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दृष्टिहीन यात्री भी जान सकेंगे सीट नंबर, ब्रेल लिपि में अंकित होंगे बर्थ नंबर
ऐहतेशाम उद्दीन अहमद/अमर उजाला, फरीदाबाद
Updated Sat, 19 Nov 2016 12:10 AM IST
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- फोटो : amar ujala
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भारतीय रेल में सफर करने वाले दृष्टिहीन यात्रियों को अब अपनी सीट ढूंढने के लिए दूसरों की मदद नहीं लेनी होगी। आरक्षित कोच में रेलवे अब अंक और शब्दों के अलावा ब्रेल लिपि में भी स्लीपर और सीट नंबर अंकित करेगा।
द्वितीय क्लास स्लीपर कोच को एसी क्लास के कोच की सुविधाओं से लैस किया जा रहा है। पुराने हो चुके स्लीपर को रेलवे यह नया रूप दे रहा है और वह भी नए कोच की आधी कीमत में।
सूरजकुंड में लगे रेल विकास शिविर में इस नए कोच का डिस्प्ले किया गया है। भोपाल की निशातपुर कोच पुनर्निर्माण कार्यशाला में तैयार किए गए इस कोच में सीटों के नंबर ब्रेल लिपि में लगाए गए हैं। एसी कोच की तरह हर बर्थ पर रीडिंग लाइट लगाई गई है।
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कोच निर्माण कार्यशाला के सीनियर सेक्शन इंजीनियर अजय जोशी ने बताया कि रीडिंग लाइट में एलईडी बल्ब का इस्तेमाल किया गया है, पूरे कोच की सभी रीडिंग लाइट 10 वाट से भी कम बिजली इस्तेमाल करती हैं। कोच के हर एक कंपार्टमेंट में इंटिग्रेटेड स्पीकर लगे होंगे।
इन स्पीकर पर यात्रियों को आने वाले स्टेशन की जानकारी दी जाएगी। हर बर्थ पर पानी की बोतल के लिए इंग्रेव (दीवार में खांचा) बनाया गया है ताकि यात्री को बोतल रखने में दिक्कत न आए। यात्रियों को बर्थ खोजने में परेशानी न हो इसके लिए छत में इल्युमिनेटेड (चमकदार) संकेतक लगाए गए हैं।
ऊपर की बर्थ पर चढ़ने वाले यात्रियों की सहूलियत के लिए डिजायनर सीढ़ियां बनाई गई हैं जो लोहे के रॉड की अपेक्षा ज्यादा सुरक्षित, आरामदेह और मजबूत हैं। उन्होंने बताया कि रेलवे के पुराने स्लीपर कोच को मॉडिफाई कर यह लुक दिया गया है।
आधे खर्च में कोच को दे रहे नया रूप
सीएसई अजय जोशी ने बताया कि एक नया कोच तैयार करने में करीब 35 लाख रुपये का खर्च आता है जबकि पुराने कोच को मॉडिफाई करने का खर्च महज 18 लाख रुपये है। उन्होंने बताया कि निशातपुर कोच पुनर्निर्माण कार्यशाला में तैयार यह कोच फिलहाल महामना एक्सप्रेस (बनारस-दिल्ली-बनारस) में चल रहे हैं। जल्द ही देश की सभी एक्सप्रेस ट्रेनों में इनका प्रयोग शुरू होगा।
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द्वितीय क्लास स्लीपर कोच को एसी क्लास के कोच की सुविधाओं से लैस किया जा रहा है। पुराने हो चुके स्लीपर को रेलवे यह नया रूप दे रहा है और वह भी नए कोच की आधी कीमत में।
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सूरजकुंड में लगे रेल विकास शिविर में इस नए कोच का डिस्प्ले किया गया है। भोपाल की निशातपुर कोच पुनर्निर्माण कार्यशाला में तैयार किए गए इस कोच में सीटों के नंबर ब्रेल लिपि में लगाए गए हैं। एसी कोच की तरह हर बर्थ पर रीडिंग लाइट लगाई गई है।
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कोच निर्माण कार्यशाला के सीनियर सेक्शन इंजीनियर अजय जोशी ने बताया कि रीडिंग लाइट में एलईडी बल्ब का इस्तेमाल किया गया है, पूरे कोच की सभी रीडिंग लाइट 10 वाट से भी कम बिजली इस्तेमाल करती हैं। कोच के हर एक कंपार्टमेंट में इंटिग्रेटेड स्पीकर लगे होंगे।
इन स्पीकर पर यात्रियों को आने वाले स्टेशन की जानकारी दी जाएगी। हर बर्थ पर पानी की बोतल के लिए इंग्रेव (दीवार में खांचा) बनाया गया है ताकि यात्री को बोतल रखने में दिक्कत न आए। यात्रियों को बर्थ खोजने में परेशानी न हो इसके लिए छत में इल्युमिनेटेड (चमकदार) संकेतक लगाए गए हैं।
ऊपर की बर्थ पर चढ़ने वाले यात्रियों की सहूलियत के लिए डिजायनर सीढ़ियां बनाई गई हैं जो लोहे के रॉड की अपेक्षा ज्यादा सुरक्षित, आरामदेह और मजबूत हैं। उन्होंने बताया कि रेलवे के पुराने स्लीपर कोच को मॉडिफाई कर यह लुक दिया गया है।
आधे खर्च में कोच को दे रहे नया रूप
सीएसई अजय जोशी ने बताया कि एक नया कोच तैयार करने में करीब 35 लाख रुपये का खर्च आता है जबकि पुराने कोच को मॉडिफाई करने का खर्च महज 18 लाख रुपये है। उन्होंने बताया कि निशातपुर कोच पुनर्निर्माण कार्यशाला में तैयार यह कोच फिलहाल महामना एक्सप्रेस (बनारस-दिल्ली-बनारस) में चल रहे हैं। जल्द ही देश की सभी एक्सप्रेस ट्रेनों में इनका प्रयोग शुरू होगा।