{"_id":"6aa17c8d0f147c83320126df","slug":"sculptors-intensified-their-preparations-orders-started-coming-in-a-month-ago-delhi-ncr-news-c-503-1-del1005-785-2026-09-09","type":"story","status":"publish","title_hn":"Delhi NCR News: मूर्तिकारों ने तेज की तैयारी, एक महीने पहले से मिलने लगे ऑर्डर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Delhi NCR News: मूर्तिकारों ने तेज की तैयारी, एक महीने पहले से मिलने लगे ऑर्डर
विज्ञापन
महाराष्ट्र से लाल मिट्टी मंगाकर बन रही मूर्तियां
मराठी परिवारों में विशेष उत्साह, अलग-अलग राज्यों की कला की झलक
संवाद न्यूज एजेंसी
पूर्वी दिल्ली। गणेश चतुर्थी पर्व के लिए राजधानी में तैयारियां तेज हो गई हैं। पूर्वी दिल्ली के लोनी रोड सहित कई इलाकों में भगवान गणेश की मिट्टी की प्रतिमाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है। मूर्तिकार छोटी से लेकर विशाल आकार तक की प्रतिमाए बना रहे हैं, और रंग-रोगन व बारीक कारीगरी का काम चल रहा है।
दुकानदारों के अनुसार, एक महीने पहले से ही ऑर्डर मिलने शुरू हो जाते हैं। कई ग्राहक अपनी पसंद के आकार, डिजाइन व रंग के अनुसार पहले से मूर्तियां बुक कराते हैं। मूर्तियों की कीमत आकार, रंग, बनावट व कारीगरी पर निर्भर करती है। छोटी मूर्तियां घरों के लिए, जबकि बड़ी व आकर्षक मूर्तियां पूजा समितियों व सार्वजनिक पंडालों के लिए जाती हैं।
महाराष्ट्र से दिल्ली आए मराठी परिवार लाल मिट्टी मंगवाकर उसी से मूर्तियां तैयार करवाते हैं, जिसका धार्मिक व भावनात्मक महत्व अधिक है। अन्य राज्यों व समुदायों के लोग भी अपनी परंपरा के अनुसार अलग-अलग जगहों से मिट्टी मंगवाते हैं। कुछ परिवार खुद महाराष्ट्र, कोलकत्ता व अन्य राज्यों से मूर्तियां लाते हैं, जिससे राजधानी में विभिन्न राज्यों की कला व मूर्तिकला की झलक देखने को मिलती है।
विज्ञापन
विज्ञापन
मराठी परिवारों में विशेष उत्साह, अलग-अलग राज्यों की कला की झलक
संवाद न्यूज एजेंसी
पूर्वी दिल्ली। गणेश चतुर्थी पर्व के लिए राजधानी में तैयारियां तेज हो गई हैं। पूर्वी दिल्ली के लोनी रोड सहित कई इलाकों में भगवान गणेश की मिट्टी की प्रतिमाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है। मूर्तिकार छोटी से लेकर विशाल आकार तक की प्रतिमाए बना रहे हैं, और रंग-रोगन व बारीक कारीगरी का काम चल रहा है।
दुकानदारों के अनुसार, एक महीने पहले से ही ऑर्डर मिलने शुरू हो जाते हैं। कई ग्राहक अपनी पसंद के आकार, डिजाइन व रंग के अनुसार पहले से मूर्तियां बुक कराते हैं। मूर्तियों की कीमत आकार, रंग, बनावट व कारीगरी पर निर्भर करती है। छोटी मूर्तियां घरों के लिए, जबकि बड़ी व आकर्षक मूर्तियां पूजा समितियों व सार्वजनिक पंडालों के लिए जाती हैं।
विज्ञापन
महाराष्ट्र से दिल्ली आए मराठी परिवार लाल मिट्टी मंगवाकर उसी से मूर्तियां तैयार करवाते हैं, जिसका धार्मिक व भावनात्मक महत्व अधिक है। अन्य राज्यों व समुदायों के लोग भी अपनी परंपरा के अनुसार अलग-अलग जगहों से मिट्टी मंगवाते हैं। कुछ परिवार खुद महाराष्ट्र, कोलकत्ता व अन्य राज्यों से मूर्तियां लाते हैं, जिससे राजधानी में विभिन्न राज्यों की कला व मूर्तिकला की झलक देखने को मिलती है।
विज्ञापन