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आरटीआई का प्राधिकरण ने नहीं दिया जवाब, एक लाख का जुर्माना ठोका
ब्यूरो, अमर उजाला, नोएडा
Updated Tue, 07 Aug 2018 11:19 PM IST
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आरटीआई का जवाब ना देना नोएडा प्राधिकरण के जन सूचना अधिकारी को महंगा पड़ गया है। राज्य सूचना आयोग में शिकायत करने पर अधिकारी पर एक लाख का जुर्माना ठोका गया है। साथ ही डीएम को आदेश दिए गए हैं कि आरटीआई का जवाब न देने वाले अधिकारी से जुर्माना वसूल कर ट्रेजरी में जमा कराया जाए।
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समाजसेवी सेवानिवृत्त कैप्टन विकास गुप्ता ने नोएडा प्राधिकरण में आरटीआई डालकर पूछा था कि जो अधिकारी डेपुटेशन पर प्राधिकरण में ज्वाइन करते हैं, वह बाद में मर्ज हो जाते हैं। इस बारे में प्राधिकरण अपनी पॉलिसी बताए। बार-बार पूछने पर भी प्राधिकरण ने कोई जवाब नहीं दिया।
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इसकी शिकायत राज्य सूचना आयोग को दी गई। आयोग ने चार आरटीआई का जवाब न देने पर अधिकारी को दोषी मानते हुए 25-25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया। आदेश दिया कि 1 लाख का जुर्माना वसूला जाए। साथ ही प्राधिकरण को निर्देश दिया कि वह आरटीआई का जवाब भी दें।
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विकास गुप्ता ने बताया कि फरवरी 2016 में विभिन्न आरटीआई के माध्यम से नोएडा अथॉरिटी से जवाब मांगा गया था। कार्मिक विभाग से इंजीनियरिंग कैडर में वरिष्ठता सूची व वरिष्ठता निर्धारण समिति की जानकारी मांगी थी। पूछा था कि बाहर से आए कर्मचारियों को प्राधिकरण में समाहित करने हेतु पॉलिसी बताई जाए।
डेपुटेशन पर आए प्रोजेक्ट मैनेजर शमाकांत श्रीवास्तव व एससी मिश्रा को किस पॉलिसी के तहत प्राधिकरण में समाहित किया गया। अगर समाहित किया गया है तो नियम कहता है कि वरिष्ठता का क्रम दो पद पीछे होना चाहिए लेकिन ऐसा न करके इन्हें पदोन्नति भी मिली।
बार-बार अपील करने के बाद भी प्राधिकरण ने इसका जवाब नहीं दिया। शिकायत पर राज्य सूचना आयोग ने तत्कालीन जन सूचना अधिकारी/अधीक्षक(कार्मिक) पर एक लाख रुपये अर्थ दंड लगाया है। जिला अधिकारी गौतमबुद्ध नगर को उपरोक्त अधिकारियों के वेतन से एक लाख रुपये काटकर लेखागार में जमा कराने का आदेश दिया है।