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स्टांप मुकद्दमों मं लगी पेनाल्टी से मिलेगी आपको राहत
ब्यूरो/अमर उजाला, नोएडा
Updated Sat, 21 Nov 2015 09:07 AM IST
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अगर आप अपनी संपत्ति पर स्टांप की कमी का मुकदमा झेल रहे हैं और उस पर भारी-भरकम पेनाल्टी भी लग गई है तो परेशान न हों। विभाग ने समाधान योजना लागू कर दी है। इससे पेनाल्टी से राहत मिल जाएगी। इस समय जिले में 435 स्टांप मुकदमे दर्ज हैं, जिन पर करीब 889 करोड़ रुपये के स्टांप शुल्क का दावा किया गया है।
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दरअसल, प्रमुख सचिव अनिल कुमार की तरफ से जारी शासनादेश रजिस्ट्री कार्यालय को मिल गया है। इसके अनुसार नवंबर, दिसंबर, जनवरी और फरवरी के लिए समाधान योजना लागू की गई है। 30 अक्तूबर 2015 तक स्टांप कमी के जितने भी मुकदमे दर्ज किए गए हैं उनका निस्तारण शीघ्र करने को कहा गया है।
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संपत्ति खरीदार को पेनाल्टी से राहत दी गई है, सिर्फ 10 रुपये की पेनाल्टी लगेगी। संपत्ति पर जितना कम स्टांप लगा है, रजिस्ट्री के समय से उस पर 18 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित भुगतान कर राहत पा सकते हैं। योजना तत्काल प्रभाव से प्रदेश भर में लागू कर दी गई है।
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बहुत से संपत्ति खरीदार सर्किल रेट से भी कम कीमत पर स्टांप शुल्क देकर रजिस्ट्री करा लेते हैं। कई बार ज्यादा निर्माण को कम दिखाकर भी स्टांप शुल्क बचाने की कोशिश की जाती है, लेकिन जब विभागीय अधिकारी मौके पर मुआयना करते हैं तो स्टांप कमी मिलने पर मुकदमा दर्ज हो जाता है।
एआईजी, एसडीएम, एडीएम वित्त और डीएम के न्यायालय में ये मुकदमे दर्ज किए जाते हैं। ये मुकदमे लंबे समय तक चलते रहते हैं।
शासनादेश में भी बहुत अधिक अर्थदंड लगाने का जिक्र किया गया है। स्टांप कमी पाए जाने पर रजिस्ट्री होने की तिथि से स्टांप कमी की रकम पर 18 फीसदी वार्षिक ब्याज और पेनाल्टी लगाई जाती है। इसकी सीमा तय नहीं है। अधिकारी अपनी मर्जी से पेनाल्टी तय कर देते हैं।
बाद में उसे कम करने के नाम पर अनुचित लाभ लेने की कोशिश की जाती है। बहुत ज्यादा पेनल्टी होने पर संपत्ति खरीदार कोर्ट चले जाते हैं, जिससे मामला लंबे समय तक अटक जाता है। ऐसी स्थिति में पेनाल्टी और ब्याज तो दूर की बात है, स्टांप की मूल रकम भी अटक जाती है जिससे विभाग को नुकसान होता है। साथ ही, संपत्ति खरीदार को भी परेशानी झेलनी पड़ती है।