दिल्ली सरकार की मंजूरी के बिना फीस नहीं बढ़ा सकते स्कूल
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हाईकोर्ट ने अपने एक महत्वपूर्ण फैसले में दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) से सस्ती दरों पर भूमि लेने वाले गैर सहायता प्राप्त स्कूलों पर दूसरी कड़ी में लगाम कस दी।
अदालत ने स्पष्ट कर दिया कि स्कूल प्रशासन दिल्ली सरकार की मंजूरी लिए बिना फीस में बढ़ोतरी नहीं कर सकते। अदालत ने कहा कि स्कूल मुनाफाखोरी व शिक्षा के व्यवसायीकरण में लिप्त नहीं हो सकते।
इससे पहले अदालती फैसले के बाद इन स्कूलों को आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के बच्चों के लिए 25 प्रतिशत सीटें दाखिलों में आरक्षित रखनी पड़ी है।
शिक्षा निदेशालय को हस्तक्षेप का पूरा अधिकार
मुख्य न्यायाधीश जी रोहिणी व न्यायमूर्ति जयंत नाथ की खंडपीठ ने 16 पेज के फैसले में स्पष्ट कर दिया कि मान्यता प्राप्त गैर सहायता प्राप्त स्कूल, दिल्ली स्कूल शिक्षा अधिनियम के तहत ही फीस ले सकते है। यदि कोई स्कूल मुनाफाखोरी व बिना मंजूरी के फीस बढ़ोतरी में लिप्त पाया जाता है तो शिक्षा निदेशालय को हस्तक्षेप का पूरा अधिकार है।
खंडपीठ ने कहा कि सभी स्कूल सर्वोच्च न्यायालय माडर्न स्कूल मामले में दिए गए फैसले को मानने के लिए बाध्य हैं। इस फैसले के तहत कोई भी स्कूल बिना शिक्षा निदेशालय की मंजूरी के फीस में बढ़ोतरी नहीं कर सकता।
खंडपीठ ने शिक्षा निदेशालय को निर्देश दिया कि वह इस आदेश का पालन करवाएं। अदालत ने कहा कि यदि कोई स्कूल इसका उल्लंघन करता है तो निदेशालय उसकी जानकारी डीडीए को दे। अदालत ने डीडीए को निर्देश दिया कि उल्लंघन करने वाले स्कूलों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए। खंडपीठ ने यह फैसला एनजीओ जस्टिस फॉर ऑल द्वारा दायर जनहित याचिका का निपटारा करते हुए दिया है।
क्या है पूरा मामला
याचिकाकर्ता के वकील खगेश झा ने तर्क रखा था कि डीडीए से सस्ती दरों पर भूमि लेने वाले स्कूल तय नियमों के तहत शिक्षा निदेशालय की मंजूरी के बिना फीस नहीं बढ़ा सकते।
उन्होंने कहा कि 410 स्कूलों को डीडीए ने जमीन आवंटित की है। उन्होंने कहा कि उक्त स्कूल बिना मंजूरी लिए ही फीस में भारी बढ़ोतरी कर रहे है और दिल्ली सरकार व डीडीए कोई कार्रवाई करने में असमर्थ है।
उन्होंने कहा कि स्कूल फीस में बेतहाशा बढ़ोतरी कर रहे हैं। जिससे अभिभावकों की जेब पर बोझ पड़ रहा है। ऐसे में सरकार को तय नियमों का उल्लंघन करने वाले स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई करने व डीडीए को भूमि का आवंटन रद्द करने का निर्देश दिया जाए।