फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   Several questions rises after Delhi fire 

वैध-अवैध के चक्कर में फंसी दिल्ली बारूद के ढेर पर, कौन देगा इन सवालों के जवाब

Mon, 09 Dec 2019 12:23 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Mon, 09 Dec 2019 12:23 AM IST
विज्ञापन
Several questions rises after Delhi fire 
demo pic - फोटो : PTI

वैध और अवैध के बीच फंसी दिल्ली का बड़ा इलाका बारूद के ढेर पर बैठा है। संकरी गलियों के बीच चल रही फैक्टरी हादसे को दावत दे रही हैं। हर हादसे के बाद चंद दिनों के लिए सरकारी एजेंसियां सक्रिय होती हैं। आनन-फानन में कुछ कार्रवाई भी होती है, लेकिन इसके बाद सब कुछ पुराने ढर्रे पर आ जाता है। 

विज्ञापन


मसलन, पिछले महीनों में करोल बाग के एक होटल व जनकपुरी के एक कोचिंग संस्थान में आग लगने के बाद फायर विभाग, स्थानीय निकाय, बिजली विभाग समेत दूसरी संबंधित सरकारी एजेंसियों  ने कुछ दिन तक अभियान चलाया। सत्ता पक्ष व विपक्ष कुछ दिनों तक एक-दूसरे पर ठीकरा भी फोड़ते दिखे, लेकिन बाद में सब ठंडे पड़ गए। न्यू अनाज मंडी के बाद भी यही सब दोहराया जाना तय है, लेकिन 43 मौत से उपजे सीधे सवालों का जवाब कौन देगा?
विज्ञापन


इन सवालों के जवाब कौन देगा
 
-रिहायशी इलाके में कैसे चल रही हैं अवैध फैक्टरी?
-नगर निगम में अवैध रूप से चल रही फैक्टरियों पर क्यों नहीं की कार्रवाई?
-पुलिस के बीट ऑफिसर ने क्यों नहीं किया किराएदारों का सत्यापन?
-फैक्टरी को कैसे मिल गया बिजली कनेक्शन?
-अभियान चलाकर कोचिंग संस्थानों को बंद करने वाले फायर विभाग में क्यों नहीं की इस इलाके में भी फायर सेफ्टी जांच?
-सांसद, स्थानीय विधायक और पार्षद की निगाह में कैसे नहीं आया इलाका?
-आरडब्ल्यूए व एमडब्ल्यूए ने क्यों नहीं किया एतराज और सरकारी एजेसियों से शिकायत?
-दिल्ली की फैक्टरियों को क्यों नहीं किया गया बवाना शिफ्ट?
-फैक्टरी मालिक ने मजदूरों का बीमा कराया था या नहीं?
-किसी फैक्टरी में कार्यस्थल पर मजदूरों को सोने की इजाजत नहीं है। कैसे इतने बड़े पैमाने पर मजदूर सो रहे थे?
-फैक्टरी एक्ट का उल्लंघन कैसे हुआ? 600 वर्ग फुट में करीब 350 मजूदर कैसे काम कर रहे थे? श्रम विभाग के अधिकारियों की नजर क्यों नहीं गई, जिनके पास इंडस्ट्रियल सेफ्टी का जिम्मा है?
विज्ञापन
विज्ञापन

-स्कूल बैग व प्लास्टिक का सामान बनाने का रॉ-मैटेरियल ज्वलनशील होता है। एक्सप्लोसिव विभाग की नजर इस पर क्यों नहीं गई?
-मकान मालिक ने कैसे दिया 100-100 किराएदारों को फैक्टरी चलाने की इजाजत?

 एमसीडी के फैक्टरी लाईसेंसिग ऑफिसर की प्राथमिक जिम्मेदारी
एमसीडी का फैक्टरी लाईसेंसिंग इंस्पेक्टर वह पहली कड़ी है, जिसको अपने इलाके में वैध-अवैध फैक्टरी की पहचान करनी होती है। इसकी नियुक्ति सिर्फ इसी काम के लिए होती है। आम लोगों की गाढ़ी कमाई से वसूले गए कर से इसका वेतन भी इसीलिए मिलता है, लेकिन अनाज मंडी हादसे से साफ है कि इंस्पेक्टर अपनी इकलौती जिम्मेदारी भी नहीं निभा सका। इंस्पेक्टर एमसीडी के विभागीय उपायुक्त के अधीन काम करता है। उपायुक्त की निगाह भी इंस्पेक्टर के काम पर रहती है।


सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन
उत्तरी निगम में नेता सदन सुरजीत सिंह पंवार (विपक्ष) का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट ने रिहायशी इलाकों से उद्योगों को बंद करने व प्रदूषण को लेकर सीलिंग के आदेश जारी किए थे, इसका सर्वे हो चुका है। बावजूद इसके, उत्तरी निगम ने सीलिंग नहीं की गई। इससे साफ है कि निगम प्रशासन का रवैया लापरवाही भरा है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed