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अरावली की वादियों के लिए बनेगा सुरक्षा कवच, सुरक्षा मॉडल पर काम शुरू

Fri, 09 Sep 2016 12:16 AM IST
सिद्धार्थ शाह/अमर उजाला, फरीदाबाद
सिद्धार्थ शाह/अमर उजाला, फरीदाबाद Updated Fri, 09 Sep 2016 12:16 AM IST
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Safety shield for litigants will Aravalli, began work on the security model
अरावली में हो रहा खनन - फोटो : फाइल फोटो

अरावली की खूबसूरती को बनाए रखने के लिए सुरक्षा मॉडल पर काम शुरू हो गया है। इसके तहत एक ऐसा सुरक्षा कवच तैयार किया जा रहा है, जिससे पौधों को ट्री शेप देने के साथ हरियाली को पशुओं से बचाने का कार्य किया जाएगा। 

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वन विभाग ने अरावली की वादियों के संरक्षण के लिए जो योजना तैयार की है, उसमें सबसे ज्यादा जोर भूजल स्तर को बढ़ाने पर दिया गया है। 

खास बात यह है कि अरावली के आसपास बसे गांवों के लोगों का इस योजना को अंजाम देने में खूब सहयोग मिल रहा है। 

दिल्ली एनसीआर क्षेत्र में बढ़ते प्रदूषण के बीच अरावली क्षेत्र में पर्यावरण का संतुलन बनाए रखने को यह कवच कारगर साबित होगा। इस प्लान से न केवल अरावली की हरियाली बढ़ेगी बल्कि वन्य क्षेत्र में जीवों की घटती संख्या पर भी काबू पाया जा सकेगा। 
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वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक अरावली की वादियों में लक्कड़बघ्घा, तेंदूए, हिरण, खरगोश, नीलगाय समेत वन्य जीवों की संख्या पहले बहुत ज्यादा होती थी, जो घटती जा रही है। 
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करीब 50 हेक्टयर भूमि में वन क्षेत्र को विकसित करने से वन्य जीवों की तादाद भी बढ़ेगी। अरावली की वादियों के लिए तैयार किया जाने वाला सुरक्षा कवच एक समय बाद फॉरेस्ट मॉडल का रूप ले लेगा। जहां की प्राकृतिक खूबसूरती हर किसी को अपनी तरफ खींचने का काम करेगी। 

ऐसे बनेगा सुरक्षा मॉडल
वन विभाग की ओर से वित्तीय वर्ष के पहले चरण में 20 से 25 हेक्टेयर भूमि की बाउंड्री तैयार की जाएगी। जहां पर पौधों को सपोर्ट देकर उन्हें पेड़ बनाया जाएगा। बारिश के पानी से भूजल स्तर बढ़ाने के लिए जगह-जगह ट्रेंच बनाई जाएंगी, ताकि बारिश का पानी बर्बाद न हो। पौधे जब वृक्ष का रूप लेने लगेंगे तो उनके सुरक्षा कवच को हटा दिया जाएगा। 


अरावली एक नजर में
अरावली विश्व की सबसे प्राचीन पर्वत श्रृंखला है, जो  राजस्थान से दिल्ली एनसीआर तक फैली हुई है। अवैध खनन और पेड़ों की कटाई होने से अरावली का आस्तित्व खतरे में पड़ता जा रहा है।

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