चंद्रमोहन की शर्मनाक करतूत के 5 बड़े खुलासे
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आरटीआई एक्टिविस्ट चंद्रमोहन शर्मा ने अपनी हत्या की स्क्रिप्ट करीब सात-आठ माह पहले ही तैयार कर ली थी। चंद्रमोहन अंधा कानून फिल्म की तर्ज पर जीवन का आनंद उठाना चाहता था और दुश्मनों को जेल की हवा खिलाना चाहता था।
सूत्रों की माने तो इस कांड की साजिश दीपावली से पहले ही रच ली गई थी और दीपावली के दिन घटना को अंजाम दिया जाना था। लेकिन किरदार न मिलने के कारण उसे एक मई की रात को इस प्लान को अंजाम देना पड़ा।
फिल्म अंधा कानून में भी कुछ इसी तरह से फिल्माया गया है। फिल्म के एक किरदार द्वारा सही व्यक्ति को फसाने के लिए अपनी हत्या का नाटक कर नेता का मुखौटा पहन लेता है। जबकि उसकी हत्या के आरोप में बेकसूर व्यक्ति जेल में बंद होता है।
चंद्रमोहन सामाजिक गतिविधियों में भाग लेता था। इसी दौरान वह पड़ोस में रहने वाली युवती के संपर्क में आया और दोनों में दोस्ती हो गई। चंद्रमोहन और युवती के बीच मोबाइल पर मैसेज के जरिए बात होने लगी। एक दिन चंद्रमोहन का फोन घर पर रह गया और अचानक सविता शर्मा की मेसेज पर नजर पड़ गई।
इस पर वह भड़क गई और पड़ोस में जाकर युवती को हिदायत दी। इस बात को युवती ने चंद्रमोहन को बताया तो उसने घर में बखेड़ा खड़ा कर दिया और पत्नी को तलाक की चेतावनी तक दे दी।
दीपावली के पास अचानक उसे एक मानसिक रूप से कमजोर युवक दिखाई दिया, जिसका शारीरिक ढांचा उससे मिलता था। चंद्रमोहन ने उसकी सेवा करनी शुरू कर दी। बाद में उसे मंदिर पर रखवा दिया, जिससे किसी को कोई संदेह न हो।
निर्दोष को बनाया बलि का बकरा
अपनी मौत की साजिश में चंद्रमोहन ने एक निर्दोष को मोहरा बना दिया। 1 मई 2014 की रात जली हुई कार में जिस व्यक्ति का शव मिला था वह एक विक्षिप्त व्यक्ति का था, जिसे परी चौक के अंसल प्लाजा से उठाया गया था। वह कार चंद्रमोहन शर्मा की थी और पत्नी सविता शर्मा ने पांच लोगों पर हत्या का आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज कराई थी।
शुरू में ही पुलिस को यह मामला संदेहास्पद लगा। जब से चंद्रमोहन की कार में जलकर मौत होने की खबर आई, तब से लड़की भी लापता थी। लड़की भी अल्फा-टू सेक्टर की रहने वाली थी और उसका चंद्रमोहन से कथित तौर पर प्रेम प्रसंग चल रहा था। लड़की के पिता को नौ अगस्त को एक नंबर से फोन आया जिसमें उनसे कहा गया कि आपकी लड़की तिरुपति बालाजी में है आकर ले जाइए।
यह जानकारी परिजनों ने कासना पुलिस को दी। ठीक तीन बाद 12 और 13 अगस्त को अलग-अलग नंबरों से फोन आया। जांच से पता लगा कि यह नंबर बंगलूरू का है। एसएसपी ने तीन टीमें बंगलूरू भेजी। वहां वह नंबर एक पीसीओ का मिला। सीसीटीवी फुटेज में पता लगा कि पीसीओ से किसी होंडा कंपनी के कर्मचारी ने यह फोन किए। पता करने पर उस व्यक्ति को कंपनी से पकड़ा।
साले को दिया था लालच
चंद्रमोहन ने साले विदेश को लालच दिया कि उसकी मौत के बाद सविता को जीवन बीमा की रकम, होंडा कंपनी से अपनी मौत पर मिलने वाली राशि और कंपनी में नौकरी मिल इससे सविता अपना और बच्चों की जिंदगी भर देखभाल कर सकेगी। इस कारण चंद्रमोहन के साथ इस साजिश में उसका साला भी शामिल हो गया।
वारदात से दो दिन पहले चंद्रमोहन ने अंसल प्लाजा के पास एक विक्षिप्त व्यक्ति को देखा था। उसे देखते ही उसने पूरी साजिश की प्लानिंग कर ली। उसने 30 अप्रैल को तुगलपुर स्थित पेट्रोल पंप से 3 लीटर पेट्रोल लेकर गाड़ी में रख लिया। 1 मई को कंपनी के फोन से साले विदेश को फोन कर परी चौक बुलाया।
