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साईंबाबा की गिरफ्तारी ने बढ़ाई डीयू प्रशासन की मुश्किलें

Thu, 15 May 2014 05:07 PM IST
Updated Thu, 15 May 2014 05:07 PM IST
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Saibaba arrest creating problems for DU administration

दिल्ली विश्वविद्यालय के रामलाल आनंद कॉलेज में अंग्रेजी के सहायक प्रोफेसर डॉ. जीएन साईंबाबा की गिरफ्तारी से विवि प्रशासन की मुश्किलें बढ़ती दिख रही हैं।

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विश्वविद्यालय के कुलपति पर प्रोफेसर साईंबाबा की गिरफ्तारी को लेकर चुप्पी साधने की वजह से चारों ओर से सवाल उठ रहे हैं। सभी को इस बात का आश्चर्य है कि आखिर विश्वविद्यालय प्रशासन इस गिरफ्तारी को लेकर मौन क्यों है।
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सहायक प्रोफेसर के समर्थक विश्वविद्यालय परिसर में बिना प्रशासन को सूचना दिए हुई गिरफ्तारी को लेकर कुलपति के खिलाफ मोर्चा खोल रहे हैं। उधर, जस्टिस सच्चर ने भी सहायक प्रोफेसर की गिरफ्तारी को लेकर सवाल खड़े किए हैं।

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चौंकाने वाला है डीयू प्रशासन का रवैया

Saibaba arrest creating problems for DU administration

बुधवार को दिल्ली विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (डूटा) सहित जेएनयूए और आईपी यूनिवर्सिटी शिक्षक संघ का प्रतिनिधित्व करने वाले लोगों ने संयुक्त रूप से प्रेस कांफ्रेंस का आयोजन कर अपनी बात रखी। प्रेस कांफ्रेंस में डॉ. साईंबाबा की पत्नी एएस वसंथा भी शामिल थीं। मौके पर उन्होंने कहा कि डॉ साईंबाबा ने ऑपरेशन ग्रीन हंट का विरोध किया था।

जिससे सुरक्षा एजेंसियां उनके खिलाफ हो गई। उन्होंने बताया कि फिलहाल गढ़चिरौली की पुलिस सहायक प्रोफेसर से पूछताछ कर रही है। उन्होंने बताया कि छतीसगढ़ पुलिस भी साईंबाबा से पूछताछ कर सकती है। वहीं सेवानिवृत्त जस्टिस राजेंद्र सच्चर ने गिरफ्तारी पर सवाल उठाया।

उन्होंने कहा कि जिस तरह से उन्हें गिरफ्तार किया गया, वह कानूनन सही नहीं है। वहीं, डूटा अध्यक्ष डॉ नंदिता नारायण और आईपी विवि शिक्षक संघ के पूर्व अध्यक्ष रघुराम ने इस मामले में कुलपति की चुप्पी को आश्चर्यजनक बताया। उन्होंने कहा कि विवि प्रशासन को इस मामले में हस्तक्षेप करना चाहिए था। उधर फिल्म निर्माता संजय काक ने भी गिरफ्तारी पर सवाल खड़े किए।

निलंबन की मांग को लेकर प्रदर्शन

Saibaba arrest creating problems for DU administration

सूत्रों के अनुसार प्रो. साईंबाबा मामले की जांच कर रही एजेंसियों को उनके कंप्यूटर से कुछ ऐसे ई-मेल और जानकारियां मिली हैं जिनसे ये पता चलता है कि प्रोफसर ने कम से कम एक और जेएनयू के विद्यार्थी को नक्सली के रूप में छत्तीसगढ़ में काम करने के लिए रिक्रूट किया था।

साईंबाबा ने अपने पत्राचार में जिस गोस्वामी नाम के विद्यार्थी का जिक्र किया है वो कभी जेएनयू के एक विद्यार्थी संगठन डेमोक्रेटिक स्टूडेंट्स यूनियन (डीएसयू) का सदस्य हुआ करता था।

इन सब खबरों के चलते सहायक प्रोफेसर डॉ साईंबाबा के निलंबन की मांग को लेकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् (एबीवीपी) बृहस्पतिवार को कैंपस (डीयू) में सड़क पर उतरी। एबीवीपी के राष्ट्रीय मंत्री रोहित चहल की ओर से नॉर्थ कैंपस में विरोध प्रदर्शन की घोषणा हुई थी।

पिछले साल भी पकड़ा गया था एक JNU छात्र

Saibaba arrest creating problems for DU administration

साईंबाबा से चल रही जांच से संबं‌धित एक सीनियर ऑफिसर ने नाम न बताने की शर्त पर बताया कि उन्हें प्रोफेसर और स्टूडेंट्स के बीच के कुछ ऐसे लेटर मिले हैं जिसमें प्रोफेसर छत्तीसगढ़ के जंगलों की कठिन जीवन के बारे में बता रहे हैं।

इनमें से कुछ लेटर प्रोफेसर ने सीपीआई(एम) के उच्च पदाधिकारियों को लिखे थे और शहरी क्षेत्रों से ज्यादा से ज्यादा लोगों को रिक्रूट करने की सलाह दी थी। पिछले साल भी महाराष्ट्र पुलिस ने एक जेएनयू के स्टूडेंट हेम मिश्रा को गढ़चिरौली से गिरफ्तार किया था।

वो भी डीएसयू का सदस्य था। हेम मिश्रा से ही पूछताछ के दौरान प्रोफेसर साईंबाबा का नाम सामने आया था। तब महाराष्ट्र पुलिस ने साईंबाबा से उनके दिल्ली स्थित घर पर पूछताछ की थी।

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