कब खुलेगी सरकार की नींद?: कागजों में साफ हो रही दिल्ली की हवा, Grap-1 के नियमों का खुलेआम उल्लंघन; देखें Video
वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने हवा में निरंतर बढ़ रहे प्रदूषण के मद्देनजर दिल्ली समेत पूरे एनसीआर में ग्रेडेड रिस्पांस सिस्टम यानी ग्रैप का पहला चरण लागू है।
विस्तार
राजधानी दिल्ली में वायु गुणवत्ता खराब होने के साथ ही ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (ग्रैप) का पहला चरण लागू है। ऐसे में दिल्ली सरकार के साथ तमाम एजेंसियां वायु प्रदूषण की रोकथाम करने के लिए तमाम दावे कर रही हैं। लेकिन, दिलचस्प है कि यह नियम-कायदे जमीनी स्तर पर लागू होते नहीं दिख रहे हैं।
प्रदूषण के हॉटस्पॉट में ग्रैप के नियमों की अनदेखी की जा रही है। निर्माण स्थलों के बाहर न तो कोई एंटी स्मॉग गन का इस्तेमाल हो रहा है और न ही धूल को नियंत्रित करने के लिए पानी का छिड़काव किया जा रहा है। आलम यह है कि यहां की सड़कें धूल-मिट्टी से पटी हैं। इससे लोगों को मजबूरन इसके बीच से जाना पड़ रहा है। अमर उजाला ने ऐसे की कुछ हॉटस्पॉट की पड़ताल की। जहां खुले तौर पर ग्रैप के नियमों को धज्जियां उड़ती दिखीं।
दिल्ली ही नहीं एनसीआर में भी उड़ रही नियमों की धज्जियां
प्रदूषण विभाग ने नोएडा-ग्रेनो में ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (ग्रैप) का पहला चरण लागू होने के बाद मंगलवार को प्रदूषण फैलाने वालों पर कार्रवाई की। नोएडा में आठ व ग्रेनो में दो स्थानों पर 50-50 हजार रुपये जुर्माना लगाकर कुल पांच लाख रुपये वसूले गए। सभी जगहों पर मानकों का उल्लंघन कर काम कराया जा रहा था।
नोएडा-ग्रेनो एक्सप्रेसवे के किनारे सड़क निर्माण कार्य के दौरान प्राधिकरण के ठेकेदार पर 50 हजार व फ्यूटेक गेटवे सेक्टर-175 के सामने मुख्य रोड के किनारे डिवाइडर पर चल रहे निर्माण कार्य के दौरान प्रदूषण फैलाने पर 50 हजार का जुर्माना लगाया गया।
ग्रैप के पहले चरण में इन नियमों का करना होता है पालन
ग्रैप के पहले चरण में खासतौर पर ऐसे उपाय किए जाते हैं, जो सर्दी के मौसम में प्रदूषण रोकने में कारगर हों। इनमें निर्माण स्थलों पर धूल खत्म करने के लिए पानी का छिड़काव, सड़कों की नियमित सफाई, बीएस-3 पेट्रोल और बीएस-4 डीजल वाहनों की सख्त जांच, बेहतर यातायात प्रबंधन के साथ ही उद्योग, बिजली संयंत्रों और ईंट-भट्टा, हॉट मिक्स प्लांट से उत्सर्जन को नियंत्रित करना शामिल है। दिल्ली सरकार एक जनवरी तक पटाखे जलाने, रखने और बनाने पर पहले ही रोक लगा चुकी है।
इन चीजों का रखें ध्यान
-अपने वाहनों के इंजनों को ठीक से ट्यून करके रखें।
-वाहनों में टायर का उचित दबाव बनाए रखें।
-अपने वाहन का पीयूसी प्रमाणपत्र रखें।
-लाल बत्ती पर इंजन बंद कर दें।
-वाहन के प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए हाइब्रिड वाहनों या ईवी को प्राथमिकता दें।
-खुले स्थानों पर कूड़ा-कचरा न फैलाएं व निस्तारित न करें।
-311 एप, ग्रीन दिल्ली एप, समीर एप आदि के माध्यम से वायु प्रदूषणकारी गतिविधियों की रिपोर्ट करें।
-अधिक से अधिक पौधे लगाएं।
-त्योहारों को पर्यावरण अनुकूल तरीके से मनाएं-पटाखों से बचें।
-10-15 वर्ष पुराने डीजल/पेट्रोल वाहन न चलाएं।
ग्रैप क्या है?
पिछले कुछ वर्षों में देश की राजधानी दिल्ली अक्तूबर-नवंबर के महीनों में गैस चैंबर बनती रही है। इस समय पर हवा की गुणवत्ता बताने वाला वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 'खतरनाक' श्रेणी में बना रहता है जिससे लोगों के बीमार होने का भी खतरा बना रहता है। इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए 2 दिसंबर 2016 में एमसी मेहता बनाम भारत संघ के मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया था। आदेश के अनुसार, विभिन्न वायु गुणवत्ता सूचकांक के तहत कार्यान्वयन के लिए ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान यानी ग्रैप तैयार किया गया है।
राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता सूचकांक में एक्यूआई की कई श्रेणियों में शामिल किया गया है जिसमें मध्यम और खराब, बहुत खराब और गंभीर शामिल हैं। 'गंभीर+ या आपातकालीन' की एक नई श्रेणी बाद में जोड़ी गई है। पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को पर्यावरण प्रदूषण (रोकथाम और नियंत्रण) प्राधिकरण के जरिए ग्रैप के कार्यान्वयन के लिए अधिसूचित किया गया है।
ग्रैप के चार चरण
-ग्रैप को दिल्ली एनसीआर में प्रतिकूल वायु गुणवत्ता के 4 विभिन्न चरणों के हिसाब से बांटा गया गया है। ग्रैप का चरण-l उस वक्त लागू होता है, जब दिल्ली में AQI का स्तर 201-300 के बीच होता है।
-ग्रैप का दूसरा चरण उस परिस्थिति में प्रभावी होता है, जब राजधानी में वायु गुणवत्ता सूचकांक 301-400 के बीच 'बहुत खराब' मापा जाता है। चरण II के तहत कार्रवाई एक्यूआई के 301-400 के अनुमानित स्तर तक पहुंचने से कम से कम तीन दिन पहले शुरू की जाती है।
-चरण III 'गंभीर' वायु गुणवत्ता के बीच लागू किया जाता है। इस वक्त दिल्ली में एक्यूआई 401-450 के बीच होता है। ग्रैप के चरण III के तहत कार्रवाई एक्यूआई के 400 से अधिक के अनुमानित स्तर तक पहुंचने से कम से कम तीन दिन पहले शुरू की जाती है।
-ग्रैप कार्य योजना का अंतिम और चरण IV 'गंभीर +' वायु गुणवत्ता की परिस्थिति में लागू किया जाता है। इस दौरान दिल्ली में AQI स्तर 450 से ज्यादा होना चाहिए। दूसरे और तीसरे चरण की तरह चरण IV के तहत कार्रवाई एक्यूआई के 450 के अनुमानित स्तर तक पहुंचने से कम से कम तीन दिन पहले ही शुरू की जाती है।
एप पर कर सकते हैं शिकायत
प्रदूषणकारी गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए 311 एप, ग्रीन दिल्ली एप, समीर एप और ऐसे अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर शिकायतों के निवारण के लिए त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। आयोग स्थिति पर बारीकी से नजर रखेगा।
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