आता है और दहशत फैलाता है अफवाह का हौव्वा, 18 साल पहले मंकी मैन, 2 साल पहले चोटी कटवा अब बच्चा चोर
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इन दिनों बच्चा चोर गिरोह के सक्रिय होने की अफवाह के चलते निर्दोष राहगीरों व मानसिक रूप से बीमार व्यक्तियों की पिटाई के मामले सामने आ रहे हैं। ऐसा पहली बार नहीं हुआ है, जब अफवाहों से आमलोग और पुलिस-प्रशासन परेशान हुए हों। खास बात तो ये भी है कि इन अफवाहों के फैलने का एक खास समय भी होता है। आगे हमारी इस स्टोरी में जानिए क्या है अफवाह का हौव्वा और किस खास समय में फैलती हैं अफवाहें...
इससे पहले वर्ष 2001 में ब्लैक मंकी के हमले और वर्ष 2017 में चोटी कटने की अफवाह व घटनाओं से लोगों और पुलिस-प्रशासन को उलझा कर रख दिया था। अब, बच्चा चोरी की अफवाह से हो रहे हमले की घटनाएं गंभीर रूप लेती जा रही हैं।
गौतमबुद्ध नगर में अब तक बच्चा चोरी से जुड़े आठ मामले सामने आ चुके हैं। लगातार बढ़ते मामलों से पुलिस और प्रशासन अलर्ट हो गया है। मामले में तत्काल कार्रवाई कर आरोपियों को पकड़ा जा रहा है।
वहीं विशेषज्ञों की मानें तो बच्चा चोर गिरोह के सोशल साइट पर वायरल हो रहे संदेशों का सिलसिला कई वर्षों से चल रहा है। हालांकि पिछले कुछ दिनों से ऐसे पोस्ट की तादाद खासी बढ़ गई है। जानकारों की मानें तो इन्हीं पोस्ट से अफवाह फैलाने में मदद मिली है।
कब फैली कौन सी अफवाह
2001 में ब्लैक मंकी या मंकी मैन- अफवाह थी कि 4 फीट का एक बंदर है जिसके बदन पर लंबे काले बाल उगे हैं और चेहरा हेलमेट से ढंका होता था। इस अफवाह ने दिल्ली-एनसीआर समेत पश्चिमी उत्तर प्रदेश में खूब हड़कंप मचाया।
2002 में मुंहनोचवा- इसके बारे में कहा जाता था कि हवा में कोई उड़ती हुई चीज है जिसमें लाइट जलती है और वह आकर लोगों का मुंह नोच देती है। कई लोगों ने तो इसके खौफ से ही छत से छलांग लगा दी थी। यह अफवाह पूर्वी यूपी व बिहार के इलाके में ज्यादा प्रभावी थी।
2015 में सिलबट्टे वाली बुढ़िया- इस में यह अफवाह थी कि लोगों की कोई सिलबट्टे से पिटाई कर देता है और पत्थर का रंग बदल जाता था। यह अफवाह भी पश्चिमी यूपी समेत दिल्ली-एनसीआर में खूब फैली थी।
2017 में चोटी कटवा- 2017 में राजस्थान से फैलनी शुरू हुई इस अफवाह से ज्यादा प्रभावित हरियाणा और पश्चिमी यूपी व दिल्ली-एनसीआर के क्षेत्र रहे। इसमें यह अफवाह फैलती थी कि कोई आता है और महिलाओं की चोटी काटकर चला जाता है। इसे लोग तमाम तरह के टोटकों से भी जोड़कर देखते थे।
मई से सितंबर के बीच ही फैलती हैं ये अफवाहें
अगर आप पिछली सभी अफवाहों पर गौर करेंगे तो पाएंगे कि ये अफवाहें मई महीने से लेकर सितंबर के बीच ही फैलती हैं। चाहे हम ब्लैक मंकी की बात कर लें या इस साल के बच्चा चोर की। इस तरह की सभी अफवाहें इन्हीं चार-पांच महीनों में फैलती हैं। हालांकि इसका कोई ठोस कारण अब तक सामने नहीं आया है।
सोशल मीडिया ने दिया बढ़ावा लेकिन पहले भी खूब उड़ी हैं अफवाहें
ब्लैक मंकी की अफवाह के समय सोशल मीडिया इतना प्रचलित नहीं था, तब भी अफवाह खूब फैली थी। इसके अलावा भी देश-प्रदेश में अलग-अलग तरह की अफवाहें समय-समय पर फैलती रहीं हैं। जिनमें कहीं भी सच्चाई नहीं होने के बावजूद लोग इन पर विश्वास करने लगते हैं।
अफवाहें और असर
- मूर्तियों के दूध पिलाने की अफवाह के बाद मंदिरों में भीड़ जुट गई थी
- नमक और चीनी महंगी होने की अफवाह के बाद लोगों ने भारी खरीदारी की थी
- सिक्के बंद होने की अफवाह पर दुकानदार ग्राहकों से चिल्लर लेने से मना करते थे
- तेदुएं के आने की अफवाह कई गांव में फैल चुकी है दहशत
पुलिस की कार्रवाई और गाइड लाइन
- लोगों से जिम्मेदार नागरिक होने के नाते सहयोग करने की अपील की
- संदिग्धों की सूचना पुलिस को देने और हमला करने वालों पर रासुका लगाने के निर्देश दिए
- आईजी मेरठ जोन आलोक सिंह ने गांव और स्कूलों में चौपाल लगाने और मुनादी से जागरूक करने के निर्देश दिए
क्या कहते हैं मनोचिकित्सक
पिछले कुछ वर्षों से बच्चों के लापता होने व उनके परिजन तक पहुंचाने के संदेश सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। इनमें कुछ सही होते हैं और कुछ बच्चों के मिल जाने के बावजूद कई वर्ष तक वायरल होते रहते हैं। इसी बीच बच्चों के अंग निकालने, भीख मंगवाने आदि के मैसेज वायरल होते हैं। लोग इन संदेशों की सच्चाई जाने बिना ही अपने बच्चों के प्रति चिंतित हो जाते हैं। ऐसे में गली से निकलते समय जब वह किसी संदिग्ध को देखते हैं या फिर किसी भीड़ को उन्हें पीटता देखते हैं तो वह आक्रोशित होकर उन पर हमला करने लगते हैं। ऐसे में संयम रखें और जल्दबाजी में कोई निर्णय न करें मन में यह भावना लेकर आएं कि कोई निर्दोष तो नहीं पिट रहा। - डॉ. अभय सिंह तोमर, मनोचिकित्सक