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जानिए, अब तक कैसी रही शाबान बुखारी की जिंदगी

Sat, 22 Nov 2014 11:46 AM IST
Updated Sat, 22 Nov 2014 11:46 AM IST
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Shaban bukhri is going to be next nayab shahi imam of jama masjid.

लगभग 400 साल पहले उजबेकिस्तान के बुखारा के शाह ने अब्दुल गफूर शाह बुखारी को दिल्ली भेजा था। 1656 में मुगल बादशाह शाहजहां ने गफूर बुखारी को जामा मस्जिद का पहला शाही इमाम घोषित किया। इसी साल जामा मस्जिद में पहली नमाज अता की गई और तब से शाही इमाम की यह परंपरा चली आ रही है।

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इस बारे में अब के शाही इमाम सैयद इमाम बुखारी का कहना है कि पिछले 400 सालों से हमारे खानदान में शाही इमाम घोषित करने की परंपरा चली आ रही है। परिवार में जो भी इस काम के लिए सबसे योग्य दिखता है उसे ही जिम्मेदारी दी जाती है। शाबान को नायब घोषित करना पीढ़ियों से चली आ रही परंपरा का हिस्सा है।
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शनिवार को इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए 19 साल के शाबान बुखारी को देश के सबसे बड़े और प्रतिष्ठित 'जामा मस्जिद' का नायब शाही इमाम बनाया जाना है। नायब बनाने की इस परंपरा को दस्तारबंदी कहा जाता है।
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महज 19 साल की उम्र में इतनी बढ़ी जिम्मेदारी संभालने जा रहे शाबान के बारे में कम ही लोग जानते हैं। हालांकि शाही इमाम का नायाब बनाए जाने की घोषणा के बाद से ही उनका नाम सुर्खियों में है।

100 धर्म गुरुओं के बीच होगी ताजपोशी

Shaban bukhri is going to be next nayab shahi imam of jama masjid.

शाबान के बारे में उनके पिता अहमद बुखारी का कहना है कि शुरु से ही धार्मिक परंपराओं में उसकी रुचि रही है और मानवता के कामों के प्रति उसका खास लगाव रहा है।

सैयद बुखारी के सबसे छोटे नवाजे 19 साल के शाबान फिलहाल नोएडा के एमिटी कॉलेज से सोशल वर्क में ग्रेजूएशन कर रहे हैं। बचपन से ही उन्हें धार्मिक कामों में रूचि रही है।

सामाजिक गतिविधियों में भाग लेना और लोगों की सेवा करना उनका शौक है और जामा मस्जिद को नायब शाही इमाम बनकर वह अपने इसी शगल को आगे बढ़ाना चाहते हैं।

बता दें कि शनिवार को शाम पांच बजे दुनियाभर से आए लगभग 100 धार्मिक गुरुओं की उपस्थिती में शाबान को जामा मस्जिद के नायब शाही इमाम बनाने की परंपरा को शुरु किया जाएगा जो लगभग तीन घंटे चलेगी।

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