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किसान के बेटे ने महसूस किया आंदोलनकारियों का दर्द, मुफ्त बांटे किसानों को जैकेट-स्वेटर

Thu, 10 Dec 2020 08:19 PM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Vikas Kumar Updated Thu, 10 Dec 2020 08:19 PM IST
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Shakeel Mohammad Qureshi gave free jackets and sweaters to agitating farmers at singhu border
सिंघु बॉर्डर पर बैठे किसान - फोटो : amar ujala

हर चीज की कीमत नहीं होती, हक की लड़ाई में डटे किसान समर्थकों को सर्द रातों में ठंड से बचाने के लिए कुछ करने से मिलने वाले शुकून का पहले कभी अहसास नहीं हुआ। एक किसान के बेटे ने किसानों के दर्द को महसूस कर, सिंघु बॉर्डर पर मुफ्त जैकेट और स्वेटर बांट रहे हैं। 

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बागपत (उत्तर प्रदेश) निवासी 35 वर्षीय शकील मोहम्मद कुरैशी रोजाना सुबह करीब आठ बजे गर्म कपड़े बेचने के लिए स्टॉल लगाते हैं। स्वेटर और जैकेट बेचकर रोजाना करीब 2500 रुपये कमा रहे थे। लेकिन दो हफ्ते से कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसानों को सर्द रातों से बचाने के लिए उन्होंने 300 जैकेट और स्वेटर मुफ्त बांटे। कीमत पूछने पर कहा कि हर चीज की कीमत नहीं आंकी जा सकती है, एक नेक काम में मेरी तरफ से योगदान है।
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किसान के पुत्र शकील ने बताया कि मेरे पिता एक किसान हैं, इसलिए मुझे पता है कि खेती में कितनी परेशानियां हैं। नरेला में अपनी पत्नी और बच्चों के साथ रह रहे शकील ने कहा कि सरकार को कम से किसानों को उनकी फसल की उचित कीमत तो मिलनी चाहिए। अधिकार नहीं मिलने पर ही किसान विरोध प्रदर्शन पर उतारू हुए हैं। प्रदर्शनकारियों की मदद के लिए बॉर्डर पर लंगर, निशुल्क चिकित्सा, बिस्कुट, ब्रश, टूथपेस्ट, साबुन, कंबल सहित सर्दियों के लिए कई तरह के सामान अलग-अलग संस्थाओं और स्वयंसेवियों की तरफ से दिए जा रहे हैं। दुकान छोटी है तो क्या, दिल तो हैं बड़ा शकील की दुकान से निशुल्क जैकेट मिलने से खुश किसान ने जब दुआएं दी तो सिर झुकाकर इसे स्वीकार करते हुए चेहरे पर मुस्कान दिखी। 
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किसान ने कहा कि अभी एक छोटी दुकान है, लेकिन दिल बड़ा है। धीरे-धीरे शाम ढल गया, इसी दौरान निहंग सिखों के एक समूह के सदस्यों ने स्वेटर और जैकेट के बारे में पूछा तो शकील ने कहा कि आज तो खत्म हो गए, सुबह फिर लेकर आऊंगा।


बर्तन हो या कपड़े, धोने का है इंतजाम 
लंगर के बाद वहां इकट्ठा होने वाले बर्तन धोने, कचरा इकट्ठा करने, मोबाइल चार्जिंग की सुविधा के अलावा कपड़ों की धुलाई के लिए वॉशिंग मशीनें भी पंजाब के गांवों से लेकर किसान पहुंचे हैं। आंदोलनकारियों को आसपास के ग्रामीण भी पूरा सहयोग कर रहे हैं। सर्दियों में महिलाओं और बच्चों को दिक्कत न हो, इसलिए अपने घरों में परिवार के सदस्यों की तरह स्नान या जरूरी सुविधाएं मुहैया की जा रही हैं।

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