सरदारों के चुटकुलों पर सौ करोड़ का कारोबार, बने सख्त कानून
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दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने सिखों पर चुटकुले बनाने वालों के खिलाफ सख्त कानून बनाने की मांग की है। कमेटी का कहना है कि 1980 के दशक में कांग्रेस सरकार की सिखों के प्रति गलत नीतियों के कारण ही सिखों के खिलाफ संता-बंता के नाम से चुटकुले बनाने की परिपाटी शुरू हुई।
प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष मनजीत सिंह जीके ने प्रेस कॉंफ्रेंस में बताया कि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के आरोपी सतवंत सिंह को संता और बेअंत सिंह को बंता कहकर सिख भावनाओं को चोट पहुंचाने का सिलसिला एक साजिश के तहत कांग्रेस ने शुरू किया।
इस मामले को सुप्रीम कोर्ट में ले जाने वाली वकील हरविंदर कौर चौधरी भी इस मौके पर मौजूद थीं। कमेटी के महासचिव मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि 84 दंगा को 31 साल बीत गए।
क्या किसी ने किसी सिख का दर्द पूछा है?
शर्म की बात है कि एक भी साहित्यकार ने अपने अवार्ड को नहीं लौटाया। उन्होंने पूछा कि क्या लेखकों का भी कोई धर्म होता है। सिख दंगा देश के लिए शर्म की बात है। सिरसा ने सभी राजनीतिक पार्टियों पर अल्पसंख्यकों का शोषण करने का आरोप लगाया।
उन्होंने पूछा कि क्या किसी ने किसी सिख का दर्द पूछा है? किसी पीड़ित सिख बच्चे को सरकारी नौकरी दी है? चुटकुला बनाकर रोज उनके जख्मों पर नमक छिड़कने का काम किया जाता है।
कमेटी ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से पूछा है कि देश में पैदा हुए असहिष्णुता भरे माहौल पर तो वह राष्ट्रपति से मिलने गईं। क्या सिखों को मजाक का पात्र बनाने की कोशिश करने की बात उन्होंने कभी राष्ट्रपति के सामने रखी?
सौ करोड़ सालाना का कारोबार
सिख/सरदार जोक्स के नाम पर देश की 50 वेबसाइट काम कर रही है। प्रबंधक कमेटी ने दावा किया है कि इससे करीब सौ करोड़ रुपये का सालाना कारोबार किया जा रहा है।
कमेटी ने सभी वेबसाइट को बंद कराने की मांग की है। इस मामले को अदालत तक ले जाने वाली चौधरी को अपनी तरफ से पूरे समर्थन का आश्वासन दिया है। प्रबंधक कमेटी का कहना है कि सभी धर्म के लोगों से इस मामले में बात की जाएगी।
जीके ने सरदारों के 12 बजने के नाम पर किए जाने वाले व्यंग्य के इतिहास की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जब मुगल व पठान हिंदुस्तान के खजाने को लूटने के साथ बहू-बेटियों को जबरन उठाकर अरब देशों में बेचने के लिए काबुल-कंधार के नजदीक पहुंच कर रात गुजारने के लिए रुकते थे तो जंगलों में डेरा डाले हुए सिख आधी रात के समय मुगल सेना पर धावा बोलकर बहू-बेटियों को ना केवल छुड़ाते थे बल्कि उनके घरों तक उन्हें सुरक्षित पहुंचा कर आते थे।
सख्त कानून बनना चाहिए : हरविंदर कौर चौधरी
जिस समय मुगलों पर यह हमला होता था तो वह कहते थे कि सिखों के 12 बज गए हैं। इसलिए इनको जीता नहीं जा सकता है। इस मामले को सुप्रीम कोर्ट में ले जाने वाली वकील हरविंदर कौर चौधरी ने सिखों पर चुटकुले प्रकाशित या प्रसारित करने वाले लोगों के खिलाफ एससी/एसटी एक्ट की धाराओं के तहत जातिसूचक शब्दों के इस्तेमाल वाली सजा या कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न के कानून की तर्ज पर सिखों के मानसिक उत्पीड़न जैसा कानून बनाकर कड़ी सजा का प्रावधान भारतीय दंड संहिता में करने की वकालत की।
गुरुद्वारा रकाब गंज पहुंची चौधरी ने वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी पर सिखों की भावनाओं के साथ खिलवाड़ करने का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा कि सिंघवी से अदालत ने जब सिख चुटकुले पर पूछा तो उन्होंने कहा कि इंडियन सिटिजन सरदार का मजाक उड़ाए बगैर नहीं रह सकता। सिंघवी ने यह भी कहा था कि विदेशों में भी सिखों पर जोक बनते हैं।