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सरिस्का टाइगर रिजर्व: यहां सुनाई देती है बाघ की दहाड़
अमर उजाला, दिल्ली
Updated Fri, 27 Dec 2013 04:59 PM IST
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बहुत सारी तस्वीरें और बहुत सारी जानकारियों के बाद अब घूमने का समय है। सरिस्का टाइगर रिजर्व।
दिल्ली से महज 200 किमी दूर राजस्थान के अलवर जिले में स्थित सरिस्का वीकेंड एंज्वॉय करने का फेवरेट डेस्टिनेशन के रूप में उभर रहा है।
अरावली पहाड़ियों से घिरा यह टाइगर रिजर्व 866 स्कैवयर किमी एरिया में फैला है। जिसमें बाघों की दहाड़ गूंज सी उठती है। बांघों की मौजूदगी आपको ना केवल आपको सचेत करती है बल्कि सिरहन भी देती है।
दिल्ली से कार ड्राइव करते हुए आसानी से अलवर और उसके बाद सरिस्का तक पहुंचा जा सकता है। सड़कें अच्छी होने के कारण सफर का पता भी नहीं चलता। वैसे तो यह टाइगर रिजर्व पूरे साल खुला रहता है लेकिन यहां जाने का सबसे अच्छा महीना अक्टूबर से अप्रैल के बीच है।
आप अगर अपनी गाड़ी से यहां जाते हैं तो एंट्री फी के रूप में आपको केवल प्रति व्यक्ति 80 रुपये देने होंगे लेकिन अगर आप बिना कार के जाते हैं तो आपको यहां कार और जीप भी मिल जाएगी। इसके लिए आपको 800 से 1200 रुपये तीन घंटे के लिए देने होंगे।
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अगर यहां आप रात गुजारना चाहते हैं तो भी आपके लिए इंतजाम है। जो कार से नहीं जाना चाहते हैं उनके लिए शताब्दी एक्सप्रेस के अलावा मंधोर, जोधपुर और जैसलमेर एक्सप्रेस भी दिल्ली से अलवर तक जाती हैं।
इसके साथ 9वीं और 10वीं सदी का बना हुआ नीलकंड महादेव मंदिर और गढ़ राजौर मंदिर भी आप देख सकते हैं। इस पार्क के अंदर ही 17वीं सदी का बना हुआ कांकावाड़ी का किला भी देखने को मिलेगा, जहां औरंगजेब ने अपने भाई दारा शिकोह को कैद कर लिया था।
यहां आसपास से आप राजस्थान की प्रसिद्ध मोजरी और लाख की चूड़ियां खरीद सकते हैं। इसके अलावा चांदी से बने हुए गहने भी आप ले सकते हैं, जो खास रूप से राजस्थान की पहचान है। टाइगर रिजर्व के आसपास के कलाकंद भी आपको अच्छे लग सकते हैं।
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दिल्ली से महज 200 किमी दूर राजस्थान के अलवर जिले में स्थित सरिस्का वीकेंड एंज्वॉय करने का फेवरेट डेस्टिनेशन के रूप में उभर रहा है।
अरावली पहाड़ियों से घिरा यह टाइगर रिजर्व 866 स्कैवयर किमी एरिया में फैला है। जिसमें बाघों की दहाड़ गूंज सी उठती है। बांघों की मौजूदगी आपको ना केवल आपको सचेत करती है बल्कि सिरहन भी देती है।
दिल्ली से कार ड्राइव करते हुए आसानी से अलवर और उसके बाद सरिस्का तक पहुंचा जा सकता है। सड़कें अच्छी होने के कारण सफर का पता भी नहीं चलता। वैसे तो यह टाइगर रिजर्व पूरे साल खुला रहता है लेकिन यहां जाने का सबसे अच्छा महीना अक्टूबर से अप्रैल के बीच है।
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आप अगर अपनी गाड़ी से यहां जाते हैं तो एंट्री फी के रूप में आपको केवल प्रति व्यक्ति 80 रुपये देने होंगे लेकिन अगर आप बिना कार के जाते हैं तो आपको यहां कार और जीप भी मिल जाएगी। इसके लिए आपको 800 से 1200 रुपये तीन घंटे के लिए देने होंगे।
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अगर यहां आप रात गुजारना चाहते हैं तो भी आपके लिए इंतजाम है। जो कार से नहीं जाना चाहते हैं उनके लिए शताब्दी एक्सप्रेस के अलावा मंधोर, जोधपुर और जैसलमेर एक्सप्रेस भी दिल्ली से अलवर तक जाती हैं।
इसके साथ 9वीं और 10वीं सदी का बना हुआ नीलकंड महादेव मंदिर और गढ़ राजौर मंदिर भी आप देख सकते हैं। इस पार्क के अंदर ही 17वीं सदी का बना हुआ कांकावाड़ी का किला भी देखने को मिलेगा, जहां औरंगजेब ने अपने भाई दारा शिकोह को कैद कर लिया था।
यहां आसपास से आप राजस्थान की प्रसिद्ध मोजरी और लाख की चूड़ियां खरीद सकते हैं। इसके अलावा चांदी से बने हुए गहने भी आप ले सकते हैं, जो खास रूप से राजस्थान की पहचान है। टाइगर रिजर्व के आसपास के कलाकंद भी आपको अच्छे लग सकते हैं।