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सब्जी मंडी थाना: कटोरा और थाली की चोरी पर 165 साल पहले हुई थी पहली प्राथमिकी, तब पंजाब का हिस्सा थी दिल्ली!

Mon, 19 Oct 2026 05:58 AM IST
दुष्यंत शर्मा पुरुषोत्तम वर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली
पुरुषोत्तम वर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Mon, 19 Oct 2026 05:58 AM IST
सार

चोरी हुए सामान में देगची, कटोरा, आइसक्रीम बनाने का सांचा और महिलाओं के कुछ कपड़े शामिल थे। इनकी कुल कीमत 45 आने यानी करीब 2.80 रुपये थी।

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Sabzi Mandi Police Station: The first FIR was registered 165 years ago over the theft of a bowl and a plate
सब्जी मंडी थाना... - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

आज से 165 साल पहले, 18 अक्तूबर 1861 को दिल्ली के सब्जी मंडी थाने में घरेलू सामान की चोरी की पहली प्राथमिकी दर्ज की गई थी। चोरी हुए सामान में देगची, कटोरा, आइसक्रीम बनाने का सांचा और महिलाओं के कुछ कपड़े शामिल थे। इनकी कुल कीमत 45 आने यानी करीब 2.80 रुपये थी।

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दिल्ली पुलिस के इतिहास से जुड़ी इस पहली प्राथमिकी को आज भी सुरक्षित सहेज कर रखा गया है। उस दौर में महज 2.80 रुपये के सामान की चोरी पर प्राथमिकी दर्ज हो गई थी, लेकिन आज लाखों रुपये की चोरी के मामलों में भी प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए पीड़ितों को मशक्कत करनी पड़ती है।
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दिल्ली पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि 18 अक्तूबर 1861 को पहली प्राथमिकी दर्ज की गई थी। यह मामला सब्जी मंडी थाने के अधिकार क्षेत्र में आने वाले इलाके में 45 आने के घरेलू सामान की चोरी से जुड़ा था। उस समय दिल्ली, पंजाब प्रांत का हिस्सा थी। यहां उर्दू और फारसी भाषाएं प्रचलित थीं और अदालतों तथा पुलिस के दस्तावेजों में इसी का इस्तेमाल किया जाता था।
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चौकीदार को साथ लेकर शिकायत करने गए थे मैउद्दीन : मैउद्दीन जब प्राथमिकी दर्ज कराने सब्जी मंडी थाने पहुंचे तो उनके साथ इलाके का चौकीदार भी था। उस समय पुलिस के पास जाने में लोगों को डर लगता था और पढ़े-लिखे लोगों की संख्या भी कम थी।

दिल्ली पुलिस में ऐतिहासिक लेखों और दस्तावेजों को सुरक्षित रखने वाले एसीपी राजेंद्र सिंह कलकल ने बताया कि पीड़ित ने किस तरह और किन परिस्थितियों में शिकायत दर्ज कराई थी, इसकी जानकारी देने वाले दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं। हालांकि, कुछ दस्तावेजों से पता चलता है कि उस समय किसी वारदात या घटना की सूचना इलाके के चौकीदार को दी जाती थी।


चौकीदार कुछ पढ़ा-लिखा होता था या उसे इस तरह की जानकारी होती थी। मैउद्दीन कटरा शीश महल के चौकीदार को अपने साथ लेकर थाने गए थे। उस समय प्राथमिकी महज दो पंक्तियों में दर्ज की जाती थी। इसमें केवल घटना की सूचना दी जाती थी, विस्तृत ब्योरा नहीं लिखा जाता था। पुलिस स्थानीय मुखबिरों से मिली जानकारी के आधार पर ही एक-दो दिन में मामलों को सुलझा लेती थी।

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