{"_id":"5da26f568ebc3e93a9533467","slug":"secound-day-of-delhi-green-show-at-indira-gandhi-national-center-for-the-arts","type":"story","status":"publish","title_hn":"40 वर्ष पुराना बोनसाई पौधा बना पसंद, कचरे से खाद बनाने की तकनीक ने गृहिणियों को किया आकर्षित","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
40 वर्ष पुराना बोनसाई पौधा बना पसंद, कचरे से खाद बनाने की तकनीक ने गृहिणियों को किया आकर्षित
Sun, 13 Oct 2019 05:57 AM IST
Mohit Mudgal
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Mohit Mudgal
Updated Sun, 13 Oct 2019 05:57 AM IST
विज्ञापन
40 वर्ष पुराना बोनसाई पौधा।
- फोटो : अमर उजाला
इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र में चल रहे दिल्ली ग्रीन शो के दूसरे दिन शनिवार को दर्शक विभिन्न प्रकार के बोनसाई पौधों और हाइब्रिड फल-फूलों के पौधों से रू-ब-रू हुए। साथ ही, घर के ग्रीन कचरे और खराब खाने से कंपोस्ट (खाद) बनाने की तकनीक के बारे में भी जाना।
पर्यावरण को प्रदूषणमुक्त और हराभरा बनाने में सहयोग देने के लिए आयोजित दिल्ली ग्रीन शो में कई शहरों की कंपनियां और संस्थाएं पौधों की विभिन्न किस्में लेकर पहुंची हैं। इनमें बोनसाई पौधे आकर्षण का केंद्र हैं। यहां सबसे सस्ता बोनसाई पौधा करीब 3 हजार रुपये और सबसे महंगा 7 लाख 20 हजार रुपये का है।
एक्सपो में सबसे पुराने और सबसे महंगे बोनसाई पौधे को लेकर पहुंची कंपनी डीएस ग्रुप के अधिकारी अमित पाराशर ने बताया कि एडिनियम प्रजाति का यह बोनसाई पौधा 35 से 40 साल पुराना है। दिखने में इसका आकार बरगद के वृक्ष जैसा है, लेकिन यह बरगद नहीं है। यह एक रेगिस्तानी पौधा है, जो बेहद कम पानी मिलने पर भी हरा रहता है।
विज्ञापन
ग्रीन एक्सपो में गुरुग्राम की माई ग्रीन बिन कंपनी किचन गार्डन की शौकीन गृहिणियों के लिए घर के ग्रीन कचरे और खराब भोजन से खाद बनाने की तकनीक लेकर पहुंची है। कंपनी के सह संस्थापक आदित्य चौधरी ने बताया कि दो ग्रीन बिन के जरिये घर में खाद बनाने की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है। इन ग्रीन बिन का आकार जरूरत के हिसाब से तैयार किया गया है।
इनकी क्षमता आधा किलो से लेकर 3 किलो तक है। इसमें खाना बनाने से पहले सब्जियों के छिलके और अन्य हरा कचरा, चाय पत्ती का कचरा डाला जा सकता है। घर में बचने वाला खाना भी खाद के लिए बिन में डाला जा सकता है। बिन में कचरा डालने से पहले कंपनी द्वारा निर्मित एक विशेष कंपोस्ट को लेयर में बिन में डाला जाएगा। फिर हर कचरे के लेयर के बाद कंपोस्ट की लेयर बनानी होगी।
करीब 30 दिन में बिन भर जाएगा। सिके बाद बिन को 20 दिन रखा जाएगा और खाद बनकर तैयार हो जाएगी। खास बात यह है कि बिन में बनने वाली खाद को कंपनी खरीदने का भी ऑफर दे रही है।
विज्ञापन
पर्यावरण को प्रदूषणमुक्त और हराभरा बनाने में सहयोग देने के लिए आयोजित दिल्ली ग्रीन शो में कई शहरों की कंपनियां और संस्थाएं पौधों की विभिन्न किस्में लेकर पहुंची हैं। इनमें बोनसाई पौधे आकर्षण का केंद्र हैं। यहां सबसे सस्ता बोनसाई पौधा करीब 3 हजार रुपये और सबसे महंगा 7 लाख 20 हजार रुपये का है।
विज्ञापन
एक्सपो में सबसे पुराने और सबसे महंगे बोनसाई पौधे को लेकर पहुंची कंपनी डीएस ग्रुप के अधिकारी अमित पाराशर ने बताया कि एडिनियम प्रजाति का यह बोनसाई पौधा 35 से 40 साल पुराना है। दिखने में इसका आकार बरगद के वृक्ष जैसा है, लेकिन यह बरगद नहीं है। यह एक रेगिस्तानी पौधा है, जो बेहद कम पानी मिलने पर भी हरा रहता है।
विज्ञापन
ग्रीन एक्सपो में गुरुग्राम की माई ग्रीन बिन कंपनी किचन गार्डन की शौकीन गृहिणियों के लिए घर के ग्रीन कचरे और खराब भोजन से खाद बनाने की तकनीक लेकर पहुंची है। कंपनी के सह संस्थापक आदित्य चौधरी ने बताया कि दो ग्रीन बिन के जरिये घर में खाद बनाने की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है। इन ग्रीन बिन का आकार जरूरत के हिसाब से तैयार किया गया है।
इनकी क्षमता आधा किलो से लेकर 3 किलो तक है। इसमें खाना बनाने से पहले सब्जियों के छिलके और अन्य हरा कचरा, चाय पत्ती का कचरा डाला जा सकता है। घर में बचने वाला खाना भी खाद के लिए बिन में डाला जा सकता है। बिन में कचरा डालने से पहले कंपनी द्वारा निर्मित एक विशेष कंपोस्ट को लेयर में बिन में डाला जाएगा। फिर हर कचरे के लेयर के बाद कंपोस्ट की लेयर बनानी होगी।
करीब 30 दिन में बिन भर जाएगा। सिके बाद बिन को 20 दिन रखा जाएगा और खाद बनकर तैयार हो जाएगी। खास बात यह है कि बिन में बनने वाली खाद को कंपनी खरीदने का भी ऑफर दे रही है।