रूपेश हत्याकांड: जांच में सामने आया चौंकाने वाला सच, पुलिस की लापरवाही उजागर
देश की राजधानी दिल्ली के न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी (एनएफसी) के तैमूर नगर में युवक रूपेश बिसोया की हत्या मामले में स्थानीय एनएफसी थाना पुलिस की भारी लापरवाही सामने आई है।
मामले में एनएफसी थानाध्यक्ष सुशील कुमार व तैमूर नगर डिवीजन अफसर राजेन्द्र मीणा को मंगलवार शाम को लाइन हाजिर कर दिया गया। बीट अफसर हवलदार अजय, सिपाही सुरेंद्र व सिपाही हरीचंद को निलंबित कर दिया गया है।
दूसरी ओर हत्याकांड के दो दिन बाद भी हत्यारों का सुराग हाथ नहीं लगा है। पुलिस की कई टीमें दिल्ली व नोएडा में दबिश दे रही हैं। ड्रग्स बेचने वाले फारूक व उसकी मां भी फरार है।
दक्षिण-पूर्व जिला डीसीपी चिन्मय बिश्वाल ने बताया कि रूपेश हत्याकांड में स्थानीय थाना पुलिस की भारी लापरवाही सामने आई है। तैमूर नगर झुग्गी बस्ती में खुलेआम ड्रग्स बिक रही थी।
इसको लेकर दक्षिण-पूर्व जिले के अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त-एक की देखेरख में जांच का आदेश दिया गया था। इसके बाद यह कार्रवाई की गई। इन पर आरोप है कि खुले आम ड्रग्स बेच रहे ड्रग्स सप्लायरों पर कोई कार्रवाई नहीं की।
आरोपियों ने घोषित बदमाश पर तानी थी पिस्तौल
दिल्ली पुलिस अधिकारियों के अनुसार रूपेश की हत्या करने वाले आरोपियों ने कुछ दिन पहले इलाके के घोषित बदमाश मोहम्मद बाबू पर भी पिस्टल तान दी थी। आरोपी नशे का इजेक्शन लगा रहे थे।
मोहम्मद बाबू ने उन्हें टोक दिया था। टोकने पर ही आरोपियों ने मोहम्मद बाबू पर पिस्टल तान दी थी। रूपेश की हत्या वाले दिन दीपक नाम के युवक ने मोहम्मद बाबू की गर्दन पर चाकू मार दिया था। मोहम्मद बाबू अस्पताल में भर्ती था। उसे एक अक्तूबर को अस्पताल से छुट्टी मिली है।