चंद्रमोहन की लव स्टोरी के 6 अहम राज
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
प्रेमिका के लिए अपनी मौत का झूठा नाटक रचने वाले आरटीआई कार्यकर्ता चंद्रमोहन शर्मा ने पुलिस पूछताछ में कई अहम राज खोले हैं। चंद्रमोहन ने बड़ी चालाकी से पूरी साजिश रची लेकिन आखिरकार वह फंस ही गया।
चंद्रमोहन ने जिस व्यक्ति को कार में जिंदा जलाया था, पुलिस उसकी तलाश में बुलंदशहर और सहारनपुर पहुंच गई है। पुलिस को सूचना मिली है कि वह इनमें से किसी एक जिले का रहने वाला है। उधर, एक टीम यह पता लगाने में जुटी है कि वह ग्रेटर नोएडा से पहले कहां रहता था।
सूत्रों के अनुसार, मानसिक रूप से कमजोर व्यक्ति बुलंदशहर का रहने वाला था। विक्षिप्त होने के कारण वह वहां से आ गया था। परिवार के लोग भी उसकी बीमारी से परेशान हो चुके थे। उन्होंने एक-दो बार ही उसकी तलाश की, लेकिन कोई खबर न मिलने पर तलाश बंद कर दी गई।
चंद्रमोहन की गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने जब विक्षिप्त युवक की पहचान करने का प्रयास किया तो वहीं पास में रहने वाले एक व्यक्ति ने उसके बारे में कुछ जानकारी दी है, जिसके आधार पर पुलिस की दो टीमें बुलंदशहर और सहारनपुर गई हैं।
सूत्रों की मानें तो कुछ दिन पहले उसके परिवार के लोगों को वह ग्रेटर नोएडा में मिला था। वह उसे घर तो नहीं ले गए थे लेकिन खाना और कपड़ा देकर चले गए। पुलिसकर्मी भी गश्त के दौरान अक्सर उसे सर्दियों में कंबल आदि देते थे, लेकिन कुछ ही दिन में वह उसे फाड़ देता था।
घटना से पहले निहारता रहा बेटी का स्कूल
चंद्रमोहन का रिमांड खत्म होने से पहले पुलिस ने मामले की हर कड़ी को जोड़ने के मकसद से उसके साथ पूरे घटनाक्रम का रीक्रिएशन किया। शनिवार रात को एक बार फिर 1 मई की उस रात का पूरा घटनाचक्र घूमा। इस दौरान कड़ी दर कड़ी हर वाकये को अंजाम दिया गया। कमी थी तो बस एक कार के जलने की।
पूरी घटना की हकीकत जानने के लिए पुलिस ने उस फोन लोकेशन का भी पूरा इस्तेमाल किया, जिसे चंद्रमोहन ने अपनाया था। सोमवार दोपहर एक बजे चंद्रमोहन की रिमांड खत्म हो जाएगी।
एसपी डॉ. बृजेश कुमार सिंह का कहना है कि करीब एक घंटे 10 मिनट के घटनाक्रम के दौरान पुलिस को विदेश के मोबाइल की लोकेशन शारदा अस्पताल और नॉलेज पार्क में मिली है। ऐसे में पुलिस के लिए विदेश की गिरफ्तारी करके उससे पूछताछ करना अहम हो जाता है।
1 मई की रात करीब पौने 12 बजे चंद्रमोहन जब सेक्टर-36 की तरफ से आ रहा था तो पांच से सात मिनट तक जेपी स्कूल के सामने कार खड़ी कर कुछ मिनटों के लिए स्कूल को निहारता रहा। इस स्कूल में उसकी बेटी पढ़ती थी।
खुद तैयार किए थे फर्जी दस्तावेज
चंद्रमोहन ने घटना को अंजाम देने से पहले कंप्यूटर की मदद से खुद अपने फर्जी दस्तावेज तैयार कर लिए थे। पुलिस पूछताछ में चंद्रमोहन ने कबूल किया है कि उसने खुद फर्जी डॉक्यूमेंट्स बनाए थे।
हालांकि, पुलिस अभी इस पर पूरी तरह से विश्वास नहीं कर रही है। उसने बताया कि एजुकेशनल डोक्यूमेंट्स में उसका नाम केवल चंद्रमोहन है, जिसे बदलकर उसने नितिन शर्मा कर दिया।
पुलिस के अनुसार, आरोपी ने जिस दस्तावेज के आधार पर अपना नाम और पिता का नाम बदला था, वह उसने अपने घर पर कंप्यूटर से बनाए थे और बाजार में जाकर उनके प्रिंट लिए थे। उसके कागजों में केवल चंद्रमोहन की जगह नितिन शर्मा और पिता का नाम आरसी शर्मा किया था। बाकी सब वहीं रहने दिया गया। उसने बंगलूरू में होंडा सीएल कंपनी में नौकरी दिलाने वाले शख्स से संपर्क किया था।
उसे इस बात की भी जानकारी थी कि इंटरव्यू में कौन से सवाल पूछे जाएंगे। इंटरव्यू के दौरान उसने बताया था कि वह ग्रेटर नोएडा की होंडा सीएल कंपनी में काम कर चुका है। उसे काम की काफी जानकारी है। एसपी डॉ. बृजेश कुमार सिंह का कहना है कि चंद्रमोहन के खुलासे पर अभी पूरी तरह से विश्वास नहीं किया जा सकता। इसकी जांच के बाद ही सच्चाई पता चलेगी।
