शाहीन बाग के प्रदर्शनकारियों को नहीं मिली अनुमति, पुलिस ने वापस भेजा
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नागरिकता कानून के खिलाफ शाहीन बाग से अमित शाह के आवास तक मार्च निकालने वाले प्रदर्शनकारियों को गृह मंत्री से मिलने की अनुमति नहीं मिली। पुलिस ने रविवार को मार्च कर रहे लोगों को आधे रास्ते से ही वापस भेज दिया है। अनुमति नहीं मिलने पर वे भी लौट आए। उन्होंने कहा कि वो ऐसा कोई काम नहीं करेंगे जो कानून के खिलाफ हो।
रविवार दोपहर को ही प्रदर्शनकारियों ने निर्धारित योजना के तहत धरनास्थल से मार्च शुरू कर गृह मंत्री के आवास की ओर बढ़ना शुरू किया था। उस समय भी उऩ्हें दिल्ली पुलिस से अनुमति नहीं मिली थी। प्रदर्शन कर रही दादियों ने कहा था कि वे पुलिस से बात करेंगी और अगर अनुमति नहीं मिली तो वे आगे नहीं जाएंगी। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस को लिखित में कहा था कि 4,000 से 5,000 प्रदर्शनकारी शाह के आवास की ओर मार्च करेंगे।
प्रदर्शनकारी मुख्यत: महिलाएं पिछले दो महीने से संशोधित नागरिकता कानून (सीएए), राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) और राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) के खिलाफ धरना दे रहे हैं।
Delhi Police: We have asked protesters(#ShaheenBagh) that who all are in the delegation which wants to meet HM Amit Shah today so that we can plan a meeting but they said that they all want to go. We have denied that but we will see what we can do pic.twitter.com/Xk4c1dauVR
— ANI (@ANI) February 16, 2020
वहीं, एक महिला का कहना है कि प्रदर्शनकारी आज गृह मंत्री के आवास की ओर मार्च करेंगे। हम उनसे सीएए-एनआरसी-एनपीआर को वापस लेने की अपील करेंगे। साथ ही उन्होंने यह चेतावनी भी दी कि जब तक मांग पूरी नहीं होगी, तब तक प्रदर्शन जारी रहेगा।
बताया जा रहा है कि गृह मंत्री अमित शाह की बातचीत की अपील के बाद शाहीन बाग के प्रदर्शनकारियों पर दबाव है। वैसे प्रदर्शनकारियों का एक धड़ा गृह मंत्री से मिलने का विरोध कर रहा है।
शाहीन बाग: प्रदर्शनकारियों में वार्ता पर उभरे मतभेद
इस मुलाकात में कोई प्रतिनिधिमंडल नहीं होगा, बल्कि हर वो व्यक्ति होगा, जिसे सीएए पर आपत्ति है। उधर, प्रदर्शनकारियों की नजर सोमवार को इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई पर भी टिकी है।
बातचीत का विरोध कर रहे प्रदर्शनकारियों के धड़े का कहना है कि आंदोलन सीएए को वापस लेने के लिए शुरू किया गया था। अब सरकार से बातचीत के लिए जाने पर भी इसे वापस लिया जाएगा, ऐसी कोई गारंटी नहीं है।
चुनाव से पहले सरकार का कोई नुमाइंदा उनसे बातचीत के लिए नहीं पहुंचा। इससे साफ है कि सरकार इसे वापस लेने के मूड में नहीं है। चुनाव के बाद गृह मंत्री ने प्रदर्शनकारियों से बातचीत की अपील की है। सिर्फ इसलिए वहां जाना ठीक नहीं है। इस संभावित मुलाकात के मुद्दे पर दोनों धड़ों में तनाव है।
इस सुनवाई के पहले ही प्रदर्शनकारी बीच का रास्ता तलाश रहे हैं। रास्ता खाली करने के पक्ष में फैसला आने की स्थिति में वे आगे की रणनीति पर विचार कर रहे हैं। उधर, पुलिस भी कोर्ट के रुख पर नजर लगाए है।