फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   SC has reverted case of JP Infratech to National Company Law Tribunal

सुप्रीम कोर्ट ने जेपी इंफ्राटेक के मामले को भेजा एनसीएलटी, 32000 खरीदारों पर होगा असर

Thu, 09 Aug 2018 10:06 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला, नोएडा
ब्यूरो, अमर उजाला, नोएडा Updated Thu, 09 Aug 2018 10:06 PM IST
विज्ञापन
SC has reverted case of JP Infratech to National Company Law Tribunal
- फोटो : social media

जेपी इंफ्राटेक के मामले में सुप्रीम कोर्ट के संज्ञान लेने के बाद खरीदारों में एक आस जगी थी, जो बृहस्पतिवार को निराशा में बदल गई। फ्लैट खरीदारों की मानें तो वह जहां से चले थे फिर से वहीं पहुंच गए। सुप्रीम कोर्ट ने जेपी इंफ्राटेक के मामले को फिर से नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) में वापस कर दिया है। इससे वहां नए सिरे से सारी कवायद होगी।

विज्ञापन


जेपी के खरीदार एनएस ढ़ींगरा ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट की आम्रपाली बिल्डर पर की गई कार्रवाई से हम बेहद उत्साहित थे, लेकिन हमारे मामले में केस को वापस एनसीएलटी भेज दिया गया। अब नोएडा के सभी 32000 फ्लैट खरीदारों को घरों से निकलना पड़ेगा। 
विज्ञापन


उनका कहना है कि जो कमेटी ऑफ क्रेडिटर्स बनेगी। उसमें सभी खरीदार होंगे और इंसोलवेंसी रिजोल्यूशन प्रोफेशनल (आईआरपी) चयन से लेकर बिड तक में वोटिंग होगी। लिहाजा, उसमें सभी को एक साथ आना पड़ेगा। चाहे इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग ही क्यों न हो। यह बहुत ही मुश्किल भरा होगा।
विज्ञापन
विज्ञापन


वहीं, अन्य खरीदारों का कहना है कि हम नया आईआरपी भी चुन सकते हैं या फिर पुराने पर भरोसा कर सकते हैं, लेकिन मामला फिर से वहीं का वहीं रह गया है। अगर बिड के लिए कंपनियों को आमंत्रित भी किया जाता है तो उसमें बैंक अड़ंगा डालेंगे। 

लिहाजा, वोटिंग के लिए सभी को एक साथ सक्रिय होना पड़ेगा। अगर नहीं हुए तो फिर वोटिंग में पिछड़ने से फैसले पर असर पड़ेगा। जो पैसे जेपी ने सुप्रीम कोर्ट में जमा कराए हैं उस पैसे को एनसीएलटी को दे दिया गया है। उस पैसे का क्या होगा। यह भी अभी पूरी तरह से स्पष्ट नहीं है। हम पूरी तरह से निराश और हताश हो गए हैं।

हर व्यक्ति चाहता है परिवार के लिए घर : सुप्रीम कोर्ट

SC has reverted case of JP Infratech to National Company Law Tribunal

सुप्रीम कोर्ट ने मकान को एक परिवार की मूल मानवीय इच्छा बताते हुए कहा कि लोग एक अदद छत पाने के लिए अपनी गाढ़ी कमाई लगा देते हैं। फ्लैट खरीदारों की समस्या को लेकर चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की पीठ ने जेपी इंफ्राटेक द्वारा सुप्रीम कोर्ट में जमा कराए गए 750 करोड़ रुपये को एनसीएलटी में ट्रांसफर करने को कहा है।

इस रकम का क्या होगा, इसका फैसला एनसीएलटी करेगा। पीठ ने रिजर्व बैंक को जेपी एसोसिएट के खिलाफ दिवालियापन की कार्यवाही शुरू करने की इजाजत दे दी है। सुप्रीम कोर्ट ने ‘इंसॉल्वेंसी एंड बैंक्रप्सी कोड’ में बदलाव करते हुए फ्लैट खरीदारों को भी क्रेडिटर में शामिल किया है।

लिहाजा कोर्ट ने कमेटी ऑफ क्रेडिटर का पुनर्गठन कर इसमें फ्लैट खरीदारों को शामिल करने को कहा है। मालूम हो कि आईडीबीआई ने जेपी इंफ्राटेक के खिलाफ 526 करोड़ रुपये का कर्ज न चुकाने के आरोप में एनसीएलटी में दिवालियापन कानून के तहत मामला दर्ज किया था। जिसके बाद फ्लैट खरीदारों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

जेपी के खरीदार बोले, जहां से चले थे फिर से वहीं पहुंचे

SC has reverted case of JP Infratech to National Company Law Tribunal
जेपी विश टाउन - फोटो : अमर उजाला

जेपी इंफ्राटेक के मामले में सुप्रीम कोर्ट के संज्ञान लेने के बाद खरीदारों में एक आस जगी थी, जो बृहस्पतिवार को निराशा में बदल गई। फ्लैट खरीदारों की मानें तो वह जहां से चले थे फिर से वहीं पहुंच गए। सुप्रीम कोर्ट ने जेपी इंफ्राटेक के मामले को फिर से नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) में वापस कर दिया है। इससे वहां नए सिरे से सारी कवायद होगी।

जेपी के खरीदार एनएस ढ़ींगरा ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट की आम्रपाली बिल्डर पर की गई कार्रवाई से हम बेहद उत्साहित थे, लेकिन हमारे मामले में केस को वापस एनसीएलटी भेज दिया गया। अब नोएडा के सभी 32000 फ्लैट खरीदारों को घरों से निकलना पड़ेगा।

उनका कहना है कि जो कमेटी ऑफ क्रेडिटर्स बनेगी। उसमें सभी खरीदार होंगे और इंसोलवेंसी रिजोल्यूशन प्रोफेशनल (आईआरपी) चयन से लेकर बिड तक में वोटिंग होगी। लिहाजा, उसमें सभी को एक साथ आना पड़ेगा। चाहे इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग ही क्यों न हो। यह बहुत ही मुश्किल भरा होगा।

वहीं, अन्य खरीदारों का कहना है कि हम नया आईआरपी भी चुन सकते हैं या फिर पुराने पर भरोसा कर सकते हैं, लेकिन मामला फिर से वहीं का वहीं रह गया है। अगर बिड के लिए कंपनियों को आमंत्रित भी किया जाता है तो उसमें बैंक अड़ंगा डालेंगे।

लिहाजा, वोटिंग के लिए सभी को एक साथ सक्रिय होना पड़ेगा। अगर नहीं हुए तो फिर वोटिंग में पिछड़ने से फैसले पर असर पड़ेगा। जो पैसे जेपी ने सुप्रीम कोर्ट में जमा कराए हैं उस पैसे को एनसीएलटी को दे दिया गया है। उस पैसे का क्या होगा। यह भी अभी पूरी तरह से स्पष्ट नहीं है। हम पूरी तरह से निराश और हताश हो गए हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed