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अटल के नाम पर होगा जेएनयू का मैनेजमेंट स्कूल

Thu, 23 Aug 2018 09:13 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 23 Aug 2018 09:13 PM IST
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School of Management will be associated with Atal Bihari Vajpayees name
JNU

जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ मैनेजमेंट एंड इंटरप्रिंयोरशिप का नाम अब अटल बिहारी वाजपेयी स्कूल ऑफ मैनेजमेंट एंड इंटरप्रिंयोरशिप के नाम से जाना जाएगा। यह फैसला जेएनयू एग्जीक्यूटिव काउंसिल की बैठक में लिया गया। इस दौरान काउंसिल ने पूर्व प्रधानमंत्री को श्रद्धांजलि दी। खास बात यह है कि जेएनयू शिक्षकों की बायोमैट्रिक हाजिरी लगाने का प्रस्ताव भी बैठक में पास हो गया है।

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कैंपस में बृहस्पतिवार को काउंसिल के अध्यक्ष व कुलपति प्रो. एम जगदीश कुमार की अध्यक्षता में बैठक आयोजित हुई। जेएनयू अब रिसर्च, इनोवेशन व तकनीक के अलावा हॉस्टल व छात्रों को सुविधा देने के लिए हायर एजुकेशन फडिंग एजेंसी (हीफा) से 516 करोड़ रुपये का कर्ज लेगा। इस राशि में से 10 फीसदी ही विश्वविद्यालय को 20 सालों में चुकाना होगा।  
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-रिसर्च या लेखन की छुट्टी का होगा ऑडिट  
उच्च शिक्षण संस्थानों में शिक्षक रिसर्च, लेखन या पढ़ाई के लिए दो साल की छुट्टी (स्पेटिकल) लेते हैं। शिक्षक इस छुट्टी का दुरुपयोग नहीं कर सकेंगे। दरअसल अब दो साल की छुट्टी के दौरान क्या किया इसकी रिपोर्ट विश्वविद्यालय में जमा करवानी होगी। इसका ऑडिट होगा। कोई शिक्षक गलत रिपोर्ट देता है तो उस पर नियमों के तहत कार्रवाई भी होगी।   
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अन्य महत्वपूर्ण फैसले
- अब शिक्षकों की भी हाजिरी जांची जाएगी। कैंपस में बायोमैट्रिक मशीन लगेंगी, जिसके माध्यम से हाजिरी का रिकार्ड रखा जाएगा। 
 - शिक्षकों की नियुक्ति व प्रमोशन के लिए यूजीसी रेगुलेशन (निुक्ति व प्रमोशन के तहत मानक ) 2018 को लागू कर दिया गया है।  
- जेएनयू मं अब एमेरिट्स प्रोफेसर को सिर्फ काम के हिसाब से नियुक्ति नहीं दी जाएगी। इसके लिए पहली बार गाइडलाइंस बनाई गई है। उन्हें अब जेएनयू की बेहतरी व विकास के लिए अपना योगदान देना होगा। इसका हर पांच साल में रिव्यू भी होगा।  
- जेएनयू के रिटायर्ड कर्मियों व उनके परिवारों को लाइफटाइम सीजीएचएस का स्वास्थ्य कार्ड मिलेगा।  
- कैग रिपोर्ट व सिफारिश के तहत प्रो. नीलिमा की नियुक्ति गलत तरीके से होने के चलते उन्हें दोबारा एसोसिएट प्रोफेसर बना दिया गया है। इसके अलावा गलत नियुक्ति होने के दौरान वेतन के 18 लाख रुपये भी रिकवर किए जाएंगे।  

-प्रो. गीता कोछर को सस्पेंड करने का फैसला बैठक में सदस्यों के विरोध के चलते बदल दिया गया है। अब कमेटी प्रो. गीता पर लगे आरोपों की जांच करेगी और उसी रिपोर्ट के आधार पर आगे फैसला लिया जाएगा।

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