सर्वे में खुलासाः कोरोना के बाद भी दिल्ली मेट्रो रहेगी युवाओं की पहली पसंद, मात्र 13 फीसदी यात्री बना सकते हैं दूरी
- अधिक आय वर्ग के लगभग 13 फीसदी लोग दिल्ली मेट्रो से बना सकते हैं दूरी
- युवाओं और महिलाओं में दिल्ली मेट्रो की लोकप्रियता रहेगी बरकरार
- व्यक्तिगत वाहनों का उपयोग बढ़ने की आशंका, सड़कों पर बढ़ सकता है दबाव
विस्तार
लॉकडाउन 4.0 में केंद्र सरकार ने मेट्रो सेवा शुरू करने से इंकार कर दिया है। इसी बीच टेरी के एक सर्वे में यह तथ्य सामने आया है कि मेट्रो सेवाओं के शुरू होने पर कोरोना संक्रमण से बचने की कोशिश में लगभग 13 फीसदी यात्री मेट्रो से किनारा कर सकते हैं।
इससे मेट्रो की आय पर असर पड़ सकता है। वहीं, दूसरी ओर यात्रियों का यह फैसला दिल्ली की सड़कों पर ट्रैफिक बढ़ाने वाला साबित हो सकता है क्योंकि इसमें से ज्यादातर यात्रियों ने लॉकडाउन पीरियड के खत्म होने के बाद अपने व्यक्तिगत वाहनों को इस्तेमाल करने में रूचि दिखाई है।
सेंटर फॉर सस्टेनेबल मोबिलिटी, टेरी में परिवहन विशेषज्ञ शरीफ कमर के मुताबिक मेट्रो दिल्ली की परिवहन सेवाओं की पहचान बन चुका है। लेकिन कोरोना काल में वायरस के संक्रमण का भय सक्षम लोगों को इससे दूर कर सकता है।
लॉकडाउन 2.0 और लॉकडाउन 3.0 के बीच हुए सर्वे में यह सामने आया है कि कार या दोपहिया वाहन रखने में सक्षम 13 फीसदी लोग निजी वाहनों के इस्तेमाल पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं। इससे दिल्ली की सड़कों पर परिवहन का दबाव बढ़ सकता है। इससे वायु प्रदूषण में भी वृद्धि हो सकती है।
युवाओं को कोई असर नहीं
वहीं, दिल्ली मेट्रो के प्रेम में युवाओं की दिलचस्पी में कोई कमी नहीं आई है। युवाओं ने कहा है कि कोरोना काल के बाद भी दिल्ली मेट्रो उनका सबसे पहला पसंदीदा परिवहन माध्यम रहेगा।
18-35 वर्ष आयु वर्ग और 30-45 वर्ष के आयु वर्ग के युवाओं को लगता है कि कोरोना संक्रमण की समस्या की दृष्टि से भी यह अन्य परिवहन सेवाओं से ज्यादा सुरक्षित, सुविधाजनक और सक्षम बना रहेगा।
इससे अधिक आयु वर्ग के पुरुषों ने कोरोना काल के बाद व्यक्तिगत वाहनों में रुचि दिखाई है। विशेषज्ञों का मानना है कि कोरोना का अधिक आयु वर्ग के लोगों को अपना आसान शिकार बनाने का अब तक का अनुभव इसके पीछे काम कर रहा हो सकता है। युवाओं की तरह सर्वे में शामिल महिलाओं ने भी दिल्ली मेट्रो को ही अपना पहली पसंद बताया है।
480 लोगों के सैंपल साइज में हर आयु, आय वर्ग और महिला-पुरुष के लिंगानुपात में 55:45 का अनुपात रखा गया। सर्वे में यह तथ्य सामने आया कि मेट्रो से दूरी बनाने वाला वर्ग पांच लाख रुपये प्रति वर्ष की आय या इससे ऊपर की आय रखने वाला वर्ग है।
जबकि मेट्रो के यात्रियों में सबसे ज्यादा संख्या युवाओं, महिलाओं और सामान्य वर्ग के लोगों की है। यही वजह है कि संक्रमण की आशंका के बाद भी मेट्रो की लोकप्रियता में ज्यादा कमी की आशंका आती नहीं दिख रही है।