'विदेश' के पास हैं चार-पांच सिम
चंद्रमोहन के साले विदेश की गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने बुलंदशहर, नोएडा, दादरी और दनकौर क्षेत्र के कई गांवों में दबिश दी। पुलिस को पता चला है कि उसके पास चार-पांच नंबर और फोन हैं। पुलिस विदेश की गिरफ्तारी के लिए आसपास के कई जिले और गांवों में दबिश दे चुकी है, लेकिन उसका कोई सुराग नहीं लगा है।
रविवार को विदेश के एक फोन की लोकेशन नोएडा में मिली थी, जब पुलिस वहां पहुंची तो वह वहां से भाग चुका था। पुलिस को विदेश के पास अभी तक चार-पांच मोबाइल और इतने ही नंबर होने की जानकारी मिली है।
पुलिस को अंदेशा है कि इतने नंबर होने का मतलब है कि वह इस मामले से जुड़ा हुआ है। नंबरों की कॉल डिटेल खंगाली जा रही है, जिससे साफ हो जाएगा कि उसने कहां और किसे फोन किए थे।
चंद्रमोहन के घर के पास ही विदेश ने एक मकान किराये पर ले रखा था। वह भी अल्फा-दो सेक्टर में ही रहता था। उसके दो बच्चे हैं। फिलहाल उसके पास कोई काम या नौकरी नहीं थी। कुछ दिन पहले उसने ढाबा जरूर खोला था। पुलिस यह जानने में जुटी है कि कहीं चंद्रमोहन ही उसके मकान का किराया और बाकी खर्चा तो नहीं देता था।
करीब एक दशक पहले जब चंद्रमोहन ने सविता शर्मा से शादी की थी तो उस समय विदेश और उसका परिवार शादी के खिलाफ था, लेकिन अचानक सभी मतभेद दूर हो गए। उसकी चंद्रमोहन से कम और सविता से ही ज्यादा बात होती थी।
चंद्रमोहन ने अपनाया था पत्नी का 'उपनाम'
पुलिस जांच में यह बात भी सामने आई है कि चंद्रमोहन किसी और जाति का था। शादी के बाद उसने अपनी पत्नी का उपनाम अपना लिया और चंद्रमोहन शर्मा बन गया।
पति की मौत की बात सुनकर सविता शर्मा को तो कोई होश नहीं था लेकिन विदेश शुरू से ही कासना के एक परिवार के लोगों पर हत्या का आरोप लगा रहा था। काफी शोर मचाने के बाद सविता शर्मा भी ऐसा ही कहने लगी और पुलिस ने हत्या की रिपोर्ट दर्ज कर ली थी। इसके बाद से वह हत्यारोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस पर दबाव बना रहा था।
पुलिस ने बंगलूरू पुलिस से जांच कराने की अपील की है कि नितिन शर्मा के नाम से किसी बैंक में उसका खाता तो नहीं है। पुलिस को अंदेशा है कि चंद्रमोहन का खर्चा चलाने के लिए विदेश ने ही कुछ रुपये खाते में डाले होंगे।
पुलिस ने चंद्रमोहन के लाइसेंस को जब्त करने की कार्रवाई शुरू कर दी है। एसपी डॉ. बृजेश कुमार सिंह ने बताया कि चंद्रमोहन के पास लाइसेंसी हथियार है। जिसे उसने घटना से पहले ही किसी स्थान पर छिपा दिया था। पूछताछ के बाद पुलिस की एक टीम हथियार को बरामद करने के लिए उस जगह गई है।
असली सच के लिए नारको और लाई डिटेक्टर टेस्ट
मामले की सही तस्वीर सामने लाने के लिए पुलिस अब चंद्रमोहन का लाई डिटेक्टर और नारको टेस्ट कराएगी। पूछताछ में चंद्रमोहन द्वारा झूठी जानकारियां देने और पुलिस को बरगलाने के चलते यह निर्णय लिया गया है। विदेश की गिरफ्तारी के बाद उसका भी नारको टेस्ट कराया जाएगा ताकि दोनो के तथ्यों के आधार पर सच्चाई सामने आ सके।
पूछताछ में आरोपी ने कई बार पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की। पुलिस ने उन तथ्यों को मौके पर जाकर देखा तो कुछ गलत पाए गए। वह जानकारी तो दे रहा है लेकिन कभी किसी को बेकसूर बताता है तो कभी खुद को निर्दोष बताता है।
कई बार तो उसने कहा कि पुलिस उसे गलत फंसा रही है। अब पुलिस की ओर से जल्द ही अदालत में अर्जी दाखिल करके नारको और लाई डिटेक्टर टेस्ट कराने की अनुमति मांगी जाएगी। इससे पुलिस को अन्य आरोपियों के बारे में भी सटीक जानकारी मिल पाएगी।