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कैग रिपोर्ट खुलासा : देर करने वाले सरकारी कर्मी से जुर्माना नहीं वसूला जा रहा

Tue, 14 Mar 2017 09:20 AM IST
अखिलेश कुमार/अमर उजाला, नई दिल्ली
अखिलेश कुमार/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Tue, 14 Mar 2017 09:20 AM IST
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Revealed from the CAG Report: Services not found in the deadline
cag - फोटो : अमर उजाला

दिल्ली में लोक सेवा कानून के अधिकार में निर्धारित समय सीमा में सेवाएं नहीं मिल रही हैं। सेवा मिलने में देरी पर हर्जाना वसूली का प्रावधान है लेकिन न तो देरी करने वाले सरकारी कर्मी से जुर्माना वसूला जा रहा है और न ही आवेदक को देरी के लिए हर्जाना दिया जा रहा है।

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हालत यह है कि रजिस्ट्रार सहकारी समितियाें में लेखा परीक्षक की नियुक्ति करने में 15 दिन की बजाय 686 दिन, क्रेडिट एंड थ्रिफ्ट सोसायटी के पंजीकरण में 45 दिन की जगह 799 दिन, विवाह पंजीकरण के लिए एक आवेदक को 797 दिन का इंतजार कराया। 
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ये खुलासा भारत के नियंत्रक महालेखा परीक्षक की 31 मार्च, 2016 को समाप्त हुए वित्त वर्ष की हाल ही में विधानसभा में पेश रिपोर्ट से हुआ है। छह विभागों की 25 सेवाओं की लेखा परीक्षा में यह बात सामने आई है कि 13.96 लाख आवेदन इलेक्ट्रॉनिक सर्विस लेवल एग्रीमेंट (ईएसएलए) में आए जिसमें से 3.81 लाख सेवाएं (27 फीसदी) देरी से दी गईं।
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इस हिसाब से 3.79 करोड़ रुपये की राशि सरकारी कर्मचारियों के वेतन से काटकर आवेदक को मिलनी चाहिए थी। रिपोर्ट के अनुसार सेवा देने में देरी के बदले क्षतिपूर्ति या हर्जाना भुगतान करने के लिए सक्षम अधिकारी को शक्तियां नहीं दी गई।

सेवाओं में देरी के लिए हर स्तर पर समय सीमा निर्धारित नहीं की गई। यही वजह है कि आवेदकों को क्षतिपूर्ति राशि नहीं दी गई और न ही लापरवाही करने वाले सरकारी अधिकारी या कर्मचारी पर जुर्माना हुआ। सक्षम अधिकारी को प्रोत्साहन देने व चूक करने वाले अधिकारी की पहचान के लिए कोई प्रक्रिया ही शुरू नहीं की गई।

रिपोर्ट के अनुसार पर्यटन विभाग ने भोजनालय को मंजूरी। भोजनालय को मंजूरी देने के लिए 4 दिन की समय सीमा निर्धारित है लेकिन 74 में से 36 मामलों में 47 दिन तक की देरी से प्रमाणपत्र जारी किए गए।

विभागों में लंबा कराने का ये रहा रिकार्ड

Revealed from the CAG Report: Services not found in the deadline
कैग ने बृहस्पतिवार को सदन के पटल पर अपनी रिपोर्ट रखी है। - फोटो : demo pic
अतिथिगृह को मंजूरी के लिए 15 दिन की समय सीमा निर्धारित है लेकिन मिले दोनों आवेदनों में परिसरों का निरीक्षण करने में 135 और 329 दिन की देरी हुई। रजिस्ट्रार सहकारी समिति में नई समितियों के पंजीकरण करने के लिए 90 दिन की समय सीमा निर्धारित है लेकिन दो मामलों में प्रक्रिया ही आवेदन मिलने के 35 और 95 दिन बाद शुरू की गई। इनके पंजीकरण में 135 और 257 दिन लगे।

विभागों में लंबा कराने का ये रहा रिकार्ड
1. पर्यटन विभाग ने 15 दिन में अतिथिगृह को मंजूरी मिलनी चाहिए थी लेकिन आवेदक को 354 दिन और 329 दिन का इंतजार कराया। 
2. रेस्तरां को मंजूरी देने में 21 दिन की जह 533 दिन लगा दिए।
3. उद्योग विभाग ने उद्यमी का ज्ञापन जारी करने में 60 दिन की जगह 459 दिन लगाए
4. खाद्य एवं आपूर्ति विभाग ने राशन कार्ड में नाम जोडने में 12 दिन की बजाय 129 दिन लिए
5. राजस्व विभाग ने मूल निवास प्रमाणपत्र जारी करने में 21 दिन की जगह 694 दिन, आय प्रमाणपत्र में 580 दिन, जन्म प्रमाणपत्र बनाने का आदेश देने में 30 दिन की जगह 638 दिन और जाति प्रमाणपत्र में 609 दिन लगाए

फैक्ट फाइल: 
1. दिल्ली में 36 विभागों के 361 सेवाएं लोक सेवा कानून के अधिकार कानून में अधिसूचित हैं। 
2. अधिनियम में देरी से देने वाली सेवाओं के लिए आवेदक को दैनिक 10 और अधिकतम 200 रुपये क्षतिपूर्ति देनी होती है।
3. लेखा परीक्षण में शामिल छह विभागों में कहीं भी हेल्प डेस्क नहीं लगाया गया।
4. सेवाओं में ही देरी नहीं की गई बल्कि मिले आवेदनों को अपलोड भी नहीं किया गया और कुछ अधूरी व गलत लोड कर दी गईं। 
5. 14 अगस्त, 2014 के बाद ईएसएल में कोई नई सेवा जोड़ने की कोशिश नहीं की गई।
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