विदेश किसी तरह विक्षिप्त व्यक्ति को बाइक पर बैठाकर मौका-ए-वारदात पर ले गया। वहां दोनों ने उसे गाड़ी की अगली सीट पर बैठाकर उस पर पेट्रोल छिड़क दिया और गाड़ी में आग लगा दी। इसके बाद विदेश ने बाइक से चंद्रमोहन को परीचौक छोड़ा जहां से वह दिल्ली पहुंच कर बंगलूरू की ट्रेन पकड़ ली।
चंद्रमोहन ने साले विदेश को लालच दिया कि उसकी मौत के बाद सविता को जीवन बीमा की रकम, होंडा कंपनी से अपनी मौत पर मिलने वाली राशि और कंपनी में नौकरी मिल जाएगी। इससे सविता अपना और बच्चों की देखभाल कर सकेगी। इस कारण चंद्रमोहन के साथ इस साजिश में उसका साला भी शामिल हो गया।
कैसे दिया वारदात को अंजाम
वारदात से दो दिन पहले चंद्रमोहन ने अंसल प्लाजा के पास एक विक्षिप्त व्यक्ति को देखा था। उसे देखते ही उसने पूरी साजिश की प्लानिंग कर ली। उसने 30 अप्रैल को तुगलपुर स्थित पेट्रोल पंप से 3 लीटर पेट्रोल लेकर गाड़ी में रख लिया। 1 मई को कंपनी के फोन से साले विदेश को फोन कर परी चौक बुलाया।
विदेश किसी तरह विक्षिप्त व्यक्ति को बाइक पर बैठाकर मौका-ए-वारदात पर ले गया। वहां दोनों ने उसे गाड़ी की अगली सीट पर बैठाकर उस पर पेट्रोल छिड़क दिया और गाड़ी में आग लगा दी। इसके बाद विदेश ने बाइक से चंद्रमोहन को परी चौक छोड़ा जहां से वह दिल्ली पहुंच कर बंगलूरू की ट्रेन पकड़ ली।
चंद्रमोहन का कुछ लोगों से जमीन को लेकी विवाद चल रहा था। इसके लिए उसने कई बार लोगों को फर्जी तरीके से फंसाया कि उनके द्वारा हमला किया गया था। एक मई की रात के कांड से पहले भी उसने फर्जी तरीके से कासना कोतवाली में एक तहरीर देकर अपनी जान को खतरा बताया था। लेकिन पुलिस का दावा है कि ऐसा कुछ नहीं हुआ था।
आर्थिक तंगी से प्रेमिका से भी हुआ मोह भंग
पुलिस के मुताबिक चंद्रमोहन ग्रेटर नोएडा स्थित होंडा सीएल कंपनी में 40 हजार मासिक वेतन की नौकरी कर रहा था, लेकिन बंगलुरू स्थित होंडा सीएल में यह 9 हजार के वेतन पर ही नौकरी कर रहा था।
इस कारण आर्थिक परेशानी के चलते उसका प्रेमिका से भी मोह भंग होने लगा। इसी कारण उसने प्रेमिका के घर बार-बार फोन कर इसे तिरुपति बालाजी से ले जाने के लिए कहने लगा। प्रेमिका से छुटकारा पाकर यह नई जिंदगी जीना चाहता था।
फोन की वजह से पुलिस उस तक पहुंच गई। जानकारी के अनुसार, चंद्रमोहन ने अपनी ही आईडी से एक सिम लेकर अपनी प्रेमिका को दिया था। इसकी सूचना मिलने के बाद पुलिस नंबर को ट्रैक करने लगी और सारा भेद खुल गया।
पत्नी ने कहा पति के खिलाफ लड़ेगी लड़ाई
चंद्रमोहन की पत्नी सविता शर्मा ने बृहस्पतिवार को अमर उजाला को बताया कि चंद्रमोहन ने इस घटना को अकेले ही अंजाम नहीं दिया है। बल्कि इस घटना में तीन से चार लोग शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि चंद्रमोहन ने गलती की है और वह ऐसे लोगों का साथ नहीं देती है। इसलिए अगर जरूरत पड़ी तो पति के खिलाफ लड़ाई से भी पीछे नहीं हटेंगी।
सविता ने कहा कि वह नहीं जानती की चंद्रमोहन ने ऐसा कदम क्यों उठाया है। लेकिन जो भी किया वह काफी गलत था। उन्होंने कहा कि दो मई की सुबह जब उन्हें पता चला था कि चंद्रमोहन की मौत हो गई है तो वह उसी दिन विधवा हो गई थी।
अब उनका या बच्चों का चंद्रमोहन से कोई नाता नहीं है। अगर पुलिस अन्य आरोपियों को बचाएगी तो उनके खिलाफ वह लड़ाई लडे़गी और हर हालत में उन्हें सजा दिलाएंगी।