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निजी ऑपरेटरों को परमिट के विरोध में रोडवेज बसों का चक्काजाम 

Tue, 13 Jun 2017 05:45 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, फरीदाबाद
ब्यूरो/अमर उजाला, फरीदाबाद Updated Tue, 13 Jun 2017 05:45 PM IST
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road block against private bus operators in faridabad

निजी ऑपरेटरों को परमिट जारी करने के विरोध में एक बार फिर कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। मंगलवार को प्रदेशभर में हरियाणा रोडवेज की बसों का चक्काजाम रहा। चक्काजाम का खासा असर फरीदाबाद में भी दिखाई दिया।

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रोडवेज बसें दिनभर डिपो में कैद रहीं। पूरे दिन यात्री बसों के लिए भटकते दिखे। डिपो में धरने पर बैठे कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर जमकर भड़ास निकाली। हरियाणा रोडवेज की बसों की हड़ताल के चलते यूपी, राजस्थान और निजी बसों में यात्रियों की भारी भीड़ रही।
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दरअसल, प्रदेश सरकार ने प्रदेशभर के 273 रूटों पर निजी बसें चलाने का फैसला लिया है। इसके लिए करीब 1600 परमिट जारी किए जाने हैं। हालांकि, सरकार का दावा है कि परमिट नए नहीं है लेकिन कर्मचारी यूनियन नए-पुराने किसी भी परमिट को मानने के लिए तैयार नहीं है।
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रोडवेज कर्मचारियों ने अप्रैल में भी तीन दिन तक रोडवेज बसों का चक्काजाम रखा था। जिसके बाद सरकार ने कर्मचारियों को बातचीत के लिए बुलाया। बैठक में सरकार ने कर्मचारियों की सभी मांगों पर सहमति दे दी थी। जिसके बाद हड़ताल खत्म हुई लेकिन एक बार फिर निजी ऑपरेटरों को परमिट देने का मामला तूल पकडने लगा है।

सोमवार देर शाम रोडवेज कर्मचारियों ने इस संबंध में हिसार में बैठक की और एक दिवसीय चक्का जाम रखने का फैसला लिया। कर्मचारियों की मानें तो प्राईवेट परमिट के माध्यम से सरकार निजीकरण को बढ़ावा दे रही है। जो रोडवेज निगम को बर्बादी की तरफ  ले जाएगा। हड़ताल को समर्थन देने के लिए अन्य विभागों के कर्मचारी भी डिपो पहुंचे। 

डिपो में कैद हुई बसें 
चक्का जाम के कारण मंगलवार को डिपो की 195 बसें कार्यशाला में खड़ी रही। बस बंद होने से यात्री दिनभर डिपो के चक्कर लगाते रहे। सबसे ज्यादा परेशानी ग्रामीण रूट और पलवल, सोहना व गुडग़ांव जाने वाले यात्रियों को हुई। हालांकि, डीटीसी और यूपी रोडवेज सहित कुछ अन्य डिपो की बस बल्लभगढ़ बस स्टैंड के बाहर से चलती रही लेकिन भीड़ के कारण लोगों को काफी परेशानी उठानी पड़ी।

हड़ताल ने तोड़ी रोडवेज प्रबंधन की कमर
निजी ऑपरेटरों को परमिट जारी करने के विरोध में 10 से 12 अप्रैल तक कर्मचारियों ने रोडवेज बसों का चक्काजाम रखा था। इससे न केवल यात्री परेशान रहे बल्कि रोडवेज प्रबंधन को भी 35 लाख रुपये से ज्यादा का आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा था। दो महीने के अंतराल में कर्मचारियों ने घंटे-दो घंटे काम का बहिष्कार कर विरोध जताया। मंगलवार को एक बार फिर बसों का चक्काजाम कर दिया। जिससे रोडवेज को फिर तकरीबन 15 लाख रुपये के नुकसान का अनुमान लगाया जा रहा है।

रोडवेज कर्मचारियों को यात्रियों की सहूलियत से कुछ लेनादेना नहीं है। आधा घंटे से दो छोटे-छोटे बच्चों के साथ डिपो में घूम रहा हूं। लेकिन बस नहीं मिल रही। पता नहीं कैसे सोहना पहुंच पाऊंगा। रोज-रोज की हड़ताल गलत है। -कृष्ण डागर, यात्री

डिपो के बाहर खड़े-खड़े एक घंटा हो गया लेकिन पलवल की तरफ बस नहीं आई। हड़ताल के कारण सारा दिन खराब हो गया। -अभय सिंह, यात्री

मुझे गुरुग्राम सुबह 10 बजे पहुंचना था लेकिन हड़ताल के कारण तीन घंटे से बस अड्डे पर ही खड़ा हूं। न सरकारी बसें हैं और न ही प्राइवेट।  -शोयब खान, यात्री

सरकार निजी ऑपरेटरों को परमिट जारी कर निजीकरण को बढ़ावा दे रही है। हमें यात्रियों की सहूलियत का पूरा ख्याल है। हड़ताल अंतिम हथियार होता है। सरकार ने हमें हड़ताल करने पर मजबूर किया है। -रविंद्र नागर, डिपो महासचिव, हरियाणा रोडवेज वर्कर्स यूनियन 


कर्मचारियों की मांग नाजायज है। फरीदाबाद डिपो को इससे नुकसान हो रहा है। यदि कर्मचारी हड़ताल की बजाए अन्य रास्तों से सरकार से बात करते तो संभवत: विभाग को आर्थिक संकट से नहीं जूझना पड़ता। -राजीव नागपाल, महाप्रबंधक, हरियाणा रोडवेज

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