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सुविधा: दिल्ली में अब पासपोर्ट सेवा केंद्र जैसे होंगे रजिस्ट्रार ऑफिस, बढ़ेगा AI का इस्तेमाल; दूर रहेंगे दलाल

Sat, 23 May 2026 04:47 PM IST
विकास कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: विकास कुमार Updated Sat, 23 May 2026 04:47 PM IST
सार

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इसके लिए संबंधित विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ विशेष बैठक कर इस पूरे मॉडल पर चर्चा की है। बैठक में कुछ निजी कंपनियों ने प्रेजेंटेशन भी दिए, जिनमें दूसरे राज्यों में लागू तकनीक आधारित सेवा मॉडलों की जानकारी साझा की गई।

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Registrar offices in Delhi now resemble Passport Seva Kendras with increased use of AI
रेखा गुप्ता, दिल्ली की मुख्यमंत्री - फोटो : ANI (फाइल फोटो)

विस्तार

दिल्ली के रजिस्ट्रार ऑफिस अब पासपोर्ट सेवा केंद्रों जैसे हाईटेक बनेंगे। यहां लंबी लाइनें, फाइलों के ढेर और दलालों के दबदबे खत्म हो जाएंगे। इसके लिए दिल्ली सरकार ऐसा सिस्टम तैयार कर रही है, जहां ऑनलाइन अपॉइंटमेंट से लेकर एआई आधारित फेस ऑथेंटिकेशन और लाइव ट्रैकिंग तक हर कदम डिजिटल निगरानी में होगा। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा है कि रजिस्ट्री के नाम पर अब तक होने वाली भागदौड़ को खत्म करने, भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने और आम आदमी को सम्मानजनक, तेज और पारदर्शी सेवा देने के लिए ये बदलाव जरूरी हैं।

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खत्म हो जाएंगी काफी समस्या
दिल्ली में अब प्रॉपर्टी रजिस्ट्री सिर्फ सरकारी प्रक्रिया नहीं, बल्कि टेक्नोलॉजी से संचालित एक स्मार्ट सर्विस एक्सपीरियंस बनेगी। सरकार की योजना राजधानी के सभी रजिस्ट्रार कार्यालयों की कार्य संस्कृति बदलने की है। अभी प्रॉपर्टी रजिस्ट्री से जुड़े कामों में लोगों को घंटों इंतजार, तकनीकी दिक्कतों और बिचौलियों पर निर्भरता जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। कई जगहों पर गलत मूल्यांकन, दस्तावेजों की ट्रैकिंग में मुश्किलें और फर्जी कागजात के मामलों की शिकायतें भी सामने आती रही हैं। सरकार का मानना है कि नई डिजिटल व्यवस्था इन समस्याओं को काफी हद तक खत्म कर सकती है।

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सीएम ने बुलाई थी विशेष बैठक
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इसके लिए संबंधित विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ विशेष बैठक कर इस पूरे मॉडल पर चर्चा की है। बैठक में कुछ निजी कंपनियों ने प्रेजेंटेशन भी दिए, जिनमें दूसरे राज्यों में लागू तकनीक आधारित सेवा मॉडलों की जानकारी साझा की गई। अधिकारियों ने बताया कि प्रशिक्षित स्टाफ, एकीकृत डिजिटल सिस्टम और प्रोफेशनल प्रबंधन के जरिए नागरिक सेवाओं को अधिक तेज और पारदर्शी बनाया जा सकता है। इसके बाद सरकार ने दिल्ली में भी इसी तरह के मॉडल रजिस्ट्रार कार्यालय विकसित करने का फैसला किया।

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एयरपोर्ट-पासपोर्ट सेवा केंद्रों जैसी होंगी सुविधाएं
प्रस्तावित व्यवस्था के तहत रजिस्ट्रार कार्यालयों का पूरा ढांचा बदला जाएगा। यहां एयरपोर्ट और पासपोर्ट सेवा केंद्रों जैसी सुविधाएं देने की तैयारी है। वातानुकूलित प्रतीक्षालय, हेल्प डेस्क, डिजिटल सहायता केंद्र, पेयजल, स्वच्छ शौचालय और प्रशिक्षित स्टाफ जैसी सुविधाएं उपलब्ध होंगी। साथ ही स्मार्ट टोकन सिस्टम और रियल टाइम एप्लीकेशन ट्रैकिंग के जरिए लोगों का इंतजार समय कम करने पर जोर रहेगा। सरकार चाहती है कि नागरिकों को बार-बार कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें और अधिकतर प्रक्रियाएं ऑनलाइन तथा तकनीक आधारित हों। 

सुरक्षा-सत्यापन सबकुछ डिजिटल
नई व्यवस्था में सुरक्षा और सत्यापन तंत्र को भी पूरी तरह आधुनिक बनाने की तैयारी है। मुख्यमंत्री के मुताबिक एआई आधारित फेस रिकग्निशन तकनीक के जरिए आवेदकों की पहचान सुनिश्चित की जाएगी। इसके अलावा बैकग्राउंड वेरिफिकेशन, डिजिटल रिकॉर्ड प्रबंधन और ब्लॉकचेन आधारित रिकॉर्ड सुरक्षा जैसे सिस्टम लागू करने की योजना है। इससे संपत्ति दस्तावेजों के साथ छेड़छाड़, फर्जीवाड़ा और विवादों को कम करने में मदद मिलेगी। जियो-फेंसिंग और सुरक्षित डेटा इंटीग्रेशन जैसी तकनीकों का इस्तेमाल भी प्रस्तावित है ताकि रिकॉर्ड पूरी तरह सुरक्षित और ट्रैकेबल बने रहें।

निजी भागीदारों की भी ली जाएगी मदद
सरकार का कहना है कि इन केंद्रों के संचालन में निजी भागीदारों की मदद ली जा सकती है, लेकिन वैधानिक अधिकार और अंतिम निर्णय लेने की शक्तियां पूरी तरह सरकारी अधिकारियों के पास ही रहेंगी। इसके लिए अनुभवी कंपनियों का चयन पारदर्शी प्रक्रिया के जरिए किया जाएगा। नई व्यवस्था का असर सब-रजिस्ट्रार कार्यालयों पर पड़ेगा। भीड़ कम होने से सरकारी कर्मचारी प्रशासनिक और सत्यापन संबंधी कामों पर अधिक ध्यान दे पाएंगे। वहीं आम लोगों को दलालों और बिचौलियों से राहत मिलने की उम्मीद है। सरकार का दावा है कि नई प्रणाली से राजस्व चोरी पर रोक लगेगी और संपत्तियों के गलत मूल्यांकन की समस्या भी कम होगी।

बदल सकता है रजिस्ट्री व्यवस्था का चेहरा
दिल्ली में हर साल लाखों लोग संपत्ति खरीद-बिक्री और रजिस्ट्री से जुड़े कामों के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाते हैं। ऐसे में यदि यह मॉडल प्रभावी तरीके से लागू होता है तो राजधानी में प्रॉपर्टी रजिस्ट्री व्यवस्था का चेहरा बदल सकता है। सरकार इसे केवल डिजिटल सुधार नहीं, बल्कि नागरिकों और सरकारी सेवाओं के बीच भरोसा मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम मान रही है।

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