सीलिंग : मुद्दा सुलझाने आए नेता चाय-पकौड़े पर भिड़े और फिर देखने को मिला ये नजारा..
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सीलिंग को लेकर एक तरफ पूरी दिल्ली में घमासान सा मचा है तो वहीं, सोमवार को दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) की इसे लेकर हुई बैठक में अलग ही नजारा देखने को मिला।
यहां सीलिंग पर बहस करने आए नेताओं के बीच चाय और पकौड़ों को लेकर ही बहस होने लगी। आलम यह रहा कि देखते ही देखते नेताओं ने एक दूसरे पर आरोप लगाना भी शुरू कर दिया।
माहौल बिगड़ता देख अधिकारियों ने मामला शांत कराया। गौर करने वाली बात है कि इस बैठक में भी सभी जनप्रतिनिधि मौजूद नहीं थे।
आम आदमी पार्टी और बीजेपी के जनप्रतिनिधियों की ओर से मास्टर प्लान 2021 में संशोधन पर आपत्तियां और सुझाव भेजे गए थे। लेकिन जब डीडीए ने इस पर जनसुनवाई शुरू की तो पहले दिन तीन, दूसरे दिन एक और अब 10 से ज्यादा नेता बैठक से नदारद रहे।
जल्द एलजी लेंगे बोर्ड बैठक
बता दें कि सोमवार को डीडीए के बोर्ड ने सीलिंग और मास्टर प्लान संशोधन पर अंतिम बैठक बुलाई थी। सुबह करीब 11 बजे से शुरू हुई इस बैठक में कई जनप्रतिनिधि मौजूद नहीं थे।
जहां बीजेपी के नेता मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया की अनुपस्थिति पर सवाल खड़े करते रहे। वहीं, आम आदमी पार्टी के नेताओं ने बीजेपी सांसद मनोज तिवारी की गैरमौजूदगी पर सवाल उठाए।
हालांकि बैठक खत्म होने के बाद सांसद तिवारी पहुंचे थे। लेकिन सुनवाई में उन्हें शामिल नहीं किया।
डीडीए के एक अधिकारी ने आगे बताया कि मास्टर प्लान संशोधन पर आपत्तियां और सुझाव को लेकर सुनवाई का दौर खत्म हो चुका है। अब अगले दो से तीन दिन के भीतर एलजी अनिल बैजल बोर्ड की बैठक लेंगे। इसके बाद ही संशोधन का प्रस्ताव मंत्रालय को भेजा जाएगा।
नाश्ते में आए थे पकौड़े, छूटी हंसी
बैठक शुरू होने के करीब 15 मिनट बाद सुबह 11 बजकर 15 मिनट पर बैठक कक्ष में चाय और पकौड़े नाश्ते के लिए जनप्रतिनिधियों के समक्ष जैसे ही प्रस्तुत हुए। कुछ की हंसी छूट गई।
आप नेताओं की ओर से टिप्पणी की गई तो पलटकर बीजेपी नेताओं ने जवाब भी दिए। लेकिन एक के बाद एक तंज पूरे माहौल को विवाद तक ले जाने लगे।
ये देख अधिकारी भी आश्चर्यचकित थे। बताया जा रहा है कि दो अधिकारियों ने मामले को शांत कराने का प्रयास भी किया। लेकिन उनकी सुनवाई किसी ने नहीं की। स्थिति यह रही कि बोर्ड सदस्यों तक पर सवाल खड़े होने लगे।
अधिकारियों ने घटना पर जताया गुस्सा
उधर, इस घटना पर जब डीडीए के अधिकारियों से बातचीत की गई तो उन्होंने पहचान जाहिर करने से तो इंकार कर दिया, लेकिन घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए गुस्सा जाहिर किया।
उनका कहना था कि सीलिंग को लेकर जहां लोग परेशान हैं। डीडीए भी लगातार इस प्रोजेक्ट पर जुटा है। लेकिन जब भविष्य की नीति तय करने के लिए इस तरह की बैठक बुलाई जाती है तो नेताओं का ये रुख निराशाजनक है।