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सीलमपुर हिंसाः कोर्ट ने नाबालिग आरोपी के बोन टेस्ट की दी अनुमति, 30 तक मांगी रिपोर्ट
Fri, 27 Dec 2019 06:49 PM IST
Vikas Kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Vikas Kumar
Updated Fri, 27 Dec 2019 06:49 PM IST
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seelampur protest
- फोटो : पीटीआई
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दिल्ली के सीमापुरी इलाके में संशोधित नागरिकता कानून के खिलाफ हुए हिंसक प्रदर्शन में गिरफ्तार एक आरोपी ने कोर्ट में खुद को नाबालिग बताया है। इस पर दिल्ली पुलिस ने आरोपी की सही उम्र का पता लगाने के लिए कोर्ट से उनकी हड्डी परीक्षण की अनुमति मांगी थी, जिसे कोर्ट ने मंजूर कर लिया।
मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट गीता ने पुलिस को अनुमति देते हुए कहा कि आरोपी के पास अपनी उम्र साबित करने के लिए कोई वैध आयु प्रमाण पत्र नहीं है, इसलिए इसका हड्डी टेस्ट करवाया जाना चाहिए। साथ ही कोर्ट ने परीक्षण रिपोर्ट को 30 दिसंबर तक पेश करने को कहा है।
वहीं, दूसरी तरह आरोपी के वकीलों का कहना है कि हमने अपने मुवक्किल का जन्म प्रमाण पत्र कोर्ट में पेश किया था लेकिन उसे जज ने यह कहते हुए खारिज कर दिया कि यह दस्तावेज एक मदरसे द्वारा जारी किया गया है, जहां इसने पढ़ाई की है।
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पुलिस ने कहा कि आरोपी के पास इसके अलावा कोई और प्रमाण उपलब्ध नहीं है इसलिए इसका हड्डी परीक्षण करवाना होगा। इस पर आरोपी के वकील ने विरोध करते हुए कहा कि केंद्र की अधिसूचना के अनुसार, मदरसे से जारी आयु प्रमाण पत्र किसी की उम्र साबित करने के लिए वैध दस्तावेज है।
बता दें कि पुलिस ने सीलमपुर इलाके से नागरिकता संशोधित अधिनियम के खिलाफ हिंसक विरोध प्रदर्शन करने के आरोप में 14 लोगों को गिरफ्तार किया है। इन सभी को कोर्ट ने 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया।
वहीं, सीलमपुर हिंसा में आरोपी बनाए गए पूर्व कांग्रेस विधायक मतीन अहमद ने पुलिस पर आरोप लगाते हुए कहा कि कांग्रेस को नुकसान पहुंचाने के लिए गृह मंत्रालय के कहने पर मेरे खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।
मतीन अहमद और पार्षद अब्दुल रहमान के खिलाफ दर्ज एफआईआर में भीड़ को भड़काने का आरोप है। एफआईआर में जाफराबाद के एसरएचओ के हवाले से आरोप है कि हिंसा पर उतारू भीड़ को शांत कराने की सीलमपुर के एसएचओ और अन्य अधिकारी कोशिश कर रहे थे, पार्षद ने अब्दुल रहमान ने भीड़ को भड़काया।
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मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट गीता ने पुलिस को अनुमति देते हुए कहा कि आरोपी के पास अपनी उम्र साबित करने के लिए कोई वैध आयु प्रमाण पत्र नहीं है, इसलिए इसका हड्डी टेस्ट करवाया जाना चाहिए। साथ ही कोर्ट ने परीक्षण रिपोर्ट को 30 दिसंबर तक पेश करने को कहा है।
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वहीं, दूसरी तरह आरोपी के वकीलों का कहना है कि हमने अपने मुवक्किल का जन्म प्रमाण पत्र कोर्ट में पेश किया था लेकिन उसे जज ने यह कहते हुए खारिज कर दिया कि यह दस्तावेज एक मदरसे द्वारा जारी किया गया है, जहां इसने पढ़ाई की है।
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पुलिस ने कहा कि आरोपी के पास इसके अलावा कोई और प्रमाण उपलब्ध नहीं है इसलिए इसका हड्डी परीक्षण करवाना होगा। इस पर आरोपी के वकील ने विरोध करते हुए कहा कि केंद्र की अधिसूचना के अनुसार, मदरसे से जारी आयु प्रमाण पत्र किसी की उम्र साबित करने के लिए वैध दस्तावेज है।
बता दें कि पुलिस ने सीलमपुर इलाके से नागरिकता संशोधित अधिनियम के खिलाफ हिंसक विरोध प्रदर्शन करने के आरोप में 14 लोगों को गिरफ्तार किया है। इन सभी को कोर्ट ने 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया।
वहीं, सीलमपुर हिंसा में आरोपी बनाए गए पूर्व कांग्रेस विधायक मतीन अहमद ने पुलिस पर आरोप लगाते हुए कहा कि कांग्रेस को नुकसान पहुंचाने के लिए गृह मंत्रालय के कहने पर मेरे खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।
मतीन अहमद और पार्षद अब्दुल रहमान के खिलाफ दर्ज एफआईआर में भीड़ को भड़काने का आरोप है। एफआईआर में जाफराबाद के एसरएचओ के हवाले से आरोप है कि हिंसा पर उतारू भीड़ को शांत कराने की सीलमपुर के एसएचओ और अन्य अधिकारी कोशिश कर रहे थे, पार्षद ने अब्दुल रहमान ने भीड़ को भड़काया।