डेंगू-चिकनगुनिया के बढ़ते मामलों पर SC गंभीर, एलजी और सीएम को दिए निर्देश
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सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को दिल्ली के उपराज्यपाल (एलजी) नजीब जंग, मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और स्वास्थ्य मंत्री सतेंद्र जैन व अन्य को आदेश दिया कि वे डेंगू और चिकनगुनिया के बढ़ते मामलों को गंभीरता से लें और बैठक कर इससे निपटने को ठोस योजना बनाएं।
अदालत ने बुधवार को एलजी की अध्यक्षता में बैठक आयोजित करने को कहा है। अदालत ने बैठक में एलजी, सीएम और स्वास्थ्य मंत्री के अलावा तीनों निगमों के आयुक्त, एनडीएमसी के चेयरमैन, डीडीए के वाइस चेयरमैन, केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव, दिल्ली के मुख्य सचिव, उत्तर रेलवे के महाप्रबंधक और डीएमआरसी के प्रबंध निदेशक को शामिल होने का आदेश दिया है।
पीठ ने कहा कि हमारा मानना है कि डेंगू और चिकनगुनिया के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए बैठक में कोई भी अपने प्रतिनिधि को नहीं भेजेगा। अगर कोई बैठक में अपने प्रतिनिधि को भेजता है तो उसे अनुपस्थित माना जाएगा।
साथ ही पीठ ने सभी से कहा है कि वे पूर्व में किए गए अपने कामों को न गिनाएं, बल्कि भविष्य में किए जाने वाले कामों पर ध्यान दें। मामले की अगली सुनवाई बृहस्पतिवार को होगी।
मामले पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति मदन बी लोकुर की अध्यक्षता वाली पीठ ने दिल्ली सरकार को कड़ी फटकार लगाई। अदालत ने दिल्ली सरकार से कहा कि वह दोषारोपण के बजाए डेंगू और चिकनगुनिया की रोकथाम के लिए काम करे।
'सीएम और स्वास्थ्य मंत्री बैठक कर बनाएं ठोस योजना'
शीर्ष अदालत ने सरकार से कहा कि दिल्ली के लोगों ने आपको चुना है। इसलिए आप दूसरों पर दोष न मढ़े, बल्कि लोगों की परेशानी दूर करने को ठोस कदम उठाएं।
साथ ही शीर्ष अदालत ने दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सतेंद्र जैन पर लगे 25 हजार रुपये के जुर्माने को माफ करने से इनकार कर दिया। पीठ ने दिल्ली सरकार के वकील राहुल मेहरा को ताकीद किया कि किसी तरह का दोषारोपण नहीं होना चाहिए।
पीठ ने कहा कि आपकी चुनी हुई सरकार है। आप दूसरे पर काम न करने का आरोप लगाएंगे तो दूसरे भी आप पर आरोप लगाएंगे कि आप काम नहीं कर रहें। इस पर राहुल मेहरा ने पीठ को भरोसा दिलाया कि किसी तरह का दोषारोपण नहीं होगा और सभी मिलजुल कर काम करेंगे।
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल रंजीत कुमार ने पीठ से कहा कि स्वास्थ्य मंत्री सतेंद्र जैन ने दिल्ली के स्वास्थ्य सचिव चंद्राकर भारती पर निजी आरोप लगाया है। लिहाजा स्वास्थ्य सचिव इस संबंध में पक्ष रखना चाहते हैं। इस पर पीठ ने इस विवाद पर विराम लगाते हुए कहा कि जैन द्वारा की गई टिप्पणी को रिकार्ड पर नहीं लिया जाएगा।