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विदेशी युवतियों के साथ शारीरिक शोषण, खौफ में गवाही देने नहीं आई भारत

Tue, 12 Apr 2016 06:56 PM IST
विजय सिंघल/अमर उजाला, नई दिल्ली
विजय सिंघल/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Tue, 12 Apr 2016 06:56 PM IST
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Sexual exploitation of foreign women
रेप - फोटो : DEMO Pics

विदेशियों को भारत में पर्यटक के रूप में आमंत्रित करने के लिए टीवी चैनलों पर ऐसे विज्ञापन दिखाए जाते हैं, लेकिन उस पर अमल नहीं होता। बतौर पर्यटक भारत घूमने आई दो डच युवतियों को धोखाधड़ी, जबरन वसूली, गलत तरीके से बंधक और रेप जैसे हादसे से गुजरना पड़ा।

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हालत यह हो गई कि वे अदालत में बयान देने तक के लिए भारत वापस नहीं आईं और अदालत ने आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। दोनों युवतियों ने अपनी शिकायत में भी कहा कि भारत में पर्यटक के रूप में यात्रा बुरे सपने के समान थी।
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डच नागरिक ईवा एलिजाबेथ अपनी दोस्त लिब्बी डी हास के साथ वर्ष 2010 में भारत घूमने के आई थीं। ईवा की शिकायत के अनुसार 6 जनवरी 2010 को वे कनाट प्लेस में सिम कार्ड लेने के लिए गईं।

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आरोपियों ने जबरन उनके साथ शारीरिक संबंध बनाए

Sexual exploitation of foreign women
रेप - फोटो : DEMO Pics

वहां उनकी मुलाकात यासिर अल्ताफ और ओमर बख्तू से हुई। दोनों ने स्वयं को सरकारी पर्यटन एजेंसी का गाइड बताया और सिम दिलवाने में सहायता की। इसके बाद उन्होंने कहा कि कश्मीर बहुत अच्छी जगह है और उनको वहां घूमने के लिए जाना चाहिए।

दोनों युवतियां उन दोनों व्यक्तियों के साथ कश्मीर चली गईं। आरोपियों ने उनसे 20-20 हजार रुपये लिए और दो दिन गुलमर्ग में बिताए। वहां जाकर उन्हें महसूस हुआ कि उनसे धोखाधड़ी हुई है।

इसके बाद आरोपी उन्हें डल झील में एक शिकारे में ले गए और उनका पासपोर्ट ले लिया कि शिकारे में सुरक्षित नहीं है। इसके बाद आरोपियों ने धमकाना शुरू कर दिया और जबरन शारीरिक संबंध बनाए।

खजुराहो गईं तो आरोपी वहां भी पहुंच गए

Sexual exploitation of foreign women

आरोपियों ने उन्हें धमकाया कि यदि उनका कहना नहीं माना और बाहर गई, तो मुसीबत में पड़ जाएंगी। क्योंकि बाहर उग्रवादी लोगों को मार रहे हैं। ऐसे में उनके सामने झुकने के अलावा कोई विकल्प नहीं था। इसके बाद वे 25 जनवरी को वापस दिल्ली आ गए और करोल बाग में एक होटल में ठहरे।

वहां भी दोनों आरोपियों ने धमकी देकर उनके साथ रेप किया। किसी तरह पासपोर्ट लेकर युवतियां आगरा गईं। आरोपियों ने उनसे 60 हजार रुपये हड़प लिए। इसके बाद वे खजुराहो गईं तो आरोपी वहां भी पहुंच गए।

ईवा ने एक जून को दी शिकायत में कहा कि उनके लिए यह टूर एक बुरे सपने के समान रहा। पुलिस ने शिकायत पर यासिर को गिरफ्तार कर लिया, जबकि दूसरा आरोपी नहीं पकड़ा गया। ईवा का मेडिकल व मजिस्ट्रेट के समक्ष बयान दर्ज हुआ। इसके बाद शिकायतकर्ता अपने देश चली गई।

उसने कहा कि वह भारत नहीं आना चाहती

Sexual exploitation of foreign women
रेप - फोटो : DEMO Pics

वर्ष 2010 में हुई घटना के मामले में चार वर्ष बाद 23 अप्रैल 2014 को अभियोग तय हुए और अभियोजन पक्ष के 15 गवाहों के बयान दर्ज किए गए। अदालत ने ईवा के नीदरलैंड के पते पर समन भेजकर गवाही के लिए बुलाया, लेकिन उसने आने से इनकार कर दिया।

उसने कहा कि वह भारत नहीं आना चाहती। आखिर ट्रायल कोर्ट ने जिरह न होने के आधार पर मामले को बंद कर दिया। पुलिस ने मामले को हाईकोर्ट में चुनौती दी। सरकारी वकील ने बताया कि दिसंबर 2015 को ईवा को ई-मेल किया गया, लेकिन उसने जवाब नहीं दिया।

अदालत के निर्देश पर विदेश मंत्रालय के जरिए उसे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अपना पक्ष रखने का विकल्प दिया गया, लेकिन उसने कोई जवाब नहीं दिया। हाईकोर्ट ने कहा कि शिकायतकर्ता को दो तरह के मौके दिए गए, लेकिन उसका पक्ष न मिलने के कारण ट्रायल कोर्ट के फैसले में हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता। अदालत ने पुलिस की याचिका खारिज कर दी।

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