बच सकती थी गोपीनाथ मुंडे की जानः हर्षवर्धन
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हर्षवर्धन का मानना है कि ग्रामीण विकास मंत्री गोपीनाथ मुंडे यदि सीट बेल्ट बांधे होते तो शायद उनकी जान बच जाती। इसी वजह से एम्स व आईएमए के चिकित्सकों ने कार की पिछली सीट पर बैठने वाले लोगों के लिए भी सीट बेल्ट अनिवार्य करने की सलाह दी।
गोपीनाथ मुंडे के इलाज करने वाले चिकित्सकों के दल में शामिल डॉ. सुबोध गुप्ता ने कहा कि कार की स्पीड काफी थी ऐसे में यदि अचानक से ब्रेक लगाया जाए तब भी इस तरह की दुर्घटना होने का खतरा रहता है।
पश्चिमी देशों की तरह भारत में भी कार की पिछली सीट पर बैठने वाले लोगों के लिए सीट बेल्ट अनिवार्य कर दिया जाना चाहिए।
इतने बेफिक्र क्यों हैं ये?
दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक औसतन 12 हजार लोगों का रोजाना किसी न ट्रैफिक नियम तोड़ने की वजह से चालान किया जाता है। वर्ष 2012 में करीब 35.58 लाख वाहन चालकों का चालान किया गया था। वहीं 2013 में यह बढ़कर 40.05 लाख पहुंच गया।
जानकारों की मानें तो यातायात नियम तोड़ने वालों की संख्या आंकड़ों से दस गुना ज्यादा है। लेकिन 10 फीसदी लोगों के खिलाफ ही पुलिस चालान की कार्रवाई कर पाती है। नब्बे फीसदी लोग यातायात पुलिस से बच निकलते हैं।
दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इस साल एक जनवरी से 15 मई तक करीब 15 लाख 90 हजार 645 वाहन चालकों के चालान किए गए। इनमें ट्रैफिक सिग्नल तोड़ने के लिए 3.30 लाख का चालान किया गया।
ये हैं बदनाम डेथ प्वाइंट:
- सीलमपुर टी-प्वाइंट
- ब्रिटानिया चौक
- हनुमान मंदिर
- शास्त्री पार्क चौक
- निगम बोध घाट
- शकरपुर चुंगी
- गोकुलपुरी चौक
- आश्रम चौक
- आईएसबीटी आनंद विहार
- अक्षरधाम मंदिर के पास (एनएच-24)