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मास्टर सीवरेज के डिस्पोजल के लिए लगेगा सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट

Sat, 07 May 2016 12:11 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, गुड़गांव
ब्यूरो/अमर उजाला, गुड़गांव Updated Sat, 07 May 2016 12:11 PM IST
सार

  • सीवरेज लाइन बिछाने के लिए सेक्टर-77 से सेक्टर-80 तक किया जा रहा है भूमि अधिग्रहण
  • सेक्टर-107 में हुडा विभाग द्वारा बनाया जाएगा 175 एमएलडी क्षमता का एसटीपी 
  • सेक्टर-107 में हुडा विभाग द्वारा बनाया जाएगा 175 एमएलडी क्षमता का एसटीपी
  • अब तक लगभग 41.56 किलोमीटर पाइप लाइन बिछाने का कार्य पूरा
  • सीवरेज का गंदा पानी होगा शोधित

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sewage treatment plant for disposal of master sewer
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विस्तार

गुडग़ांव में मास्टर सीवरेज योजना के तहत हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (हुडा) विभाग द्वारा सेक्टर-77 से लेकर सेक्टर-115 तक लगभग 381.48 करोड़ रुपये की लागत से मास्टर सीवरेज लाइन बिछाने की योजना बनाई गई है, जिसके प्रथम चरण का काम लगभग अंतिम चरण में है।

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उपायुक्त टीएल सत्यप्रकाश ने बताया कि सेक्टर-77 से सेक्टर-155 तक लगभग 154.20 किलोमीटर लंबी पाइप लाइन बिछाई जाएगी। इस मास्टर सीवरेज के डिस्पोजल के लिए सेक्टर-107 में हुडा विभाग द्वारा सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट भी लगाया जाएगा।
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यह सीवरेज प्लांट लगभग 175 एमएलडी क्षमता का होगा। उन्होंने बताया कि सेक्टर-77 से लेकर सेक्टर-80 तक सीवरेज लाइन बिछाने के लिए हुडा विभाग द्वारा भूमि अधिग्रहण का कार्य किया जा रहा है। इस परियोजना के तहत अब तक लगभग 41.56 किलोमीटर पाइप लाइन बिछाने का कार्य पूरा किया जा चुका है, जिस पर लगभग 70 करोड़ 52 लाख रुपये की राशि खर्च की जा चुकी है।
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सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट के बारे में हुडा के डिवीजन नंबर-2 के कार्यकारी अभियंता जेके सौरोत ने बताया कि घरों व उद्योगों से निकलने वाले गंदे पानी व सीवरेज के पानी को सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट के माध्यम से शोधित कर रिसाइकिलिंग की जाएगी। प्लांट का शोधित पानी कृषि कार्यों, भवन निर्माण, औद्योगिक गतिविधियों, बागवानी आदि के लिए प्रयोग में लाया जा सकेगा। ऐसा करने से भूमिगत जलस्तर को और नीचे जाने से रोका जा सकता है।


डार्क जोन में स्थित है गुडग़ांव
सत्यप्रकाश ने कहा कि जिला गुडग़ांव का भूमिगत जलस्तर के हिसाब से डार्क जोन में स्थित है और भावी पीढिय़ों के लिए पानी का संरक्षण करने के लिए इस प्रकार के उपाय किए जाने जरूरी हैं। पीने, नहाने और कपड़े धोने के अलावा, अन्य कार्यों में रिसाइकिलिंग किए हुए जल का प्रयोग किया जा सकता है। पीने योग्य पानी का सदुपयोग करें और इसे व्यर्थ न बहने दें। कहीं भी पानी व्यर्थ बहता हुआ नजर आए तो उसे अपनी नैतिक जिम्मेदारी समझते हुए बंद करें।

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