। अगर 'वो सब' सिर्फ ड्रेस की वजह से होता तो मैं ऐसी ड्रेस कभी नहीं पहनना चाहती।

उन्होंने यह भी बताया कि कैसे अपने कॉलेज के पहले दिन बस में सफर कर रही उनकी बहन की टीशर्ट के अंदर एक आदमी ने हाथ डाल दिया था। उनकी दोस्त जो कि 16 साल की थी उसके साथ ट्रेन में रेप कर दिया गया। एक व्यक्ति भरी भीड़ में उनकी मां को छूकर निकल गया। ये बेहद डरावना है और प्रभावशाली पुरुषों के लिए शर्म की बात।

मैन खुद के बचाव के लिए कई रास्ते अपनाए। मैं हमेशा अपने सामने एक बैग रखती थी, और मेरा पंच हमेशा तैयार रहता था। मैं हर 20 सेकेण्ड के बाद देखती थी, कि मेरे पीछे कौन है। ऐसे में कई बार मैने उन पुरुषों को थप्पड़ जड़े जिन्होंने मुझसे छूने की कोशिश की। कई बार मुझे भी थप्पड़ खाने पड़े। कुछ समय मुझे लोगों ने बचाया पर हर वक्त नहीं।

किस बात के अच्छे दिन मोदी जी

shame on you namo sir

वो विनती करती हैं कि महिलाओं को इन सारी हरकतों पर बोलना चाहिए, उनका सामना करना चाहिए। किसी भी तरह से उत्पीड़न के ये मामले बर्दाश्त नहीं किए जा सकते। प्रधानमंत्री जी आप कौन से अच्छे दिन की बात जापान और ऑस्ट्रेलिया में करते हैं, जब महिलाएं आपके देश की राजधानी में स्वतंत्रता पूर्वक सड़कों पर दिन के उजाले में भी नहीं चल सकतीं। ये सिर्फ शर्म की बात नहीं है। बल्कि ये आपके लिए शर्म की बात है।

मै मानती हूं कि आप अच्छे व्यक्ति हैं इसी वजह से इन मामलों में मैं आपसे मदद की गुहार लगा रही हूं। आप कानून बदलिए। मैं कहती हूं सिर्फ शर्म से काम नहीं चलेगा। छेड़छाड़ और यौन उत्पीड़न करने वालों को सजा दीजिए।

मार दीजिए इन बलात्कारियों को। मैं सार्वजनिक बंदीकरण करण की बात नहीं करना चाहती, जिसे मैं खुद चाहती हूं और महिलाएं भी। क्योंकि ये वास्तविकता से मेल नहीं खाता। हमें बेहतर देश बनाना है। मैं चाहती हूं इन्हें सिर्फ मौत की सजा मिले। जल्दी कीजिए।

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