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Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   Schools are making students fill admission forms on their own terms, leaving parents worried.

Delhi NCR News: अपनी शर्तों पर एडमिशन फार्म भरवा रहे स्कूल, अभिभावक परेशान

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 06 Dec 2025 07:55 PM IST
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नर्सरी दाखिला
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-स्कूल परिवहन, अभिभावकों की रिसर्च व स्पोर्ट्स में उपलब्धि के लिए भी अंक

-परिवहन के लिए स्कूल दे रहे 15-20 तक अंक, लोग बोले-आवेदन रेस जारी

अमर उजाला ब्यूरो

नई दिल्ली। दिल्ली के निजी स्कूलों में नर्सरी, केजी व पहली कक्षा में दाखिले के लिए आवेदन की रेस जारी है। स्कूलों की ओर से दाखिले के लिए जारी अजीब-गरीब मानक अभिभावकों को परेशान कर रहे हैं। कुछ स्कूल अभिभावकों की शोध व खेल में उपलब्धि को परख रहे हैं तो कहीं उनके राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर के ट्रैक रिकॉर्ड को देखा जा रहा। कुछ स्कूल जिस एरिया में स्कूल परिवहन उपलब्ध है, उस आधार पर अंक दे रहे हैं। अभिभावकों को इन मानकों के कारण स्कूल में बच्चों का दाखिला मुश्किल पा रहे हैं।


शिक्षा निदेशालय ने स्कूलों को दाखिले के लिए अपने मानक तय करने की छूट दी है। ऐसे में कुछ स्कूलों ने चुपके से ऐसे मानक तय कर दिए हैं, जिससे अधिकतर अभिभावकों के बच्चों के दाखिले में मुश्किल हो सकती है। दर्शन अकादमी पांच मानकों को अपने यहां दाखिले का आधार बनाया है। स्कूल ने नेबरहुड (पड़ोस) मानक के तहत तीन किलोमीटर तक की दूरी के लिए 40, तीन से पांच किलोमीटर की दूरी के लिए 35, पांच किलोमीटर से ज्यादा दूरी के लिए 30 अंक तय किए हैं। इसी तरह से सिबलिंग मानक के लिए 30, गर्ल चाइल्ड के लिए 10, और पूर्व छात्र व जुड़वां बच्चों के लिए 10 अंक तय किए हैं। इसके साथ ही स्कूल ने अभिभावकों के लिए भी एक मानक 10 अंक का रखा है। जिसमें उनके राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय स्तर के ट्रैक रिकॉर्ड को देखा जाएगा।
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अभिभावक बोले, स्कूल हमारी स्क्रीनिंग कर रहा
स्कूल में अपने बेटे के दाखिले के इच्छुक अभिभावक ने कहा कि यदि हमारा राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर का ट्रैक रिकॉर्ड नहीं हैं तो हमारे दस अंकों का नुकसान होगा। हमारे गर्ल चाइल्ड, सिबलिंग व पूर्व छात्र के अंक भी नहीं मिलेंगे। इस तरह से हमें केवल नेबरहुड के 30 अंक ही मिलेंगे। अभिभावकों का ट्रैक रिकॉर्ड देखकर एक तरह से स्कूल हमारी स्क्रीनिंग कर रहा है।
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बनाए मानकों पर लोगों ने उठाए सवाल
पूर्वी दिल्ली स्थित परमानंद विद्या मंदिर स्कूल ने जिस एरिया में स्कूल परिवहन उपलब्ध है, उसके लिए 15 अंक तय किए हैं। नियमानुुसार स्कूल पड़ोस(नेबरहुड) के आधार पर बच्चे को अंक दे सकते हैं। लेकिन परिवहन के लिए अंक देना गलत है। सालवान पब्लिक स्कूल ने नेबरहुड(8 किलोमीटर तक) में जहां स्कूल परिवहन उपलब्ध है उसके लिए 60 अंक तय किए हैं। जबकि 8 किलोमीटर के बाद जहां स्कूल परिवहन उपलब्ध नहीं है वहां 50 अंक तय किए हैं। जबकि अभिभावकों की शोध, खेल व सांस्कृतिक क्षेत्र में उपलब्धि के लिए 10-10 अंक तय किए हैं। अभिभावक शीतल सेठ ने कहा कि कुछ स्कूलों ने अपने मानकों में परिवहन का प्रयोग करने पर अंकों को शामिल किया है। यदि कोई अभिभावक स्कूल परिवहन का इस्तेमाल नहीं करता तो कम से कम 10 से 20 अंक तक का नुकसान होगा। इस तरह से कोई परिवहन का इस्तेमाल नहीं करता तो क्या वह बच्चे का दाखिला कराने का हकदार नहीं है। वहीं एपीजे स्कूल ने परिवहन का प्रयोग करने पर 10 अंक और टैगोर इंटरनेशनल स्कूल ने जिस एरिया में स्कूल परिवहन उपलब्ध है, वहां के लिए 50 अंक तय किए हैं। इस तरह से कोई बच्चा यदि दूर रहता है तो उसके सीधे-सीधे 50 अंक कम हो रहे हैं।
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