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दिल्ली हिंसाः सात शवों की शिनाख्त अब भी नहीं, हैरत में फोरेंसिक विशेषज्ञ
Tue, 03 Mar 2020 06:44 AM IST
Vikas Kumar
परीक्षित निर्भय, अमर उजाला, नई दिल्ली
परीक्षित निर्भय, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Vikas Kumar
Updated Tue, 03 Mar 2020 06:44 AM IST
सार
- थैले में भरकर पुलिस मौसीन का शव लेकर पहुंची जीटीबी, डॉक्टरों के उड़े होश
- शवों की स्थिति अब सडने जैसी, तीन दिन से ज्यादा नहीं रख सकेंगे मोर्चरी में
- डीएनए जांच के लिए गर्दन और पैर का सैंपल कर लिया सुरक्षित, अब तक नहीं आया कोई परिजन
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अपनों की तलाश में अस्पताल के चक्कर लगाते लोग
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
पूर्वी दिल्ली के जीटीबी अस्पताल की मोर्चरी में दिल दहला देने वाले कई शव परिजनों के इंतजार में हैं। एक पैर, एक गर्दन और थैले में भरी हड्डियां मोर्चरी में रखी हैं। डॉक्टरों के अनुसार, थैले में जिस शख्स की हड्डियां हैं, उसकी पहचान मौसीन के रूप में हुई है, जबकि पैर और गर्दन किसकी है, इसके बारे में उन्हें अब तक कोई जानकारी नहीं मिली है। हालांकि अस्पताल के फोरेंसिक विशेषज्ञों ने दोनों का सैंपल सुरक्षित रख लिया है, ताकि डीएनए जांच के जरिए ये पता लगाया जा सके कि पैर और गर्दन किसकी हैं।
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यही नहीं इन दोनों अंगों की स्थिति अब बिगड़ने लगी है। अगले तीन दिन तक ही इन्हें मोर्चरी में रखा जा सकता है। अगर इस बीच भी कोई परिजन इनकी शिनाख्त के लिए नहीं पहुंचे, तो डॉक्टरों के पास डिस्पोज करने के अलावा अन्य कोई विकल्प नहीं होगा। जीटीबी में तीन और आरएमएल में चार मिलाकर अब तक सात शवों की शिनाख्त नहीं हो पाई है।
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एक वरिष्ठ डॉक्टर ने बताया कि मोर्चरी में एक पैर और एक गर्दन के अलावा दिल्ली पुलिस एक थैले में हड्डियां लाई थी। हड्डियां देखकर हर कोई अचंभित रह गया। पुलिस की मदद से शव की शिनाख्त तो कर दी गई है, लेकिन पोस्टमार्टम मंगलवार को हो सकेगा। अब फोरेंसिक विशेषज्ञों के आगे सबसे बड़ी चुनौती है कि आखिर ऐसा कौन सा हथियार या रसायन इस्तेमाल किया गया था, जिसकी वजह से मौसीन की ये दशा हो गई।
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उधर, डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल (आरएमएल) की मोर्चरी में भी पांच शवों का पोस्टमार्टम होना बाकी है। पांच में से एक शव की शिनाख्त सोमवार को हो चुकी है, जिसका नाम आफताब है। बाकी चार शवों की पहचान अभी भी नहीं हुई है। पहचान के बाद ही पोस्टमार्टम हो सकेगा। आरएमएल के एक वरिष्ठ फोरेंसिक डॉक्टर ने बताया कि जीटीबी अस्पताल में ज्यादा शव होने के कारण वहां के अस्पताल प्रबंधन से अपील की गई थी, जिसके बाद बीते दो दिन में बरामद शवों को पुलिस आरएमएल लेकर आई। चूंकि अभी तक शवों की शिनाख्त नहीं हुई और वीडियोग्राफी भी होनी है, इसलिए मंगलवार को जिनकी भी शिनाख्त हो जाएगी, उनका पोस्टमार्टम किया जाएगा।
शाहबाज की हो सकती है गर्दन
जीटीबी अस्पताल के सूत्रों का कहना है कि मोर्चरी में जो दो अंग हैं, उनमें से एक गर्दन शाहबाज की हो सकती है। हालांकि इसकी पुष्टि डीएनए जांच पूरी होने के बाद ही संभव है। शाहबाज हिंसा के दिन से लापता है। मंगलवार को उसके परिजन जीटीबी आकर अपना सैंपल देंगे, जिनके आधार पर डीएनए जांच की जा सकेगी।
फोरेंसिक साइंस के इतिहास में दर्ज हुई दिल्ली हिंसा
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के फोरेंसिक विभाग के वरिष्ठ डॉक्टर का कहना है कि दिल्ली हिंसा को लेकर शुरुआत से ही पूरा विभाग इसकी निगरानी रख रहा है। हालांकि एम्स में कोई भी शव पोस्टमार्टम के लिए नहीं आया, लेकिन विभाग पूरी तरह तैयार है। फोरेंसिक साइंस के इतिहास में दिल्ली की हिंसा एक गंभीर अपराध के रूप में दर्ज हुई है। इस हिंसा में जिस तरह की मौतें देखने को मिली हैं उनसे अपराध की गंभीरता और उपद्रवियों की मानसिक स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है।
38 घायल अभी भी जीटीबी में
चिकित्सा निदेशक डॉ. सुनील कुमार ने बताया कि जीटीबी अस्पताल में सोमवार को दो मरीजों को छुट्टी दे दी गई है। अभी भी 38 घायल अस्पताल में भर्ती हैं। विभिन्न विभागों में भर्ती इन मरीजों को उपचार दिया जा रहा है। वरिष्ठ डॉक्टरों की टीमें लगातार इनकी निगरानी में जुटी हुई हैं।
एक नजर
. मौतें : 47 (जीटीबी में 38, लोकनायक में 3, जगप्रवेश में 1, पांच आरएमएल)
. घायल : 680 (जीटीबी में 268, लोकनायक में 52 और अल हिंद अस्पताल 360)
. पोस्टमार्टम शेष : जीटीबी में 03, आरएमएल में 05