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आपको रुला देंगी 5 मासूमों की ये कहानियां

Sat, 08 Nov 2014 03:34 PM IST
Updated Sat, 08 Nov 2014 03:34 PM IST
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Seven child laborers redeem in Operation Smile ghaziabad.

तेरे सहारे की जरूरत थी, अब तो निखर जाएंगे, आंधियों की क्या मजाल, आग के दरिया से भी तर जाएंगे...। वसुंधरा के लाल बहादुर शास्त्री शेल्टर होम में रहने वाले सात बच्चों के मन में अब कुछ ऐसे ही ख्याल हैं।

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पुलिस का ऑपरेशन स्माइल उन्हें बाल मजदूरी की काल कोठरी से तो निकाल लाया। मगर अपनों की दुत्कार के चलते चेहरे पर आई निराशा को स्माइल में बदलने का काम शेल्टर होम संचालकों ने शुरू कर दिया है।
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कुछ समय पहले तक नशे के आदी इन बच्चों में से किसी के मन में हनी सिंह की तरह रैप करने की चाह है, तो कोई पढ़ लिखकर पुलिस अधिकारी बनना चाहता है। पढ़िए उन मासूमों की जिंदगी की अनकही दास्तान।

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सौतेली मां ने कहा, पिता नहीं तो बेटे का क्या करूंगी

Seven child laborers redeem in Operation Smile ghaziabad.

12 वर्षीय सूजल नेपाल का रहने वाला है। पिता घर से दूर नौकरी करते थे। सगी मां की कई साल पहले मौत हो गई। सूजल का कहना है कि सौतेली मां अक्सर उसे मारती थी। इसके बाद दोस्तों के साथ भागकर दिल्ली आ गया।

अब शेल्टर होम संचालक घर ले गए तो मां कहती हैं कि जब पिता ही घर पर नहीं तो उसके बेटे को क्यों रखूं। सूजल शेल्टर होम में ही रहकर पढ़ना चाहता है और पुलिस अधिकारी बनना चाहता है।

दोस्तों ने कूड़ा बीनना और नशा करना सिखाया

Seven child laborers redeem in Operation Smile ghaziabad.

वसुंधरा के शेल्टर होम में रह रहा 11 साल का गुड्डू करीब दो साल पहले दोस्तों के साथ खेल रहा था। कुछ दोस्त उसे हिंडन किनारे कूड़ा बीनने ले गए।

माता-पिता ने मना किया, मगर उन्हीं दोस्तों के साथ ही पुरानी दिल्ली जाकर भीख मांगने लगा। नशा भी करने लगा।

पिछले माह पुलिस ढूंढकर परिजनों के पास ले गई, तो उन्होंने दो टूक जवाब दिया कि उनके पास इसे खिलाने और नशे के लिए रुपये नहीं हैं। तीन भाई और दो बहनें और हैं। अब यह भीख मांगता है, तो घर में रहकर क्या करेगा। नशा छूटा तो गुड्डू ने पढ़ना शुरू किया है।

दोस्तों ने लगाई नशे की लत, अब घर-बार छूटा

Seven child laborers redeem in Operation Smile ghaziabad.

लोनी के रहने वाले कबीर और अमन का घर कुछ ही दूरी पर था। दोनों साथ ही दोस्तों संग खेलते थे।

एक दिन गांजा पीकर घर पहुंचे तो माता-पिता ने घर से निकाल दिया। इसके बाद पुरानी दिल्ली में फुटपाथ पर सोते। सुबह भीख मांगते और नशा करते।

पुलिस शेल्टर होम लेकर आई, तो कबीर अब हनी सिंह की तरह रैपर बनना चाहता है। यो-यो हनी सिंह कहकर रैप करता है। अमन भी पढ़ाई में मन लगाने लगा है।

नशे की लत ने घर छुड़वाया

Seven child laborers redeem in Operation Smile ghaziabad.

चंदौसी का रहने वाला असलम (14) और बाबूगढ़ का रहने वाला आसिफ(13) दोस्तों की संगत में रहकर नशा करना तो सीख गए। मगर जब परिजनों ने मना किया तो भागकर दिल्ली पहुंच गए।

पुलिस और शेल्टर होम संचालकों के जरिए घर वापस भी गए। मगर परिजनों ने नशे की गंदी आदत की वजह से रखने से मना कर दिया है। करीब एक माह में नशे की आदत छूटी है, तो दोनों पढ़ना चाहते हैं। शेल्टर होम में ही अन्य दोस्तों के साथ मिलकर पढ़ते हैं।

फिल्म देखने से रोका तो घर से भागा, ‌और अब

Seven child laborers redeem in Operation Smile ghaziabad.

13 साल का रजनीश पटना का रहने वाला है। भोजपुरी गायक मनोज तिवारी की फिल्म देखने से परिजनों ने रोका तो घर से भाग खड़ा हुआ। कुछ लोगों के साथ दिल्ली आ गया।

इसके बाद एक दो बार नशा किया। यहां-वहां भीख मांगकर रहने लगा। अब घर वालों की याद आई, तो पुलिस के साथ खुद गाजियाबाद आ गया।

अब घर पहुंचा तो नशे की गंदी आदत की वजह से घरवाले नहीं रखना चाहते। शेल्टर होम में रहकर ही भोजपुरी गानों का रियाज करता है। भोजपुरी गायक बनना चाहता है।

केमिस्ट की दुकान पर मिलती हैं नशे की गोलियां

Seven child laborers redeem in Operation Smile ghaziabad.

शेल्टर में सभी बच्चों की मां रेनुका ने बताया कि बच्चों का कहना है कि पुरानी दिल्ली के कुछ केमिस्ट की दुकानों पर 10 रुपये की 20 नशे की गोलियां मिलती हैं, जो वे लेते हैं।

इतना ही नहीं सभी के गांव में कुछ ऐसे लोग हैं, जो उन्हें पुरानी दिल्ली लेकर आते हैं। ऐसे में कोई गिरोह भी हो सकता है, जो बच्चों को नशे का आदि बनाकर उन्हें पुरानी दिल्ली लाकर भीख मंगवाता है।

दिल्ली पुलिस से की जाएगी बात
ऑपरेशन स्माइल के कोऑर्डिनेटर सीओ रणविजय सिंह ने बताया कि अगर नशे की गोलियां केमिस्ट की दुकानों पर बेची जा रही हैं, तो दिल्ली पुलिस से इस बारे में बात की जाएगी। नशे की गोलियां बेचने वाले केमिस्ट पर भी कार्रवाई की जाएगी।

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