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दिल्लीः सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार का प्रस्ताव किया मंजूर, रविदास मंदिर बनने की राह हुई और आसान

Mon, 21 Oct 2019 05:11 PM IST
पूजा त्रिपाठी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: पूजा त्रिपाठी Updated Mon, 21 Oct 2019 05:11 PM IST
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SC accepts Centre revised offer of 400 sq mt land for Guru Ravidas temple delhi
ravidas - फोटो : facebook

केंद्र सरकार दिल्ली के संत रविदास मंदिर की जमीन श्रद्धालुओं को लौटाने के पक्ष में है और उनका ये प्रस्ताव सुप्रीम कोर्ट ने स्वीकार कर लिया है। कोर्ट के इस फैसले के बाद मंदिर बनने की राह और आसान हो गई है।

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सोमवार को हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल की ओर से रखे गए मंदिर के लिए 400 वर्ग यार्ड जमीन देने के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है।
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इसी के साथ सुप्रीम कोर्ट ने यह भी हिदायद दी है कि यहां पर किसी तरह की व्यावसायिक गतिविधियां संचालित नहीं की जाएगी। इसके तहत पेड पार्किंग की व्यवस्था भी नहीं होगी। कोर्ट ने केंद्र सरकार को आदेश दिया है कि वह छह सप्ताह के भीतर एक कमेटी का गठन करें, जो निर्माण की देखरेख करेगी।

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कोर्ट ने बातचीत से मामला हल करने को कहा था

शीर्ष कोर्ट ने पिछली सुनवाई में इस मामले से जुड़े लोगों को अटॉर्नी जनरल से बातचीत कर समाधान निकालने का प्रयास करने को कहा था। तुगलकाबाद स्थित संत रविदास मंदिर को सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर 10 अगस्त को ढहा दिया गया था। जिसके बाद दिल्ली समेत उत्तर भारत में कई जगहों पर विरोध-प्रदर्शन हुए थे।

अटॉर्नी जनरल ने बीते शुक्रवार(18 अक्तूबर) को जस्टिस अरुण मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष कहा था कि यह श्रद्धालुओं के हितों से जुड़ा संवेदनशील मामला है। अनुयायी भावनात्मक रूप से संत रविदास के इस स्थान से जुड़े हैं। लिहाजा सरकार चाहती है कि शांति और सौहार्द को देखते हुए मंदिर के स्थान को श्रद्धालुओं को लौटा दिया जाए।

अटॉर्नी जनरल ने कोर्ट को बताया था कि सात में से पांच पक्षकार 400 वर्ग यार्ड वाले इस स्थान को श्रद्धालुओं को वापस देने के लिए तैयार हैं। जबकि दो याचिकाकर्ता ने इस प्रस्ताव का विरोध किया था। इनमें से एक याचिकाकर्ता के वकील ने अपना पक्ष रखने के लिए पीठ से वक्त मांगा। जिस पर पीठ ने इस प्रस्ताव से असहमत दोनों पक्षों को सोमवार तक का समय दे दिया था।

दो सांसदों की याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी अदालत

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट दो पूर्व सांसदों अशोक तंवर और प्रदीप जैन आदित्य समेत अन्य की याचिका पर सुनवाई कर रही है। जिसमें दोनों पूर्व सांसदों ने कहा है कि यह मामला मंदिर में पूजा करने के अधिकार से जुड़ा है।

मंदिर ढहाने का विरोध करते हुए उन्होंने कहा, मसला जमीन पर अधिग्रहण का था और इसके तहत मंदिर नहीं आता। इससे पहले अगस्त में मंदिर को तोड़ने पर हुए विरोध प्रदर्शन से नाराज सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि कोर्ट के आदेश पर राजनीति नहीं होनी चाहिए। सभी को इससे दूर रहना चाहिए।

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