मरकर भी 6 जिंदगियां रोशन कर गए मुंबई के सतीश
मुंबई के इंजीनियर को डॉक्टरों ने घोषित कर दिया था ब्रेन डेड
पत्नी ने दिखाया साहस, अस्पताल के सामने रखी पति के अंगदान की इच्छा
हार्ट, दोनों किडनी, लीवर व दोनों कॉर्निया को किया गया दान
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
मुंबई के 40 साल के सतीश तावड़े ने मरने के बाद भी 6 लोगों को नई जिंदगी दी है। ब्रेन डेड होने पर पत्नी ने साहस दिखाते हुए सतीश तावड़े के हार्ट, दोनों किडनी, लीवर और दोनों कॉर्निया दान कर दीं। जिस वजह से कई परिवारों के घरों में खुशियां लौट आई हैं।
अलग-अलग अस्पतालों में हार्ट, दोनों किडनी और लिवर का ट्रांसप्लांट किया गया है। वहीं जेपी अस्पताल प्रशासन ने अभी कॉर्निया को आई बैंक में प्रिजर्व किया है। सतीश तावड़े के अंगों के अलग- अलग अस्पताल में भेजने में देरी न हो, इसके लिए जेपी अस्पताल प्रबंधक ने पुलिस की मदद से ग्रीन कॉरिडोर बनाया।
जेपी अस्पताल से फोर्टिस अस्पताल को एक किडनी और दिल्ली के मैक्स अस्पताल को हार्ट भेजा गया। वहीं लिवर और एक किडनी जेपी अस्पताल में ही मरीज को ट्रांसप्लांट हुई। जेपी अस्पताल में लिवर 39 वर्षीय पुरुष को ट्रांसप्लांट किया गया है।
लिवर फेलियर होने से ये शख्स पिछले कई वर्षों से परेशान था। वहीं किडनी 62 वर्षीय पुरुष को दी गई है। पिछले 2 वर्षों से किडनी फेल होने की वजह से डायलेसिस पर चल रहे थे।इंजीनियर सतीश तावड़े मुंबई के रहने वाले थे। ऑफिस के काम से दिल्ली आए थे।
2 दिसंबर की रात अचानक उनकी तबीयत खराब हो गई। फिर उन्हें जेपी अस्पताल में भर्ती कराया गया। जांच के दौरान पता चला कि मरीज की सब-आर्कनोइड हेमरेज बीमारी से मृत्यु हो चुकी थी। उसकेबाद डॉक्टरों की टीम ने सुबह 3 बजे और सुबह 9 बजे दो बार जांच की और मरीज को ब्रेन डेड घोषित किया।
ये खबर सुनकर परिवार टूट गया था, लेकिन पत्नी ने हिम्मत दिखाई और डॉक्टरों के सामने पति के अंगदान की बात रखी और प्रक्रिया पूरी की। जेपी अस्पताल के वरिष्ठ लिवर ट्रांसप्लांट सर्जन डॉ. अभिदीप चौधरी और वरिष्ठ किडनी ट्रांसप्लांट सर्जन डॉ. अमित देवरा के नेतृत्व में पूरा काम हुआ।
मरीज के लिवर, दोनों कॉर्निया और किडनी को जेपी अस्पताल के मरीजों को दान किया गया।
अस्पताल के सीईओ डॉ. मनोज लूथरा ने बताया कि मरीज की मृत्यु हो जाने के बाद उसकी सूचना राष्ट्रीय अंग प्रत्यारोपण संस्थान को दी गई। वहां के दिशा-निर्देशानुसार मरीज के अंगों को विभिन्न अस्पताल में भेजा गया।
मरीज के तीन अंग जिसमें लिवर, दोनों कॉर्निया और किडनी को जेपी अस्पताल के मरीजों को दान किया गया। दूसरी किडनी को फोर्टिस अस्पताल नोएडा तथा हार्ट को मैक्स अस्पताल साकेत (दिल्ली) के मरीज को दान किया गया। फोर्टिस अस्पताल में 30 वर्षीय पुरुष को किडनी ट्रांसप्लांट की गई है।
दो ग्रीन कॉरिडोर बनाए गए
एसपी सिटी दिनेश यादव ने बताया कि जेपी अस्पताल की ओर से आर्गन पहुंचाने के लिए फोर्टिस तक ग्रीन कॉरिडोर बनाने की मांग की। आनन-फानन में जेपी से फोर्टिस अस्पताल तक 16 किमी का ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया। 14 मिनट के अंदर किडनी को अस्पताल में पहुंचा दिया गया।
कुछ दिन पहले इसी तरह जेपी से फोर्टिस तक कॉरिडोर बनाया गया था। तब 15 मिनट में आर्गन को पहुंचाया गया था, लेकिन इस बार एक मिनट पहले ही आर्गन अस्पताल पहुंचा दिया गया। इस दौरान छह थानों की फोर्स लगी थी। आर्गन को एक्सप्रेस-वे, हाजीपुर अंडरपास, सेक्टर-39 से सेक्टर-49 बरौला, सेक्टर-71 चौराहा फेज-3 होते हुए फोर्टिस पहुंचा दिया गया था।
वहीं एसपी ट्रैफिक प्रबल प्रताप सिंह ने बताया कि जेपी अस्पताल से साकेत के मैक्स अस्पताल के 32 किमी के लिए ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया। यहां जेपी अस्पताल से डीएनडी तक नोएडा ट्रैफिक पुलिस ने कॉरिडोर बनाने की जिम्मेदारी निभाई और पांच मिनट ही एंबुलेंस को यहां तक पहुंचा दिया। इसके बाद का जिम्मा दिल्ली ट्रैफिक पुलिस का रहा, जिसमें 25 मिनट के अंदर हार्ट को अस्पताल में पहुंचा दिया।