केंद्र की सहमति से डीडीए ने गरीबों को दिए जाने वाले फ्लैट के नाम पर किया घोटाला- संजय सिंह
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आम आदमी पार्टी ने दिल्ली विकास प्राधिकरण पर गरीबों को दिए जाने वाले फ्लैट के नाम पर घोटाला करने का आरोप लगाया है। सांसद का आरोप है कि केंद्र सरकार की सहमति से डीडीए ने गुपचुप तरीके से फ्लैटों की दर बढ़ा दी। उन्होंने मामले की सीबीआई जांच कराने के लिए पत्र लिखा है। वहीं चेतावनी दी है कि मामले की जांच कराकर दोषियों को सजा नहीं दिलाई गई तो आम आदमी पार्टी कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगी।
संजय सिंह ने रविवार को प्रेस कान्फ्रेंस में आरोप लगाया कि इस बात की जानकारी केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी से लेकर प्रधानमंत्री तक को थी। उन्होंने कहा कि एक तरफ तो भाजपा व शहरी विकास मंत्री हरदीप पुरी गली-गली घूमकर गरीबों को घर देने और कच्ची कॉलोनियों को नियमित कराने का ढोल पीटते हैं।
'डीडीए घोटाला करती है'
उन्होंने कहा कि केंद्रीय मंत्री के अधीन आने वाली डीडीए घोटाला करती है। सांसद ने बताया कि सितंबर 2014 में डीडीए के यह योजना निकाली थी। इसके तहत एक लाख रुपये सालाना से कम आमदनी वाले लोगों को डीएलएफ और डीडीए की साझेदारी से तैयार किए गए ईडब्ल्यूएस कैटेगरी के फ्लैट दिए जाने थे। यह 6,90,000 से लेकर 11,00,000 रुपये तक आसान किस्तों में उपलब्ध कराए जाने थे। इसके पर्चे में साफ लिखा था कि फ्लैट बन कर तैयार हो चुके हैं। इसके बावजूद समय पर फ्लैट नहीं दिए गए।
सांसद का आरोप है कि बाद में डीडीए और डीएलएफ की सांठगांठ से एक समझौता हुआ और फ्लैट के रेट बढ़ा कर 19 से 24 लाख कर दिए गए। जब इसके खिलाफ प्रदर्शन हुआ तो दबाव में डीडीए ने 19 लाख के फ्लैट की कीमत घटाकर 15 लाख कर दी।
भाजपा से पूछे प्रश्न
- जब फ्लैट बनकर तैयार थे, तो किस आधार पर कीमत बढ़ाई गई।
- डीडीए ने 772 ईडब्ल्यूएस कोटे के आवेदकों को भ्रम में क्यों रखा।
- भाजपा ने डीएलएफ के साथ मिलकर क्या डील की।
- भाजपा इस घोटाले की जांच कब तक कराएगी।
पुरी ने खारिज किया संजय सिंह का आरोप
उन्होंने कहा कि जिन फ्लैटों को लेकर डीडीए पर आरोप लगाया गया है, उन्हें डीएलएफ ने बनाया है। डीडीए की शर्तों के तहत जब कोई निजी डेवलपर कोई हाउसिंग कॉलोनी तैयार करता है तो उसे अनिवार्य रूप से ईडब्ल्यूएस फ्लैट्स भी बनाने पड़ते हैं। निजी बिल्डरों द्वारा 50 फीसदी ईडब्ल्यूएस फ्लैट सीपीडब्ल्यूडी के प्राइस इंडेक्स के तहत बनाकर डीडीए को सौंपे गए हैं। फ्लैट के लिए खरीदारों से ली जा रही कीमत निर्माण में हुए वास्तविक खर्च पर आधारित है।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 में ईडब्ल्यूएस फ्लैट के लिए तैयार ब्रोशर में दी गई कीमत संभावित थी। 2019 में फ्लैट्स की कीमतों को लेकर विस्तार से आकलन किया गया और कीमतों में हुई बढ़ोतरी के संबंध में खरीदारों को सूचित किया गया। उन्होंने कहा कि ईडब्ल्यूएस कोटे के फ्लैट का आकार भी अलग-अलग है और इनमें पार्किंग भी शामिल है। फ्लैट की कीमतें बढ़ने के बाद खरीदारों की अर्जी पर डीडीए ने फ्लैट की कीमतों पर लगने वाले ब्याज को न वसूलने का निर्णय लिया। इससे फ्लैट्स की कीमतें कम हुईं। उन्होंने कहा कि इस श्रेणी के कुछ खरीदारों को फ्लैट आवंटित भी कर दिए गए हैं।