सम-विषम से सड़कें सूनी, मेट्रो और बसों में सफर करने वालों की मुसीबत
सम विषम को लेकर राजधानी में दो तरह के नजारे दिख रहे है। सड़क पर सफर का समय तो कम हुआ है। मगर सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था से सफर करने वालों की मुश्किल बढ़ गई है।
चूंकि कार से चलने वालों के लिए सड़कें खाली मगर बस और मेट्रो फुल हैं। टैक्सी और ऑटो चालक भी मनमाना किराया वसूलने में लगे हैं। सरकार भी मानती है बसों में भीड़ बढ़ी है, जिससे थोड़ी दिक्कत है।
आम दिनों में औसतन 38 लाख यात्रियों को ढोने वाली डीटीसी की बसों में सम विषम के दौरान रोजाना औसतन दो लाख से ज्यादा यात्रियों की संख्या बढ़ी है। मेट्रो में भी कमोवेश इतने ही यात्री रोजाना बढ़ गए हैं। इससे बस व मेट्रो में सफर करना मुश्किल हो गया है। हालांकि सरकार का कहना है कि भीड़ बढ़ी है लेकिन दिक्कत ज्यादा नहीं है।
13वें दिन राजधानी की सड़कें खाली रही
सरकार का तर्क है कि सड़क पर भीड़ कम होने से बसों का ट्रिप बढ़ा है। मेट्रो भी आम दिनों की तुलना में ज्यादा फेरे लगा रही है इससे भीड़ नियंत्रित है। हालांकि थोड़ी दिक्कत को वह मानते हैं। इसके लिए सड़क पर बसों की कम संख्या को वजह मानते हैं। जिसे बढ़ाने के लिए सरकार काम कर रही है। जल्द ही सड़कों पर नई बसें लाने का काम शुरू कर दिया जाएगा।
सम विषम योजना के 13वें दिन यानी बुधवार को राजधानी की सड़कें खाली रही। वाहन चालक भी नियम का पालन करते नजर आए। जगह-जगह वॉलंटियर भी लोगों के प्रदूषण मुक्त दिल्ली की अपील करते नजर आए।
बुधवार को सम विषम के चलते कहीं जाम की समस्या नहीं दिखा। हालांकि निर्माण कार्य के चलते कुछ इलाकों में ट्रैफिक मूवमेंट स्लो रहा मगर आम दिनों की तुलना में राहत मिली। बुधवार को 350 से ज्यादा लोगों का चालान किया गया है। अभी सम विषम के तीन दिन और बचे हैं।