'मंडे' और 'फ्राइडे' से तय होता है बच्चे का लिंग
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गुड़गांव में लिंग जांच के बारे में गुप्त सूचना देने वाले को अब 50 हजार रुपये दिए जाएंगे। उसकी जानकारी भी गुप्त रखी जाएगी। वहीं, गिरते लिंगानुपात के कारणों का पता लगाने के लिए पिछले 10 सालों के आंकड़ों का विश्लेषण किया जाएगा। यह फैसला स्टेट सुपरवाइजरी बोर्ड की बैठक में लिया गया।
प्रसव पूर्व गर्भाधान तथा प्रसव पूर्व निदान तकनीक (पीसी एंड पीएनडीटी) अधिनियम को और अधिक प्रभावी करने के लिए यह निर्णय लिया गया है। जबकि पहले गुप्त सूचना देने पर 20 हजार रुपये दिए जाते थे।
स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि गिरते लिंगानुपात के पीछे की वजह लिंग जांच कर गर्भपात कराना है। इसे देखते हुए पीएनडीटी एक्ट के तहत हर महीने अल्ट्रासाउंड केंद्रों का निरीक्षण किया जाता है।
लिंग बताने में अब कोड का इस्तेमाल
स्वास्थ्य विभाग ने सभी डिप्टी सीएमओ के नेतृत्व में टीम भी गठित की हैं। प्रत्येक टीम को महीने 10 अल्ट्रासाउंड केंद्रों का निरीक्षण करना होगा। सुपरवाइजरी बोर्ड की बैठक में उन जिलों पर खास नजर रखने के लिए कहा गया है, जिनकी सीमाएं पड़ोसी राज्यों से लगती हैं।
विभाग के मुताबिक, गुड़गांव, फरीदाबाद जैसे शहरों के अल्ट्रासाउंड केंद्रों पर निगरानी ज्यादा रखने की जरूरत है। सिविल सर्जनों को संबंधित राज्यों के स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ तालमेल कर आपस में जानकारी और सूचना तत्काल प्रदान करने को कहा गया है।
भले ही सरकार लोगों को प्रलोभन देकर गुप्त सूचना देने के लिए प्रोत्साहित कर रही हो, लेकिन हकीकत यह है कि स्वास्थ्य विभाग को कोई भी सूचना देने से परहेज करता है। सूत्रों की मानें तो अल्ट्रासाउंड केंद्र लिंग बताने में अब कोड का इस्तेमाल करने लगे हैं।
ये हैं अल्ट्रासाउंड के कोड वर्ड
- मंडे को आ जाना यानी गर्भ में लड़का है।
- फ्राइडे को आना यानी गर्भ में लड़की है।
- केंद्रों पर दो फोटो लगे होते हैं। एक सरस्वती जी की और दूसरी गणेश जी की।
- सरस्वती की तरफ इशारे का मतलब है लड़की।
- गणेश जी के तरफ इशारा यानी लड़का है।
सिविल सर्जन डॉ. पुष्पा बिश्नोई ने बताया कि बोर्ड ने फैसला ले लिया है। लेकिन लिखित आदेश अभी नहीं आए हैं। लोगों को सूचना देने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। रूटीन में भी विभाग अल्ट्रासाउंड केंद्रों की जांच करता है।