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मां, पत्नी के लिए भी तरस जाओगे
निशा ठाकुर/अमर उजाला, गाजियाबाद
Updated Wed, 15 Jan 2014 12:39 PM IST
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अमर उजाला के ‘बेटी ही बचाएगी’ अभियान की सार्थकता जिला प्रशासन के आंकड़े साबित कर रहे हैं। बेटी बचाओ अभियान समाज के लिए कितना जरूरी है, इसका अंदाजा इससे लग जाता है कि गाजियाबाद जिले में बेटे और बेटियों की संख्या में एक दो नहीं, बल्कि 39 हजार का अंतर है।
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यदि इस दूरी को पाटने की कोशिश आज से शुरू नहीं की गई तो लैंगिक असमानता का बड़ा संकट समाज के सामने खड़ा हो जाएगा। गाजियाबाद में2011 की जनगणना संशोधन के बाद जो आंकड़े सामने आए हैं वे चौंका देने वाले हैं।
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जिले में शून्य से छह वर्ष के कुल बच्चों की संख्या 4,68,725 है। इनमें बालकों की संख्या 2,53,872 और बालिकाओं की संख्या 2,14,853 है। बालक और बालिकाओं की संख्या में कुल 39,019 का अंतर है।
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2001 में हुए जनगणना में शून्य से छह वर्ष तक की आयु के बच्चों की कुल संख्या जिले में 5,66,447 थी। उस समय बालकों और बालिकाओं की संख्या में 44,581 का अंतर था। वर्ष 2001 के बाद से ही सरकारी स्तर पर बेटी बचाओ अभियान चलाया जा रहा है। इसके बावजूद महज 5,562 संख्या का अंतर ही पाटा जा सका है।