JNU बवालः वीसी को हटाने से शांत हो जाएगा छात्रों का गुस्सा, दिल्ली पुलिस से कर रहे माफी की मांग
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय (जेएनयू) के छात्रों पर हुई हिंसक वारदात के बाद उठा तूफान अब राष्ट्रपति भवन तक पहुंच गया है। जेएनयू छात्रों के साथ आज गुरुवार को दिल्ली विश्वविद्यालय के कई कॉलेजों के छात्रों ने प्रदर्शन किया और राष्ट्रपति भवन तक मार्च किया। छात्रों की मांग है कि जेएनयू के वीसी एम. जगदीश कुमार को उनके पद से तत्काल हटाया जाए क्योंकि छात्रों का मानना है कि हॉस्टलों में छात्रों के साथ हुई हिंसक घटना प्रशासन की सहमति के बिना नहीं हो सकती। छात्रों ने दिल्ली पुलिस से भी अपना कर्तव्य न पूरा कर पाने के लिए माफी की मांग की है।
वहीं, एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक यह भी स्पष्ट हो गया है मानव संसाधन मंत्रालय भी वीसी एम जगदीश कुमार के कामकाज से खुश नहीं है। उसने गत 11 दिसंबर को ही वीसी को छात्रों से शांति से पेश आने और इस मामले का हल निकालने के लिए कहा था। बताया गया है कि मंत्रालय ने इसके लिए समझौते की लाइन भी स्पष्ट कर दी थी। इसके मुताबिक जेएनयू प्रशासन को केवल बढ़ी फीस लेने के लिए कहा गया था जबकि सर्विस और यूटिलिटी चार्जेस को यूजीसी को वहन करने के लिए कहा गया था। बताया जाता है कि वीसी पहले तो इस समझौते के तहत सहमत हो गए थे, लेकिन बाद में पलट गए।
ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन (एआईएसएफ) के राष्ट्रीय अध्यक्ष शुभम बनर्जी ने अमर उजाला से कहा कि विश्वविद्यालय परिसर में किसी के भी प्रवेश करने से पहले जांच होती है, सीसीटीवी कैमरे में उसकी रिकॉर्डिंग होती है। लेकिन जेएनयू में पहले तो सीसीटीवी खराब कर दिया गया और उसके बाद गुंडों को विश्वविद्यालय परिसर में आने, हिंसा करने और हिंसा कर सुरक्षित निकल जाने दिया गया। इस पूरे प्रकरण को ध्यान से देखें तो समझ आ जाता है कि बिना प्रशासन की सहमति के यह सब नहीं हो सकता।
उऩ्होंने कहा कि इस मामले में दिल्ली पुलिस ने भी अपना कर्तव्य नहीं निभाया। उसने ऊपर के लोगों के आदेश पर छात्रों की पिटाई होने दिया। इस कारण से दिल्ली पुलिस को भी छात्रों से माफी मांगनी चाहिए।