दिल्ली मेट्रो में आय का खर्च लंदन और न्यूयार्क से ज्यादा, सीएसई ने जारी की रिपोर्ट
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सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट (सीएसई) की ओर से दोबारा कहा गया है कि वैश्विक स्तर पर रेल आधारित व्यवस्था में न सिर्फ विकासशील देशों के शहर, बल्कि विकसित देश भी दिल्ली मेट्रो से सस्ते और अधिक नेटवर्क विस्तार वाले हैं।
दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (डीएमआरसी) के बयान का खंडन करते हुए सीएसई ने कहा है कि उन्होंने अपने अध्ययन में यह भी पाया है कि वैश्विक स्तर पर लंदन और न्यूयॉर्क जैसी जगहों पर भी लोगों को मेट्रो पर अपनी आय का क्रमश: 13.5 और 4.6 फीसदी खर्च करना पड़ता है, जबकि दिल्ली में लोगों को मेट्रो पर अपनी आय का 14 फीसदी खर्च करना पड़ता है।
डीएमआरसी के खंडन और हालिया अध्ययन रिपोर्ट को भ्रामक बताए जाने के बाद सीएसई का यह बयान आया है। सीएसई ने कहा है कि उनकी रिपोर्ट के बाद सार्वजनिक परिवहन और व्यवस्थाओं को लेकर जो बहस छिड़ी है वह सकारात्मक है। दिल्ली ही नहीं कई छोटे शहरों में सार्वजनिक परिवहन की मांग और आपूर्ति के बीच तालमेल नहीं है।
यूबीएस के आधार पर हुआ आकलन
सीएसई ने कहा है कि वैश्विक स्तर पर वित्तीय सेवा के लिए मशहूर यूबीएस की अध्ययन रिपोर्ट के आधार पर दिल्ली मेट्रो रेल सेवा दुनिया के नौ विकासशील देशों की तुलना में दूसरी सबसे महंगी सेवा बताई गई थी, जिसमें पैमाना संबंधित शहरों में रेल आधारित व्यवस्था में 10 किलोमीटर यात्रा के लिए किराया एक यूएस डॉलर के आधे से भी कम चुकाना पड़ता है। सीएसई ने कहा कि डीएमआरसी का यह कथन गलत है कि संबंधित अध्ययन एकपक्षीय या भ्रामक है।
इन शहरों में मेट्रो पर आय का खर्च
सीएसई ने कहा है कि दिल्ली में मेट्रो इस्तेमाल करने के लिए आय का 14 फीसदी खर्च करना पड़ता है, जबकि हांगकांग में मेट्रो के लिए आय का खर्च 2.9 फीसदी है। पेरिस में यही खर्च 6.6 फीसदी है। बीजिंग में 5.3 फीसदी, सियोल में 5.2 फीसदी, शंघाई में 5.7 फीसदी, न्यूयॉर्क में 4.6 फीसदी और यहां तक कि लंदन में मेट्रो पर कुल आय का खर्च 13.5 फीसदी है।
ज्यादा किराये के बाद भी नहीं है सुविधा
किसी गंतव्य तक पहुंचने के लिए टिकट का पूरा पैसा देने के बाद बीच यात्रा में यदि कोई यात्री उतर जाता है और वह किसी दूसरे परिवहन से उसी गंतव्य तक पहुंचता है तो उसे दूसरे परिवहन को अलग से किराया अदा करना पड़ता है, जबकि दुनिया के कई शहरों में एकीकृत सार्वजनिक परिवहन नीति के कारण किसी यात्री को इंटरचेंज कर गंतव्य तक पहुंचने के लिए दोबारा पैसा नहीं अदा करना पड़ता है। ऐसे में क्या दिल्ली मेट्रो इस तरह की सुविधा यात्रियों को दे पाएगी।
सभी तरह के परिवहन की गुणवत्ता सुधरे
सीएसई ने अपने अध्ययन में पाया है कि कई अन्य अध्ययन रिपोर्ट इस बात पर मुहर लगाती हैं कि दिल्ली में प्रत्येक व्यक्ति को परिवहन पर अपनी आय का 10 से 15 फीसदी के बीच खर्च करना पड़ता है। यदि आय का 15 फीसदी न्यूनतम खर्च परिवहन पर लोगों को करना पड़े, तो दिल्ली की एक तिहाई आबादी बुनियादी परिवहन सेवा से वंचित हो जाएगी। सीएसई ने कहा है कि वह सिर्फ मेट्रो की बात नहीं कर रही, बल्कि सभी तरह के परिवहन की गुणवत्ता सुधारने और किराए को मुफीद रखने को लेकर बातचीत कर रही है, इस पर विचार किया जाना चाहिए